Organ Donation India: भारत में अंगदान और प्रत्यारोपण को लेकर सामाजिक स्तर पर जागरूकता बढ़ रही है। देश में अंग दान 2013 में 41 से बढ़कर 2025 में 205 हो गई, वहीं प्रत्यारोपणों की संख्या 2013 में 4,990 से बढ़कर 2025 में लगभग 20,000 हो गई। इस बारे में हर सवाल का जवाब एक्सपर्ट से जानिए।
Organ Donation India : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बीते मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 131वें एपिसोड में अंगदान की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने केरल की एक वर्षीय बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम की कहानी साझा की। आलिन के माता-पिता ने उनके निधन के बाद उनके अंग दान करने का निर्णय लिया। भारत में अंगदान को लेकर सामाजिक जागरूकता भी बढ़ी है। इसकी गवाही देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ें दे रहे हैं। आइए जानते हैं कि भारत में अंगदान, आवंटन और प्रत्यारोप में क्या हुई है प्रगति? अंगदान के बारे में विस्तार से एक्सपर्ट से जानें।
Organ Transplant in India: केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने जानकारी देते हुए कहा कि देश ने अंगदान और प्रत्यारोपण के क्षेत्र में बहुत ही महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन ((National Organ and Tissue Transplant Organization Or NOTTO) ने देश भर में अंगदान, आवंटन और प्रत्यारोपण में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। देश में प्रत्यारोपणों की संख्या 2013 में 5,000 से कम से बढ़कर 2025 में लगभग 20,000 हो गई है, जो उल्लेखनीय रूप से चार गुणा वृद्धि दर्शाती है।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में लगभग 18 फीसदी अंग प्रत्यारोपण मृत दाताओं द्वारा दान किए गए अंगों से संभव हो पा रहे हैं। मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2025 में 1,200 से अधिक परिवार अपने प्रियजनों की मृत्यु के बाद उनके अंगदान के लिए आगे आए और अब प्रत्येक दाता बहुअंग दाता है, जिससे कई लोगों का जीवन बदल रहा है।
दिल्ली की लक्ष्मी देवी ने हृदय प्रत्यारोपण के बाद 14 किलोमीटर की केदारनाथ यात्रा पूरी की। प्रत्यारोपण से पहले उनका हृदय सिर्फ 15 प्रतिशत काम कर रहा था। पश्चिम बंगाल के गौरांग बनर्जी ने फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद 14,000 फीट ऊंचाई पर स्थित नाथुला दर्रे की दो बार यात्रा की। वहीं राजस्थान के सीकर के रामदेव सिंह, जिन्होंने किडनी प्रत्यारोपण कराया और अब खेलकूद में सक्रिय हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में अंगदान के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। इससे न केवल जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल रहा है, बल्कि इन प्रयासों से चिकित्सा अनुसंधान को भी मजबूती मिल रही है।
क्या कहते हैं प्रत्यारोपण के आंकड़ें?
केरल की एक वर्षीय बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम एक सामान्य चंचल स्वभाव की बच्ची थी। आलिन की जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी, लेकिन अचानक आई एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति के कारण उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। डॉक्टरों के अथक प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका और चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया। माता-पिता अरुण अब्राहम और शेरिन के लिए यह पल तोड़ देने वाला था। हालांकि, ऐसे पल में उन्होंने एक ऐसा निर्णय लिया, जिसने कई जिंदगियों में उम्मीद की रोशनी जगा दी। उन्होंने आलिन के अंग दान करने की सहमति दे दी, ताकि अन्य जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।
चिकित्सकीय टीम ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर उसके उपयोगी अंगों को प्रत्यारोपण के लिए सुरक्षित किया। केरल की नन्हीं आलिन शेरिन अब्राहम की किडनी, लिवर और हार्ट वॉल्व आदि का उपयोग विभिन्न मरीजों का जीवन बचाने के लिए किया गया। आलिन के चलते पांच गंभीर रूप से बीमार लोगों को नई जिंदगी मिली और वह देश की सबसे कम उम्र की अंगदाताओं में शामिल हो गई।
NOTTO के अनुसार, वर्ष 2023 में 1,028 मृतक (कैडावर) दानकर्ता दर्ज किए गए, जबकि 2022 में यह संख्या 941 थी। वर्ष 2024 में लगभग 1,188 मृतक दानदाता और 2025 लगभग 1,205 मृतक दानदाता थे। तेलंगाना वर्ष 2023 में डेड बॉडी के दान में 200 दान के साथ शीर्ष पर रहा। इसके बाद कर्नाटक (178), तमिलनाडु (176), महाराष्ट्र (149) और गुजरात (146) का स्थान रहा। मुंबई में भी पिछले वर्ष 50 कैडावर दान दर्ज किए गए।
राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार, मृतक दानकर्ताओं की संख्या (ब्रेन-डेड donors) वर्ष 2013 में सिर्फ 41 थी। हालांकि इसमें धीरे-धीरे बढ़ोत्तरी हो रही है।
देश में 'अंग दानम् महादानम्' अर्थात अंगदान ही सबसे बड़ा दान का नारा खूब प्रचलित रहा है। यह नारा आधुनिक चिकित्सा जगत और सामाजिक जागरूकता अभियानों में बार-बार दोहराया जाता है। दरअसल, देश के दर्शन में जीवनदान देने की अवधारणा पुरानी है। इसका हिंदू मिथक में भी वर्णन मिलता है। महर्षि दधीचि के हड्डी तक दान कर देने की कथा का अक्सर लोग जिक्र करते हैं।
What is Maharishi Dadhichi Story: पुराणों में वर्णित कहानी के अनुसार, महर्षि दधीचि (Dadhichi) ने अपनी हड्डियां तक देवताओं की रक्षा और धर्म की स्थापना के लिए दान में दी थीं। असुर राजा वृत्रासुर (Vritra) ने देवलोक पर आक्रमण कर देवताओं को पराजित कर दिया था। देवताओं के राजा इंद्र (Indra) सहित सभी देवता भयभीत होकर भगवान विष्णु के पास गए। विष्णु ने उपाय सुझाते हुए कहा कि वृत्रासुर का वध केवल उस वज्र से हो सकता है, जो महर्षि दधीचि की अस्थियों (हड्डियों) से बनाया जाए।
देवताओं ने दधीचि से अपनी हड्डियां दान में देने का निवेदन किया। यह जानते हुए कि इससे उनकी मृत्यु हो जाएगी, उन्होंने बिना हिचक सहमति दे दी। उनका मानना था कि यदि उनके शरीर का त्याग समाज और धर्म की रक्षा के लिए हो रहा है, तो इससे बड़ा कोई पुण्य नहीं। महर्षि दधीचि ने योगबल से अपने प्राण त्याग दिए। उनकी अस्थियों से वज्र बनाया गया। इंद्र ने उसी वज्र से वृत्रासुर का वध किया और देवताओं को पुनः स्वर्ग प्राप्त हुआ।
शिशु रोग विशेषज्ञ एवं पारिवारिक फिजिशियन डॉ. चंद्रशेखर झा से पत्रिका ने अंगदान के बारे में विस्तार बातचीत की और हरेक पहलुओं के बारे में जानकारी हासिल की। उन्होंने कहा कि अंग दान (Organ Donation) को "महादान" कहा जाता है क्योंकि एक इंसान की मृत्यु के बाद उसके अंग कई लोगों को नई जिंदगी दे सकते हैं। अंग दान (कॉर्निया, हृदय, किडनी, लीवर आदि) के बाद अंग प्रत्यारोपण से न सिर्फ जीवन बचता है, बल्कि जीने की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। एक अकेला अंगदाता (Organ Donor) औसतन 8 लोगों की जान बचा सकता है और 50 से अधिक लोगों के जीवन में सुधार ला सकता है।
इस सवाल के जवाब में डॉक्टर ने कहा कि अंग दान के लिए उम्र या जेंडर की कोई सख्ती या सीमा नहीं है। इसे मोटे तौर पर दो श्रेणियों में बांटा गया है।
हां, यहां अत्यंत ध्यान देने वाली बात है कि कैंसर, HIV, या सक्रिय गंभीर इन्फेक्शन (जैसे सेप्सिस) वाले व्यक्ति आमतौर पर अंग दान नहीं कर सकते।
वह पत्रिका से बताते हैं कि किसी का अंग किसी दूसरे को देने से पहले "मैचिंग" (Matching) की एक जटिल प्रक्रिया होती है ताकि मरीज का शरीर उस अंग को स्वीकार कर सके (Rejection न हो)। आइए जानते हैं उसकी मुख्य शर्तें क्या हैं?
भारत में NOTTO (National Organ and Tissue Transplant Organization) अंगदान की प्रक्रिया को रेगुलेट करती है। ब्रेन डेथ (Brain Death) और सामान्य मृत्यु (Natural Death) में अंग दान की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाती है, क्योंकि अंगों की "सेहत" और उन्हें निकालने का "समय" दोनों स्थितियों में अलग-अलग होता है।
ब्रेन डेथ (Brain Death): ब्रेन डेथ अक्सर सिर की गंभीर चोट या ब्रेन हेमरेज के कारण होती है। इसमें दिमाग पूरी तरह काम करना बंद कर देता है, लेकिन शरीर के अंग (जैसे दिल, किडनी) वेंटिलेटर की मदद से काम कर रहे होते हैं। वेंटिलेटर पर शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता रहता है, इसलिए अंग "ताज़ा" और स्वस्थ रहते हैं।
क्या-क्या दान कर सकते हैं? : दिल, फेफड़े, लिवर, दोनों किडनी, अग्न्याशय (Pancreas) और सभी टिश्यू।
यह तब होता है जब दिल धड़कना बंद कर देता है और सांसें रूक जाती हैं। यह अस्पताल, घर या कहीं भी हो सकता है।
अंगों की स्थिति: दिल का धड़कना जैसे ही बंद होता है, वैसे ही अंगों को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है और अंग कुछ ही मिनटों में खराब होने लगते हैं। इसलिए इसमें मुख्य अंग (Heart, Liver, Kidney) दान नहीं किए जा सकते।
1. समय सीमा: मृत्यु के 4 से 6 घंटे के भीतर दान की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। मृतक के परिवार को मृत्यु की सूचना अपने नजदीकी आई बैंक (Eye Bank) या टिश्यू बैंक को फोन करके देनी होती है। डॉक्टर की टीम घर या अस्पताल आकर केवल टिश्यू (जैसे कॉर्निया) निकालती है। इसमें शरीर की बनावट खराब नहीं होती।