
Matheran pollution : राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (National Green Tribunal) याचिका पर आधारित एक रिपोर्ट की एक जांच के दौरान यह पाया गया कि एशिया का एकमात्र वाहन-मुक्त हिल स्टेशन पारिस्थिकीय दबाव में है।
NGT report : राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने हाल ही में महाराष्ट्र के एक पहाड़ी क्षेत्र और अधिसूचित पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र (ईएसजेड) माथेरान में प्रदूषण, निरंतर वायु, जल और मृदा क्षरण का मुख्य कारण घोड़े के गोबर को बताया है।
Matheran Pollution : न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. सुजीत कुमार बाजपेयी की पीठ महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) के नेतृत्व वाली एक व्यापक संयुक्त समिति की रिपोर्ट की जांच कर रही थी। यह जांच उस याचिका के संबंध में की जा रही थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि माथेरान जो कि भारत का एकमात्र वाहन मुक्त पहाड़ी स्टेशन है, वह लगातार दबाव में है।
महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में लगभग 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माथेरान एक शांत और पर्यावरण के अनुकूल हिल स्टेशन है। अपने हरे-भरे जंगलों, 30 से अधिक दर्शनीय स्थलों और एक टॉय ट्रेन के लिए जाना जाने वाला यह स्थान मुंबई से लगभग 90 किलोमीटर और पुणे से 120 किमी दूर स्थित एक लोकप्रिय पिकनिक और हॉलीडे स्पॉट है।
NGT की पीठ ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, 'यह पाया गया है कि संबंधित स्थल पर मानसून से पहले, मानसून के दौरान और मानसून के बाद वायु गुणवत्ता का आकलन किया गया था। इस आकलन से यह पता चला कि PM₁₀ और PM₂.₅ का स्तर CPCB के मानकों से अधिक था। इसका मूल कारण घोड़ों के गोबर का उत्सर्जन और कच्ची सड़कों से उड़ने वाली धूल थी। इन प्रदूषण में सल्फर डाइऑक्साइड SO₂और नाइट्रोजन ऑक्साइड NO₂ पाए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि माथेरान का वायु प्रदूषण उद्योग से फैलने वाले प्रदूषण के चलते नहीं बल्कि घोड़ों की वजह से है।
पर्यावरण के जानकार अनिल प्रकाश ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि ऐसा एक मामला आगरा में उनके 2024 में प्रवास के दौरान आया था। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के आगरा के नगर निगम ने यह आदेश दिया कि कोई भी पशुपालक अपनी भैंस को नहलाने के लिए यमुना में नहीं ले जाएं। इस आदेश के बाद करीब एक दर्जनों भैंसों को भी गिरफ्तार किया गया था।
आगरा के नगर आयुक्त के आदेश में यह कहा गया था कि कोई भी पालतू पशु को यमुना नदी में नहलाने जाए तो उसे तुरंत पकड़कर शेल्टर होम भेज दिया जाए। पशु पालकों को चालान पकड़ाएं जाएं। इस बारे में अनिल प्रकाश ने कहा कि आगरा में निगम की दर्जनों नालियां यमुना में गिरती हैं, उनपर रोक क्यों नहीं लगाई जाती है। बड़ी संख्या में सीवेज ट्रीटमेंट के बगैर नालों का पानी यमुना को लगातार जहरीला बना रहे हैं। हर साल नगर निगम लाखों करोड़ों रुपए यमुना की साफ सफाई के लिए खर्च करता है। उन्होंने कहा कि माथेरान के मामले में अभी से कुछ कहा नहीं जा सकता है, क्योंकि पशुपालकों का जवाब या विरोध कुछ भी सामने नहीं आया है। पशु भी पर्यावरण प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं, लेकिन ये छोटे स्तर का प्रदूषण है। केंद्र और राज्य सरकारों को बड़े प्रदूषण फैलाने वाले यूनिट पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
Eutrophication क्या है? घोड़ों के मल में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और अमोनिया होते हैं। बारिश के समय घोड़ों के मल नदियों, तालाबों और भूजल में प्रवेश कर जाते हैं। इसे सुपोषण (Eutrophication) की समस्या पैदा हो जाती है, जो एक किस्म की पर्यावरणीय समस्या पैदा करता है। अतिरिक्त पोषक तत्वों के कारण शैवाल (Algae) तेजी से बढ़ने लगते हैं, जिससे पानी में ऑक्सीजन कम हो जाती है। इसके चलते जलीय जीवन (मछलियां आदि) नष्ट हो जाता है और मृत क्षेत्र का निर्माण हो जाता है। इनके चलते होने वाले जल प्रदूषण इंसानों में डायरिया, पेट संक्रमण, त्वचा रोग फैलाते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह ज्यादा जोखिम भरा साबित हो सकता है।