Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 10 सितंबर 2025 को समाप्त हो गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बुधवार को शाम सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।
Monsoon Session of Rajasthan Assembly: राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 10 सितंबर 2025 को समाप्त हो गया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने बुधवार को शाम 4:58 बजे सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। यह सत्र 1 सितंबर से शुरू हुआ था और कुल 6 बैठकों में 18 घंटे 40 मिनट की कार्यवाही हुई।
इस दौरान विधायकों द्वारा पूछे गए सवालों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों, स्थगन प्रस्तावों और विधायी कार्यों ने सत्र को महत्वपूर्ण बनाया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सत्र की समाप्ति पर कार्यवाही का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया, जिसमें कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां सामने आईं।
सत्र समाप्ति के बाद वासुदेव देवनानी ने बताया कि सोलहवीं विधानसभा के पहले तीन सत्रों में 91.5% प्रश्नों के जवाब विधानसभा को प्राप्त हुए, जो एक बड़ी उपलब्धि है। प्रथम सत्र में 2098 में से 2073 प्रश्नों, द्वितीय सत्र में 7945 में से 7657 प्रश्नों, और तृतीय सत्र में 9701 में से 8351 प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हुए। यह पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में प्रश्नों के जवाब समय पर प्राप्त हुए, जिसका श्रेय अधिकारियों के साथ निरंतर समीक्षा को दिया गया।
चौथे सत्र में कुल 3008 प्रश्न प्राप्त हुए, जिनमें 1237 तारांकित, 1770 अतारांकित, और एक अल्प सूचना प्रश्न शामिल थे। इनमें से 120 तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध किए गए, जिनमें 53 प्रश्नों पर मौखिक रूप से चर्चा हुई और उनके जवाब भी दिए गए। इसके अतिरिक्त, 119 अतारांकित प्रश्न भी सूचीबद्ध किए गए। यह दर्शाता है कि विधानसभा ने प्रश्नकाल को गंभीरता से लिया और जनहित के मुद्दों पर चर्चा को प्राथमिकता दी।
सत्र के दौरान नियम-131 के तहत 437 ध्यानाकर्षण प्रस्तावों की सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 14 प्रस्ताव प्राप्त किए गए। दो प्रस्तावों को कार्यसूची में शामिल किया गया, जिन पर संबंधित मंत्रियों का ध्यान आकर्षित किया गया। देवनानी ने बताया कि प्रथम सत्र में 142 में से 136, द्वितीय सत्र में 733 में से 707 और तृतीय सत्र में 811 में से 732 प्रस्तावों के जवाब प्राप्त हुए। कुल मिलाकर, 78% ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के जवाब प्राप्त होना विधानसभा के लिए एक नया रिकॉर्ड है।
नियम-50 के तहत 134 स्थगन प्रस्तावों की सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 21 प्रस्तावों पर सदन में चर्चा का अवसर दिया गया। 17 विधायकों ने इन प्रस्तावों पर अपने विचार रखे। इसके अलावा, नियम-295 के तहत 95 विशेष उल्लेख प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 78 को सदन में पढ़ा गया या पढ़ा हुआ माना गया। 15 प्रस्ताव विधायकों की अनुपस्थिति के कारण व्यपगत हो गए।
स्पीकर देवनानी ने बताया कि पहले तीन सत्रों में विशेष उल्लेख के कुल 651 प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से 615 के जवाब प्राप्त हो चुके हैं। केवल 36 प्रस्तावों के जवाब लंबित हैं, जो शीघ्र ही प्राप्त होने की उम्मीद है। यह दर्शाता है कि विधानसभा ने विधायकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लिया और उनके समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई की।
सत्र के दौरान विधायकों द्वारा कुल 267 पर्चियां प्राप्त हुईं, जिनमें से लॉटरी के माध्यम से 20 पर्चियों का चयन किया गया। चयनित पर्चियों के आधार पर संबंधित विधायकों को सदन में अपने विचार रखने का अवसर मिला। यह प्रणाली विधायकों को जनहित के मुद्दों को उठाने का समान अवसर प्रदान करती है और सत्र की पारदर्शिता को बढ़ाती है।
चौथे सत्र में विधायी कार्यों में भी महत्वपूर्ण कार्य हुआ। कुल 7 विधेयक प्रस्तुत किए गए, जिनमें से प्रवर समिति द्वारा प्रस्तुत 3 विधेयकों सहित कुल 10 विधेयक सदन द्वारा पारित किए गए। एक विधेयक को वापस लिया गया। विधायकों ने विधेयकों पर 161 संशोधन प्रस्ताव पेश किए, जिनमें से 46 को सचिवालय स्तर पर अग्राह्य घोषित किया गया और 115 संशोधन स्वीकार किए गए।
बता दें, पिछले सत्र की तुलना में, जहां 12 विधेयक प्रस्तुत किए गए और 10 पारित हुए, इस सत्र में विधायी कार्य की गति बरकरार रही। पिछले सत्र में 3 विधेयक प्रवर समिति को सौंपे गए थे, और 210 संशोधन प्रस्तावों में से 171 स्वीकार किए गए थे। यह दर्शाता है कि विधानसभा ने न केवल विधायी कार्यों को समय पर पूरा किया, बल्कि विधायकों के सुझावों को भी महत्व दिया।
वासुदेव देवनानी ने बताया कि सोलहवीं विधानसभा का यह सत्र कई नए आयामों को जोड़ने में सफल रहा। प्रश्नों, ध्यानाकर्षण प्रस्तावों, और विशेष उल्लेखों के जवाबों की उच्च प्राप्ति दर ने विधानसभा की कार्यक्षमता को प्रदर्शित किया। इसके अलावा, स्थगन प्रस्तावों और पर्ची प्रणाली के माध्यम से विधायकों को जनहित के मुद्दों को उठाने का पर्याप्त अवसर मिला। सत्र के समापन पर राष्ट्रगान के साथ सदन की कार्यवाही समाप्त हुई, जो विधानसभा की गरिमा को और बढ़ाता है।