
Banda hooch tragedy : बंडा शराब त्रासदी में प्रशासन के अधिकृत मौके के आंकड़े किसी को भी हजम नहीं हो रहे हैं। प्रशासन जहरीली शराब त्रासदी में सिर्फ 20 लोगों की मौत ही मान रहा है। इधर बंडा विधानसभा के पूर्व विधायक तरवर सिंह लोधी का कहना है कि त्रासदी में कम से कम 45 मौतें हुईं हैं। 40 मृतकों के तो पीएम भी हुए, जो जहरीली शराब सेवन से हताहत हुए थे। इसके बावजूद प्रशासन और सरकार मौत का आंकड़ा छुपा रही है।
वर्तमान विधायक वीरेंद्र सिंह लोधी का कहना है कि पीएम रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने मृतकों के नाम तय किए हैं। कुछ मृतकों की बिसरा रिपोर्ट आना शेष है, यदि उनमें ऐसा कुछ निकलता है तो बात सामने आएगी। दरअसल पूरा मामला सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ तहसील का मामला है, जहां पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद मक्का के खेत में अवैध शराब बनाई गई थी। अवैध शराब को इथेनॉल की जगह मेथेनॉल से बनाया गया था। मेथेनॉल की मात्रा ज्यादा होने के कारण शराब जहरीली हो गई। शराब माफियाओं ने शराब को क्षेत्र में कम कीमत में सप्लाई कर दिया, जिससे 5 सितंबर से मौतों का सिलसिला शुरू हो गया और 11 व 12 सितंबर तक तीन दर्जन से ज्यादा लोग जहरीली शराब सेवन से मौत के आगोश में चले गए।
कांग्रेस के पूर्व विधायक तरवर सिंह का आरोप है कि शुरुआत में चार लोगों की मौत हुई थी, लेकिन प्रशासन ने उनके पीएम तक नहीं करवाए, ताकि मामला दबाया जा सके। लेकिन सिलसिलेवार मौतों के कारण प्रशासन मामले को दबा नहीं पाया। चार मृतक ऐसे भी थे, जो उत्तर प्रदेश कानपुर के रहने वाले थे, जिनमें तीन शहरी क्षेत्र के थे, एक कानपुर के ग्रामीण क्षेत्र से आता था। सागर जिले के गूगरा, नौराज जैसे गांवों में जहरीली शराब से सबसे ज्यादा मौतें हुईं थीं।
कांग्रेस का आरोप है कि प्रशासन ने जिन 20 लोगों को जहरीली शराब से मृत होना माना है, उन्हें मुआवजा वितरण में भी लापरवाही की जा रही है। तरवर सिंह ने कहा कि मृतकों के कुछ परिजन को चार लाख का मुआवजा दिया है, तो किसी को दो लाख ही बस दिए हैं। शेष 19-20 मृतकों के परिजन को कोई भी आर्थिक सहायता प्रशासन व सरकार की ओर से उपलब्ध नहीं कराई गई है। यह मामला जितना तेजी से देश भर में चर्चा का विषय बना था, शासन-प्रशासन ने मौतों का आंकड़ा छुपा उसको उतनी ही तेजी से दबा दिया।
बंडा शराब त्रासदी का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचने के बाद सागर जिला प्रशासन को मजबूरी में जहरीली शराब से हताहत हुए मृतकों की सूची जारी करनी पड़ी थी। प्रशासन ने सिर्फ 20 लोगों की मौत ही जहरीली शराब के सेवन से होना माना है। त्रासदी में कुल 40 लोगों की मौत हुई थी, जिसमें एक शराब बनाने वाले दिनेश शिवहरे का भी नाम शामिल था। लेकिन शेष 19 लोगों की मौत का कारण जहरीली शराब नहीं माना गया है, जबकि ये मृतक भी उन्हीं गांवों के हैं, जहां अन्य लोगों की मौत हुई थी। शेष 19 मृतकों के परिजन ने भी बताया था कि उनकी तबीयत शराब पीने के बाद बिगड़ी थी।
आनंद रावत
भगवान सिंह
भोपाली आदिवासी
गब्बर लोधी
गोविंद व.छेदीलाल
हरनाम राय
कैलाश अहिरवार
कृष्ण कुमार
नर्मदा पटेल
रमेश सिंह
श्यामा बाई
सुरेंद्र अहिरवार
महेंद्र सिंह
मुकेश सिंह
नर्मदा
नीलेश लोधी
महेश रावत
शंकर आदिवासी
राजधर सेन
