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Parental Care Leave: क्यों भारत में मां-बाप की सेवा के लिए पेड लीव की उठने लगी मांग ? जानिए

Parental Care Leave: दुनिया के कई देशों में बुजुर्ग मां और पिता की सेवा के लिए पैरेंटल केयर लीव या एल्डर केयर लीव मिलता है। नौकरीपेशा युवक और युवतियां कई बार अपने बुजुर्ग मां-पिता की जरूरत में उन्हें देखने नहीं जा पाते। ऐसे में युवक भावनात्मक अपराधबोध से घिरने लगते हैं। आइए जानते हैं कि भारत में इसपर चर्चा क्यों होने लगी है?

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Feb 16, 2026
देश में बुजुर्ग मां-पिता की सेवा के लिए छुट्टी की मांग उठने लगी है।

Parental Care Leave in India: दुनिया में सबसे ज्यादा युवाओं वाले देशों में भारत अब बहुत निचले पायदान पर चला गया है। यहां बुजुर्गों की आबादी में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। भारत में 0–24 वर्ष की आबादी सिर्फ 6.15 करोड़ है जबकि 15-29 वर्ग के आयु वाले युवाओं की आबादी सिर्फ 3.6 करोड़ के करीब है, जबकि देश में वरिष्ठ नागरिकों की आबादी लगभग 14.9 करोड़ के करीब है। इन बुजुर्गों का ख्याल रखने वाली सैंडविच जेनरेशन वाली आबादी कई तरह की परेशानियों से जूझ रही है। उन्हें अपने बुजुर्ग मां-पिता का ख्याल रखने में बहुत मुश्किल आती है। ऐसे में देश में पैरेंटल केयर ​लीव की मांग उठने लगी है।

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पेरेंटल केयर लीव की क्यों है दरकार?

Is parental care leave available in India? देश की कुल जनसंख्या में से बुजुर्गों की आबादी लगभग 10.5 प्रतिशत हैं। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2036 तक देश में बुजुर्ग आबादी बढ़कर 23 करोड़ (Senior citizen population India) से ज्यादा हो जाएगी। यह भी कि 2050 तक हर पांचवां भारतीय 60 वर्ष से ऊपर होगा। तेजी से बढ़ती हुई बुजुर्ग आबादी की इस रफ्तार को देखते हुए देश में पेरंटल केयर लीव की चर्चा होने लगी है। दरअसल, बुजुर्ग मां-बाप की सेवा करने वाली सैंडविच जेनरेशन (30-50) आबादी की अपनी कई तरह की समस्याएं होती हैं और ऐसे में उन्हें कई बार मां-बाप की सेवा के लिए छुट्टी लेने की उपेक्षा करनी पड़ती है।

सुमित्रा वाल्मीकि ने राज्यसभा में उठाया पैरेंटल केयर लीव का मुद्दा

हाल ही में राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि ने सरकार से यह मांग की, 'नौकरीपेशा संतानों को अपने 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुज़ुर्ग माता-पिता की सेवा के लिए कम से कम 45 दिन का वेतन सहित अवकाश मिलना चाहिए। उन्होंने इसे सामाजिक ऋण बताया।' उन्होंने कहा कि वास्तव में माता-पिता अपने जीवन के दो दशक से ज्यादा बच्चों के पालन-पोषण में समर्पित कर देते हैं। वे अपनी इच्छाओं, आकांक्षाओं को पीछे रखकर संतानों के सपनों को पूरा करने में लगे रहते हैं। वही माता-पिता जब जीवन के अंतिम चरण में सहारे के मोहताज होते हैं, तब संतान को उनके साथ रहने का अवसर मिलना चाहिए। यह केवल संवेदना नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी है।

सैंडविच जेनरेशन की क्या है समस्याएं?

Challenges of sandwich generation in India : बुजुर्गों की बढ़ रही तादाद के बीच खड़ी पीढ़ी दो मोर्चों पर एक साथ संघर्ष कर रही है। किसी भी व्यक्ति के लिए तीस से पचास वर्ष की उम्र एक ऐसा समय होता है, जब उन्हें अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, बच्चों के भविष्य और करियर संवारने की जिम्मेदारी के साथ अपने बुजुर्ग मां-पिता की सेवा करने का भी होता है। यह समस्या एक, दो या पांच हजार लोगों की नहीं है, बल्कि इससे करोड़ों की आबादी जूझ रही है। एक अनुमान के मुताबिक भारत में सैंडविच जेनरेशन की आबादी करीब 35-40 करोड़ के करीब है।

'मां-बाप की सेवा के लिए भी छुट्टी मांगने में हिचक होती है'

