Inequality and Corruption Control: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह और न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी सत्ता में आने के बाद अपनी नई नीतियों से दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहे हैं। आइए जानते हैं कि दोनों नेता क्या बदलाव करना चाहते हैं।
Inequality and Corruption Control: दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों अमेरिका के न्यूयॉर्क और भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हाल के दिनों में ऐसे नीतिगत बदलाव देखने को मिल रहे हैं, वह दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रही है। दोनों ही जगहों पर शासन की स्वच्छता, आर्थिक न्याय और पारदर्शिता के उठाए जा रहे सवाल, दुनिया में चर्चा का विषय बन रहे हैं। एक ओर न्यूयॉर्क में अमीरों पर कर लगाकर सार्वजनिक संसाधन जुटाने की कोशिश हो रही है, तो दूसरी ओर नेपाल में पूर्व राज परिवारों, नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच के जरिए भ्रष्टाचार पर लगाम कसने का प्रयास किया जा रहा है।
आइए पहले न्यूयॉर्क में जोहरान ममदानी द्वारा किए जा रहे पहल को समझने की कोशिश करते हैं। पिछले वर्ष न्यूयॉर्क के मेयर बने जोहरान ममदानी चुनाव के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'आंखों में आंखें डालकर' बात करने के कारण चर्चा में आए। ममदानी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान एक ऐसी योजना का समर्थन किया, जिसके तहत करोड़ों डॉलर की कीमत वाले लेकिन साल के अधिकांश समय या वर्षों से खाली पड़े घरों पर टैक्स लगाया जाएगा। इस प्रस्ताव में खास तौर पर उन अति-धनाढ्य लोगों को निशाना बनाया जाएगा, जो शहर में महंगे घर खरीदते हैं लेकिन वहां स्थायी रूप से नहीं रहते।
मेयर ममदानी ने कैथी होचुल द्वारा प्रस्तावित इस नीति का समर्थन किया है। इसके तहत 5 मिलियन डॉलर (लगभग 50 लाख डॉलर) से अधिक कीमत वाले दूसरे घरों पर वार्षिक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
गवर्नर कार्यालय के अनुसार, इस टैक्स से हर साल कम से कम 500 मिलियन डॉलर (करीब 4,000 करोड़ रुपये से अधिक) का राजस्व प्राप्त हो सकता है। यह न्यूयॉर्क शहर के लिए एक महत्वपूर्ण आय स्रोत बन सकता है, खासकर तब जब शहर बजटीय दबावों से जूझ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कदम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आम नागरिकों पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ न पड़े, बल्कि केवल अत्यधिक अमीर वर्ग से ही योगदान लिया जाए।
इस योजना का आधार 'पिए-आ-तेर' (pied-à-terre) की अवधारणा है। आमतौर पर एक घर जिसमें व्यक्ति रहता है और दूसरा घर निवेश के उद्देश्य से खरीदता है। आमतौर पर ये घर खाली रखे जाते हैं या उसे वर्ष में कभी-कभार इस्तेमाल में लाए जाते हैं। इन घरों की कीमत करोड़ों डॉलर में होती है। पिए-आ-तेर एक फ्रेंच शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है 'पैर रखने की जगह', लेकिन व्यावहारिक रूप में इसका मतलब कुछ और खास होता है। इसको एक उदाहरण से समझा जा सकता है। कोई व्यक्ति मुंबई में काम करता है लेकिन उसका परिवार जयपुर में रहता है। वह मुंबई में एक फ्लैट ले सकता है, जहां वह काम के दिनों में कभी-कभार ठहरता है। यही उसका 'पिए-आ-तेर' होगा।
'पिए-आ-तेर' का यह विचार पूरी तरह नया नहीं है। फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा जैसे देशों में पहले से ही खाली या दूसरे घरों पर टैक्स के विभिन्न मॉडल लागू किए जा चुके हैं।
ममदानी ने इस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से आर्थिक पुनर्वितरण के रूप में पेश किया है। उनका कहना है कि जो लोग न्यूयॉर्क की रियल एस्टेट में अपनी संपत्ति जमा करके रखते हैं, लेकिन शहर के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में सक्रिय भागीदारी नहीं करते, उन्हें भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने इसे “अन्यायपूर्ण व्यवस्था” बताते हुए कहा कि यह कामकाजी लोगों के हितों के खिलाफ है। उनके अनुसार, यह नीति उस असंतुलन को ठीक करने की दिशा में एक कदम है।