शराब त्रासदी की न्यायिक जांच के लिए आयोग के गठन को लगभग तीन हफ्ते का समय बीत चुका है। लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक जांच शुरू नहीं हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की न्यायिक जांच के निर्देश दिए थे, जिसके बाद अधिसूचना जारी की गई थी। जांच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रिटायर जस्टिस विष्णु प्रताप सिंह चौहान की अध्यक्षता में होनी है। आयोग का मुख्यालय सागर की तय किया है।
जहरीली शराब के मामले में सागर पुलिस ने कुल 52 लोगों को आरोपी बनाया है, जिसमें अब तक 39 की गिरफ्तार हो चुकी है। इसमें रवि लखेरा, मनीष लोधी उर्फ यशवंत सिंह, चंद्रभान उर्फ चंदू राजपूत और शिवान्जय राजपूत वारदात के मुख्य सरगना थे। इन्होंने सागर के साथ ग्वालियर, मुरैना, दिल्ली और ललितपुर तक अवैध शराब बनाने के लिए तिगड़म बैठाई और फिर ऐसी शराब बनाई, जिसे पीते ही करीब 40 लोगों की मौत हो गई।
पुलिस के मुताबिक छत्तरपुर के महोबा का मूल निवासी और ललितपुर में रहने वाला रवि इस पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार था। उसे जहरीली शराब बनाने और उसमें प्रयुक्त होने वाले रसायनों की पूरी जानकारी थी। जांच में खुलासा हुआ है कि उसका संपर्क लाइसेंसी ठेकेदार मनीष लोधी से था, जिसे उसने अवैध शराब तैयार करने की तकनीक सिखाई थी।
मनीष लोधी उर्फ यशवंत सिंह (लाइसेंसी ठेकेदार) का नेटवर्क जहरीली शराब तैयार करने में जुटा हुआ था। यह आरोपी बरेठी शराब दुकान का ठेकेदार था। पुलिस का का कहना है कि उसने वैध कारोबार की आड़ में अवैध शराब का सिंडिकेट चलाया। उसके खिलाफ 11 प्रकरण दर्ज हैं। मामले के खुलासे के बाद सागर रोड स्थित उसके बार को सील कर दिया गया है। दुकान व बार की में लोगों को जहर परोसता था।
सतरवारा निवासी जिला सागर चंदू का नाम इस अवैध धंधे में प्रमुखता से आया है। पुलिस के अनुसार बह शिवान्जय राजपूत के माध्यम से मनीष लोधी के संपर्क में था और उसके मक्के के खेत में ही जहरीली शराब तैयार चंद्रमान की जाती थी। चंदू पर पहले से पांच आपराधिक मामले दर्ज हैं।
छापरी निवासी शिवान्जय इस पूरे नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। पुलिसिया जांच बताती है कि वह चंदू का रिश्तेदार है और उसने तैयार हुई जहरीली शराब को आसपास के शिवान्जय ग्रामीण इलाकों तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाई।
सागर पुलिस ने इतिहास में पहली बार 12 दिनों में तीन शॉर्ट एनकाउंटर किए। बंडा शराब त्रासदी में फरार चल रहे आरोपियों को गिरफ्त में लेने के लिए सागर पुलिस शॉर्ट एनकाउंटर से भी पीछे नहीं हट रही है। सागर पुलिस ने इतिहास में पहली बार 12 दिनों के कम समय में तीन शॉर्ट एनकाउंटर किए। दिलचस्प बात यह है कि इन सभी कार्रवाइयों की टाइमिंग, घटनास्थल, हमलावर रुख और पुलिस की जवाबी कार्रवाई के तरीकों में एक जैसी समानताएं देखने को मिलीं। पुलिस ने 11 से 23 सितंबर के बीच रवि लखेरा, शिवांजय राजपूत और मनीष लोधी का शॉर्ट एनकाउंटर किया। तीनों ही एनकाउंटर रात के सन्नाटे को चीरते हुए 4 बजे से आसपास किए गए। इसके अलावा सभी कार्रवाइयां या तो जिले की यूपी सीमा से लगे जंगलों में हुईं या फिर आरोपी सागर से बाहर जाते हुए या फिर बाहर से सागर में प्रवेश करते हुए हुईं। तीनों ही शॉर्ट एनकाउंटर में पुलिस का मुखबिर तंत्र बहुत सटीक रहा, जिससे दो-दो थानों की पुलिस को संयुक्त कार्रवाई करने का मौका मिल गया।