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पद्मश्री के बाद पहली बार रायपुर पहुंचीं बुधरी ताती, पत्रिका से बोलीं- शिक्षा और संस्कृति बचाए बिना समाज आगे नहीं बढ़ेगा

Budhri Tati social worker Bastar: दंतेवाड़ा के छोटे से गांव हीरानार से निकलकर पद्मश्री तक का सफर तय करने वाली डॉ. बुधरी ताती की कहानी बस्तर के सामाजिक बदलाव की मिसाल है।
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Jun 28, 2026
Padma Shri Budhri Tati
पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Padma Shri Budhri Tati: रायपुर@ताबीर हुसैन। पद्मश्री सम्मान मिलने के बाद पहली बार रायपुर पहुंचीं समाजसेवी बुधरी ताती का शनिवार को डीडीयू नगर स्थित वनवासी विकास समिति के शहीद वीर नारायण सिंह सभागृह में नागरिक सम्मान किया गया। पत्रिका से बातचीत में उन्होंने कहा कि पद्मश्री सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे जनजातीय समाज के संघर्ष, सेवा और समर्पण का सम्मान है। यह सम्मान उन्हें समाज के लिए और अधिक जिम्मेदारी के साथ काम करने की प्रेरणा देता रहेगा।

उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज की परंपराएं, संस्कृति और जीवन पद्धति हमारी सबसे बड़ी धरोहर हैं। आधुनिकता के दौर में इन्हें बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। समाज तभी आगे बढ़ेगा, जब शिक्षा, संस्कार और अपनी सांस्कृतिक पहचान साथ-साथ आगे बढ़े।

संघर्ष से कभी कमजोर नहीं पड़ा संकल्प

अपने संघर्षपूर्ण जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि समाज सेवा का रास्ता आसान नहीं होता, लेकिन यदि नीयत साफ हो तो हर चुनौती पार की जा सकती है। मैंने बेहद कठिन परिस्थितियों में काम शुरू किया। कई बार गांवों तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ा, भोजन और पानी तक की परेशानी झेलनी पड़ी, लेकिन समाज के बीच रहकर काम करने का संकल्प कभी कमजोर नहीं पड़ा। जनजातीय समाज की बेटियों को शिक्षा से जोड़ना और उन्हें आगे बढ़ाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

समाज के लिए आगे आएं युवा

बुधरी ताती ने कहा कि समाज सेवा में कई तरह की चुनौतियां आती हैं। कई बार लोगों की शंकाओं और विरोध का भी सामना करना पड़ता है, लेकिन धैर्य, संवाद और सेवा की भावना से विश्वास जीता जा सकता है। उन्होंने युवाओं से समाज के लिए आगे आने और गांवों से जुडक़र काम करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री से पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से शनिवार की शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज के उत्थान, लोक संस्कृति के संरक्षण तथा महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में डॉ. ताती के दीर्घकालीन एवं उल्लेखनीय योगदान की सराहना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा,पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती ने अपना संपूर्ण जीवन जनजातीय समाज की सेवा, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के कार्यों के लिए समर्पित किया है। उनका सेवा भाव, समर्पण और सामाजिक योगदान पूरे समाज के लिए प्रेरणादायी है।

पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती का अभिनंदन

दंतेवाड़ा की प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता और हाल ही 'पद्मश्री' से विभूषित डॉ. बुधरी ताती का शनिवार को भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने अभिनंदन किया। उन्होंने कहा, डॉ. बुधरी ताती का जीवन और उनका चार दशकों का सेवा भाव सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण और सुदूर क्षेत्रों में जाकर शिक्षा की अलख जगाना, स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाना और महिलाओं को आत्मनिर्भर करना कोई साधारण कार्य नहीं है। उनके इस योगदान से छत्तीसगढ़ का गौरव पूरे देश में बढ़ा है।

मुलाकात के दौरान डॉ. बुधरी ताती ने भी अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया। बता दें कि डॉ. बुधरी ताती ने नक्सल प्रभावित और बेहद दूरदराज के आदिवासी क्षेत्रों में पिछले चार दशकों से शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में अपूर्व और उत्कृष्ट कार्य किया है, जिसके लिए भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मश्री' सम्मान से नवाजा है। वह पैदल चलकर 545 गांवों में गईं और महिला सशक्तीकरण के कार्य किए।

Updated on:
28 Jun 2026 06:23 pm
Published on:
28 Jun 2026 06:21 pm