
Odisha Deputy CM Interview : महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूह , बाल कल्याण, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को लेकर लगातार नई योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं। राज्य में गरीबी और भुखमरी की पुरानी छवि को पीछे छोड़ते हुए अब विकास का दौर बदल रहा है। उपमुख्यमंत्री व महिला एवं बाल विकास, मिशन शक्ति और पर्यटन मंत्री प्रवती परिदा ने पत्रिका से बातचीत में सरकार की प्राथमिकताओं को बताया है।
उन्होंने राजस्थान के पर्यटन क्षेत्र तारीफ करते हुए कहा, राजस्थान में ओडिशा की तरह ऐतिहासिक धरोहरें हैं, जिनको उन्होंने बेहतर तरीके से संरक्षित किया है। इसी वजह से हर साल लाखों देशी और विदेशी पर्यटकों को राजस्थान आर्कषित करता है, इसी तर्ज पर ओडिशा अब पर्यटकों को अपने यहां आमंत्रित करने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा, वह खुद भी राजस्थान जा चुकी है और उनके अधिकारी भी राजस्थान में जाकर आए हैं। उनके यहां पुरा धरोहरों के साथ ही पांच हजार किलोमीटर से ज्यादा समुद्र और सबसे ज्यादा जंगल है। इनको आपस में जोड़कर अब टूरिज्म के लिए काम कर रहे हैं। इसके लिए राजस्थान की योजना व काम उनके लिए उदाहरण है।
उन्होंने कहा, अब गरीबी और भुखमरी की पुरानी छवि पीछे छूट रही है और राज्य विकास के एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिदा ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि कांग्रेस शासनकाल तक ओडिशा को बदनाम करके रखा गया था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने कालाहांडी-बलंगीर-कोरापुट क्षेत्र की तस्वीर दुनिया को दिखाई है लेकिन अब हम समृद्ध ओडिशा की तस्वीर दुनिया के सामने रख रहे हैं। पुरी के भगवान जगन्नाथ और कोणार्क के सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध इस प्रदेश को पहले पलायन और मानव तस्करी जैसी कुप्रथाओं के जरिए बदनाम किया गया था, लेकिन अब यह राज्य महिला समूहों, भारी-भरकम निवेश और बेहतर कनेक्टिविटी के लिए जाना जा रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपमुख्यमंत्री परिदा ने चेतावनी दी कि यदि राज्य की किसी बेटी को सम्मान के साथ विवाह करके ले जाया जाए तो वह पूरी तरह स्वीकार है। लेकिन यदि शादी के नाम पर उसकी खरीद-फरोख्त की गई, तो उसे पाताल से भी खोज कर लाया जाएगा और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि मानव तस्करी से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य में 37 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स का गठन किया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा, ओडिशा में महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए मिशन शक्ति का स्वयं सहायता समूह नेटवर्क सबसे बड़ा आधार है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में लगभग 6 लाख एसएचजी से करीब 70 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों की महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित न रखकर खेती, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, बांस उत्पाद, पशुपालन और अन्य आय-सर्जन वाले कार्यों से जोड़ा जा रहा है।
इसके साथ ही, बच्चों के लिए 1,889 नए आंगनवाड़ी केंद्रों का वर्चुअल उद्घाटन अप्रैल 2026 में किया गया है, ताकि शुरुआती बाल देखरेख, पोषण और शिक्षा सेवाओं को मजबूत किया जा सके। महिलाओं की आर्थिक स्वायत्तता की दिशा में 'सुभद्रा योजना' एक प्रमुख योजना है। ओडिशा आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक, 21 से 60 वर्ष की पात्र महिलाओं को पांच वर्षों में कुल 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। मार्च 2026 में सरकार ने इस योजना की चौथी किस्त के तहत एक करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 5,000 रुपये की सहायता दी है। इसके अलावा, 'लखपति दीदी' योजना के तहत कई महिलाओं की आय 10 लाख रुपये से ऊपर पहुंच गई है।