डेरेवाला इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी में सीनियर मैनेजर के पद पर कार्यरत रजनीश कुमार ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि बढ़ती हुई उम्र में माता-पिता की सेवा केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह कृतज्ञता है। पेरेंटल लीव जैसी व्यवस्था इस सेवा को संभव और सम्मानजनक बना सकती है। निजी क्षेत्र की नौकरियों में छुट्टी लेने को लेकर एक किस्म का दबाव काम करता है। कई बार मां-बाप की जरूरत में भी छुट्टी मांगने में हिचक होती है। ऐसे में युवक एक किस्म में भावनात्मक अपराधबोध के भाव में पड़ जाते हैं। प्राइवेट नौकरियों में हर जगह परफॉरमेंस का प्रेशर रहता है। ऐसे में यदि सरकार और निजी संस्थान इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, तो न केवल परिवार मजबूत होंगे बल्कि समाज में संवेदनशीलता और आपसी सहयोग की भावना भी बढ़ेगी।

'मां-पिता की सेवा के लिए मुझे लेना पड़ा था VRS'

भारतीय स्टेट बैंक फतेहपुर ब्रांच में डिप्टी मैनेजर रहे एम. के. श्रीवास्तव ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि उन्हें अपने पैरेंट्स की सेवा के लिए नौकरी से वीआरएस लेना पड़ा था। उन्होंने कहा कि बुढ़ापे में आश्रित (माता-पिता) की देखभाल के लिए पैरेंटल केयर लीव कार्यरत कर्मचारियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। अगर नौकरी करने वाले पुत्र या पुत्रियों को अपने मां-पिता की सेवा के लिए छुट्टी नहीं मिलती है तो उसका बोझ घर की महिलाओं और बच्चों पर पड़ने लगता है। घर की स्त्रियों को अन्य दायित्वों के साथ एक और बड़े दायित्व को निभाना मजबूरी बन जाती है, जबकि बच्चों की पढ़ाई पीछे छूटने लगती है। यही वजह है कि माता-पिता की वृद्धावस्था में सेवा के लिए पैरेंटल केयर लीव अत्यंत आवश्यक है।

'पेरेंटल केयर लीव की आवश्यकता को स्वीकार करने का वक्त आ गया'

एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के डिजिटल हेड ​प्रियेश राज ने पत्रिका से बताया, 'ईश्वर द्वारा मनुष्य को दिया गया सबसे बड़ा आशीर्वाद हमारे माता-पिता हैं। आज की तेज़ रफ्तार कॉर्पोरेट नौकरियों में, जहां पेशेवर जिम्मेदारियां अक्सर व्यक्तिगत जिम्मेदारियों पर हावी हो जाती हैं, अब समय आ गया है कि हम माता-पिता की देखभाल अवकाश (Parental Care Leave) की आवश्यकता को स्वीकार करें।'

उन्होंने कहा कि यह केवल एक और प्रकार की छुट्टी नहीं है, यह उस प्रेम, स्नेह और त्याग का प्रतिदान देने का एक माध्यम है, जो उन्होंने हमें इस दुनिया में लाने और बड़ा करने में किया है। जैसे-जैसे हमारे माता-पिता उम्रदराज़ होते हैं, उन्हें पहले से कहीं अधिक हमारी उपस्थिति, हमारा समय और हमारा सहयोग चाहिए होता है। एक पुत्र या पुत्री के रूप में यह केवल हमारा विकल्प नहीं, बल्कि हमारा कर्तव्य और जिम्मेदारी है कि हम उनके साथ खड़े रहें, ठीक वैसे ही जैसे वे जीवनभर हमारे साथ खड़े रहे। अंततः, माता-पिता ने हमें जीवन दिया, संस्कार दिए और हर कठिनाई में हमारा साथ निभाया। जब उन्हें हमारी जरूरत हो, तब उनके साथ खड़े होना हमारा नैतिक और सामाजिक कर्तव्य है, और पेरेंटल लीव इस कर्तव्य को निभाने का एक महत्वपूर्ण साधन बन सकती है।

'पैरेंटल लीव से कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच बढ़ेगी लॉयल्टी'

वहीं पंजाब नेशनल बैंक में वरिष्ठ प्रबंधक पद पर कार्यरत मनोज चौहान का कहना है कि पैरेंटल लीव एक निवेश है। यह भावनात्मक जुड़ाव और पारिवारिक संरचना को तो मजबूत करता ही है और अगली जेनरेशन को भी मां-पिता की सेवा की सीख देता है। यह आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सबसे ज़्यादा जरूरी हैं। आप अगर बुजुर्ग मां-पिता की सेवा करते हैं तो यह आपके तनाव एव अवसाद के जोखिम को भी कम करता है। और अगर इसे कंपनी के पक्ष से देंखे तो ये कर्मचारियों और नियोक्ता के बीच loyalty एव प्रोडक्टिविटी को बढ़ाने का काम करता है। सरकार और निजी क्षेत्र की कंपनियों को इस बारे में विचार करना चाहिए।

कई देशों में मिलती है पैरेंटल केयर लीव की सुविधा

दुनिया के कई देशों के कर्मचारियों को बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए वेतन सहित छुट्टी दी जाती है। यह सुविधा स्वीडन, जर्मनी, जापान, फ्रांस, ब्रिटेन और कनाडा में है। इन देशों में कराए गए अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि जिन बुज़ुर्गों की देखभाल घर पर होती है, उनका असमय अस्पताल में भर्ती होने की दर घट जाती है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य व्यय कम होता है।

Published on:
16 Feb 2026 04:18 pm
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