LPG Cylinder Crisis: देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कुछ ही दिनों पहले बढ़ोतरी की गई। अब सिलेंडर की आपूर्ति में कमी से लोगों की चिंता में इजाफा होने लगा है। देश में कई जगहों पर सिलेंडर हासिल करने के लिए लंबी लाइनें भी देखी गई। यह संकट क्यों पैदा हुआ, इस बारे में पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट।
LPG Cylinder Shortage in India: ईरान और इजराइल-अमेरिका (Iran-Israel America War Impact) के बीच बढ़ते संघर्ष का असर भारत पर दिखने लगा है। भारत में एलपीजी सिलेंडर (LPG cylinder Crisis India) को लेकर मारामारी शुरू हो गई। भारत में एलपीजी की आपूर्ति का बड़ा हिस्सा पश्चिमी एशियाई देशों से आता है। हालांकि केंद्र सरकार का कहना है कि पहले भारत 27 देशों से तेल और ऊर्जा संसाधन खरीदता था, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सरकार ने अपने नेटवर्क का विस्तार कर अब लगभग 40 देशों से आपूर्ति प्राप्त करने की व्यवस्था की है। आइए जानते हैं कि भारत में ऊर्जा जरूरतों में क्यों पड़ रही है बाधा और सरकार क्या कर रही है प्लान?
भारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। देश एलपीजी के मामले में भी विदेशों पर निर्भर करता है। भारत की कुल एलपीजी खपत का लगभग करीब 55–60 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आता है। इन आयातों का बड़ा भाग पश्चिम एशिया के देशों—जैसे सऊदी अरब, इराक, कतर, यूएई और कुवैत—से आता है। पिछले 12 दिनों से चल रहे ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के चलते तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
वहीं दक्षिण कोरिया अपनी खपत का लगभग 70 प्रतिशत तेल मध्य पूर्व से खरीदता है। जापान अपने लगभग 95 प्रतिशत तेल का आयात मध्य पूर्व से करता है। हालांकि उसके पास इतना तेल भंडार है कि लगभग 354 दिनों तक अपनी खपत पूरी कर सकता है।
भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 18-20% सऊदी अरब से आता है। इसके बाद कतर का नंबर आता है। कतर से भारत को कुल एलपीजी निर्यात का 15-18%, यूएई से 10-12%, कुवैत से 8-10% और अमेरिका से 7-9% होती है। यदि इन पांच देशों को मिलाकर देखें तो भारत के कुल एलपीजी आयात का लगभग 60-65% हिस्सा इन्हीं से आता है।
पश्चिम एशिया से निकलने वाला अधिकांश कच्चा तेल और एलपीजी समुद्री मार्ग से दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचता है। इस मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) है। दुनिया की कुल तेल खपत का लगभग पांचवां हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है। एनालिटिक्स फर्म वोर्टेक्सा (Vortexa) के अनुसार, पिछले वर्ष औसतन प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक कच्चा तेल, कंडेनसेट और ईंधन यहां से गुज़रा। दुनिया के लगभग 20–25 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होता है। वहीं भारत अपने तेल का 90% और एलपीजी का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है। ईरान-इजराइल युद्ध के कारण इस क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया और इससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
युद्ध वाले क्षेत्रों में जहाजरानी कंपनियां अपने जहाज भेजने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाती हैं। समुद्री बीमा प्रीमियम में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। समुद्री बीमाकर्ताओं ने फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी जैसे क्षेत्रों को "उच्च जोखिम" घोषित कर दिया है जिससे चलते बीमा लागत बहुत अधिक हो गई है। जहाजरानी कंपनियां ऐसे हालात में युद्ध जोखिम बीमा (War Risk Insurance) भी वसूलती हैं। सामान्य परिस्थितियों में जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा जहाज के कुल मूल्य का 0.01%–0.02% तक होता है। यदि किसी तेल टैंकर की कीमत 10 करोड़ डॉलर है तो सामान्य स्थिति में युद्ध जोखिम बीमा लगभग 10,000–20,000 डॉलर तक हो सकता है। लेकिन किसी क्षेत्र में युद्ध या सैन्य तनाव बढ़ता है तो बीमा कंपनियां इसे बढ़ाकर लगभग 0.2% से 0.5% तक वसूलने लगती है। यानी वही 10 करोड़ डॉलर का टैंकर यदि जोखिम वाले क्षेत्र में जाता है तो बीमा लागत 2 लाख से 5 लाख डॉलर तक पहुंच सकती है। जाहिर है इन हालात में एलपीजी और तेल की ढुलाई महंगी हो जाती है और दूसरा आपूर्ति में देरी होने लगती है।
युद्ध की स्थिति में वैश्विक बाजार में ऊर्जा संसाधनों की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं। जब तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो एलपीजी भी महंगा हो जाता है। ईरान और इजराइल के बीच युद्ध छिड़ने के 8वें दिन ही भारत में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रूपये प्रति सिलेंडर और 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में भी करीब 115 रूपये की बढ़ोतरी की गई है।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी पर प्रतिक्रिया देते हुए नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के उपाध्यक्ष और रेस्तरां व्यवसायी जोरावर कालरा ने कहा कि यदि यह स्थिति जारी रही तो रेस्टोरेंट उद्योग को प्रतिदिन लगभग 1,200–1,300 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति पहले से ही कम होती जा रही है और देश के लगभग 70–75 प्रतिशत रेस्टोरेंट अपने संचालन के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं।
सरकार के अनुसार हाल में उठाए गए कदमों से एलपीजी आपूर्ति की स्थिति स्थिर हो गई है। तेल रिफाइनरियों ने एलपीजी उत्पादन लगभग 10 प्रतिशत बढ़ा दिया है। अधिकारियों ने कहा कि देश की सभी रिफाइनरियां इस समय 100 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रही हैं, ताकि देशभर में रसोई गैस की आपूर्ति निर्बाध बनी रहे। सरकार ने लोगों से सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विश्वास न करने की भी अपील की है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबरों को लेकर चिंता जताई और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की। दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिति और खराब हो सकती है और इसके पीछे वैश्विक तनाव और व्यापार समझौतों का भी असर है। उन्होंने कहा, “यह संकट गहराता जा रहा है और आगे और बढ़ेगा। जिस तरह हमारी सरकार ने अमेरिका के सामने व्यापार समझौते में झुकाव दिखाया है, उससे संकट और गहरा सकता है। साथ ही युद्ध भी चल रहा है, इसलिए स्थिति और गंभीर हो सकती है।”