Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2026 : देश में लोकसभा और विधानसभा में कुल सदस्यों का 33 फीसदी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात जोरशोर से चल रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (Nari Shakti Vandan Adhiniyam Passed in 2023) में पारित हो गया था, लेकिन अभी इसे लागू नहीं किया जा सका […]
Nari Shakti Vandan Adhiniyam 2026 : देश में लोकसभा और विधानसभा में कुल सदस्यों का 33 फीसदी सीट महिलाओं के लिए आरक्षित करने की बात जोरशोर से चल रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 (Nari Shakti Vandan Adhiniyam Passed in 2023) में पारित हो गया था, लेकिन अभी इसे लागू नहीं किया जा सका है। 106वां संवैधानिक संशोधन करके लोकसभा में 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने और राज्य की विधानसभाओं में कुल सीटों को 50 फीसदी बढ़ाने की चर्चा चल रही है। हालांकि, लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित करने की वकालत करने वाली भारतीय जनता पार्टी व अन्य पार्टियों ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को कितनी सीटें दी हैं, आइए जानते हैं।
वर्ष 2026 में असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और केरल में नई सरकार का गठन होना है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा 294 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। भाजपा ने सिर्फ 33 महिलाओं यानी 11.2% को सिर्फ टिकट दिया है। यह राज्य में विधानसभा चुनाव लड़ रही पार्टियों में सबसे कम है। महिलाओं को सबसे ज्यादा टिकट तृणमूल कांग्रेस ने दिया है। तृणमूल 291 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। टीएमसी ने 52 महिलाओं को टिकट दिया है, जो कुल सीटों का 27.2% है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और सहयोगी दल 235 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वाम दलों ने कुल 34 महिलाओं (13.43%) को विधानसभा चुनाव 2026 का टिकट दिया है। भाजपा की तरह कांग्रेस भी राज्य के सभी 294 सीटों पर चुनावी मैदान में उम्मीदवार उतारा है। कांग्रेस ने 35 यानी 11.9 फीसदी सीटें महिलाओं से साझा किया है।
टीएमसी ने अन्य राज्य विधानसभाओं की तुलना में लगातार महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए जगह बनाई है। वर्तमान बंगाल विधानसभा में महिलाओं की हिस्सेदारी 13.4% है, जो पूरे देश की विधानसभाओं के राष्ट्रीय औसत 8% से काफी अधिक है। वर्ष 2021 में हुए चुनाव में टीएमसी की 41 महिलाएं विधानसभा पहुंची थीं। यह बंगाल विधानसभा की कुल संख्या 294 का 13.94% था। यह संसद में महिलाओं की 14.6 हिस्सेदारी से थोड़ा ही कम है। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च के अनुसार, दुनिया भर में महिला सांसदों का प्रतिनिधित्व औसतन 27.2% है।
वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में सभी पार्टियों ने कुल 1300 से अधिक महिलाओं को टिकट दिया था। यह चुनाव लड़ रहे कुल उम्मीदवारों का 8 फीसदी था। इनमें से 61 महिलाएं यानी 11 फीसदी चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में सिर्फ 59 महिलाएं चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं थीं। वर्ष 2009 में सिर्फ 556 महिलाओं को लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया गया था। वर्ष 2019 में लोकसभा में महिला सांसदों की संख्या बढ़कर 78 हो गई थी, लेकिन वर्ष 2024 में इसमें गिरावट देखी गई। इस वर्ष महिलाओं सांसदों की संख्या घटकर 74 रह गई। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजद ने सबसे ज्यादा 33 फीसदी महिलाओं को टिकट दिया था।
वर्ष 2024 में सबसे अधिक 31 महिला सांसद बीजेपी से जीतकर लोकसभा पहुंची। वहीं इस मामले में कांग्रेस दूसरे नंबर और तृणमूल कांग्रेस तीसरे नंबर पर रहीं। कांग्रेस से 13, तृणमूल कांग्रेस से 11, समाजवादी पार्टी से 5 और डीएमके से 3 महिला सांसद चुनी गईं। बिहार की पार्टियां जेडीयू और लोजपा से 2-2 महिला सांसद चुनी गईं।
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी महिलाओं के प्रतिनिधित्व के प्रतिशत के मामले में क्षेत्रीय दल बीजद और टीएमसी सबसे आगे रहीं। इन दोनों ही पार्टियों से सबसे अधिक महिला सांसद चुनकर लोकसभा पहुंची थीं। बीजद से सबसे अधिक 42 फीसदी और टीएमसी से 39 फीसदी महिलाएं सांसद बनी थीं। इसके बाद वाईएसआर से 18 फीसदी, शिवसेना से 11, डीएम के से 8 एवं जदयू से 4 फीसदी महिलाएं सांसद चुनी गई थीं। भाजपा से 14 फीसदी महिलाएं चुनाव जीत पाई थीं।
वहीं 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 428 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें लगभग 38 महिलाएं थीं। यह कुल उम्मीदवारों का करीब 8-9% था। वहीं 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 55 महिलाओं को टिकट दिया था। वहीं 2019 में भाजपा ने महिलाओं की भागीदारी थोड़ी बढ़ाई। इस चुनाव में पार्टी ने लगभग 437 उम्मीदवारों में से 55-56 महिलाओं को टिकट दिया, यानी करीब 12-13%। यह एक उल्लेखनीय वृद्धि थी और इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में सकारात्मक कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया। भाजपा ने 2024 में कुल 446 उम्मीदवारों में से 69 महिलाओं यानी 16-17% को टिकट दिया था। इस वर्ष महिलाओं को सबसे ज्यादा टिकट देने वाली पार्टियों में से बीजेपी अव्वल रही।
वर्ष 2014 के बाद से भाजपा ने चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन यह वृद्धि अभी भी सीमित है। लोकसभा चुनावों में महिलाओं का प्रतिशत 8-9% से बढ़कर 16-17% तक पहुंचा है, जबकि विधानसभा चुनावों में यह आमतौर पर 10-15% के करीब बैठता है। हालांकि, महिलाओं के विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधित्व की यह संख्या नारी शक्ति वंदन अधिनियम के 33 फीसदी सीट से अभी कोसों दूर है।