वहीं, गवर्नर होचुल ने इस बात पर जोर दिया कि यह टैक्स स्थानीय निवासियों पर नहीं, बल्कि 'अल्ट्रा-रिच' यानी बेहद अमीर लोगों पर केंद्रित है। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति करोड़ों डॉलर का घर खरीद सकता है, तो वह सार्वजनिक सेवाओं जैसे पुलिसिंग और पार्क के लिए योगदान देने में सक्षम है।
हालांकि, इस नीति को लेकर बहस जारी है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रियल एस्टेट में निवेश कम हो सकता है, जबकि अन्य इसे शहरी असमानता को कम करने का प्रभावी तरीका मानते हैं। हालांकि हेज फंड निवेशक सलाहकार यह बताते हैं कि लग्जरी घर अब रहने की जगह के बजाय निवेश का साधन बनते जा रहे हैं।
भारत में पहले से ही आयकर कानून के तहत घर पर टैक्स लगता है। देश में मौजूदा नियमों के अनुसार 2 घरों को खुद के उपयोग का माना जाता है। दो घरों तक कोई काल्पनिक टैक्स नहीं लगता है। अगर आपके पास 2 से ज्यादा घर हैं तो तीसरे या अतिरिक्त घर, जिसे भले ही किराए पर नहीं चढ़ाया हो, उसे 'deemed let-out' माना जाता है। सरकार यह मानती है कि उससे 'किराया मिल सकता था' और उसी अनुमानित किराए पर टैक्स लगता है।
वहीं, नेपाल के नए युवा प्रधानमंत्री बालेन शाह ने जेन जी (Gen Z Protest in Nepal) के आंदोलन के समय कहा था कि देश में भ्रष्टाचार बहुत बढ़ चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए देश में बढ़ रही बेरोजगारी और गैर-बराबरी की ओर ध्यान खींचा था। प्रधानमंत्री पद पर आसीन होते ही उन्होंने पूर्व पीएम ओली समेत कुछ राजनेताओं की गिरफ्तारी के आदेश दिए। उन्होंने अब भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व में सरकार ने पूर्व और वर्तमान नेताओं और अधिकारियों की संपत्तियों की जांच के लिए एक विशेष पैनल का गठन किया है।
बालेन शाह जिसकी प्रसिद्धी देश में पहले एक रैपर की थी। उन्होंने देश की राजधानी काठमांडू के मेयर बनने के बाद वहां की जनता को दिखाया किया अगर इच्छाशक्ति हो तो व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म या कम तो किया जा सकता है। मेयर के रूप में उनके कार्य और सत्ता में बैठे राजनेताओं के खिलाफ मुखरता से बात करने के चलते देश के आम लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ती चली गई। उन्होंने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) का गठन किया और इसी साल 5 मार्च को हुए राष्ट्रीय चुनाव में भाग लिया। उनकी पार्टी चुनाव में भारी बहुमत से जीतकर सत्ता में आई।
नई सरकार के गठन के दो महीने बाद ही भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के उद्देश्य से पांच सदस्यीय पैनल का गठन किया गया। इस पैनल की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज राजेंद्र कुमार भंडारी को बनाया गया है। कैबिनेट प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने मीडिया से बातचीत में कहा, यह जांच पूरी तरह साक्ष्य और कानूनी मानकों के आधार पर की जाएगी। पैनल अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा, जिसके बाद संबंधित एजेंसियां आवश्यक कार्रवाई करेंगी।
यह बताया जा रहा है कि इस जांच में सैकड़ों नेताओं और अधिकारियों को कवर किया जाएगा, जिन्होंने 2008 में राजशाही के अंत के बाद सार्वजनिक पदों पर काम किया है। यह कदम नेपाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। यह पहल न केवल राजनीतिक जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम है, बल्कि यह भी दिखाती है कि नई पीढ़ी की राजनीति किस तरह पारदर्शिता और सुधार को प्राथमिकता दे रही है।
न्यूयॉर्क और नेपाल की इन दोनों पहल का मूल उद्देश्य समान मालूम हो रहा है। दोनों का मकसद आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं को कम करना है। न्यूयॉर्क में ममदानी का फोकस आर्थिक गैर-बराबरी को कम करने की है तो नेपाल में बालेन सरकार का लक्ष्य राजनीतिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पर है। दोनों ही नेता यह संदेश देना चाहते हैं कि संसाधनों और सत्ता का उपयोग अधिक जिम्मेदारी और जवाबदेही के साथ होना चाहिए।