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Afghanistan Pakistan Conflict : 77 वर्षों से तनाव में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा: दोनों के बीच आखिर किस बात का है झगड़ा?

Pakistan Attacked Afghanistan: पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है। दोनों देशों के बीच सीमा संघर्ष कोई नई बात नहीं है। दोनों के बीच आखिर क्यों बार-बार युद्ध या संघर्ष जैसी नौबत आ जाती है, आइए जानते हैं।

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Feb 27, 2026
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने अफगानिस्तान के खिलाफ खुली जंग का ऐलान कर दिया है।

Afghanistan Pakistan Conflict : पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने अफगानिस्तान के साथ खुली जंग का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के भीतरी इलाके में हवाई हमले किए और इसके जवाब में अफगान बलों ने विवादित ड्यूरंड लाइन (Durand Line) के पास जवाबी कार्रवाई की। आइए जानते हैं कि दोनों देशों के बीच किस बात को लेकर वर्षों से झगड़ा चल रहा है।

Pakistan-Afghanistan Conflict History: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा: “हमारा सब्र अपनी हद तक पहुंच चुका है। अब हमारे और तुम्हारे बीच खुला युद्ध है।” वहीं पाकिस्तान की सेना ने बयान जारी करते हुए कहा कि उसने “ग़ज़ब लिल हक़” (Ghazab Lil Haq) नामक अभियान शुरू किया है, जो सीमा पार से हुई बिना उकसावे की गोलीबारी के जवाब में है। वहीं अफगानिस्तान ने कहा कि उसकी सेनाओं ने ड्यूरंड रेखा के पास पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ “बड़े पैमाने पर आक्रामक अभियान” चलाया है।

Durand Line Conflict : क्या है विवाद और इतिहास?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच वर्षों से सीमा को लेकर तनाव के हालात बने हुए हैं। विवाद की जड़ें ऐतिहासिक, राजनीतिक, सुरक्षा और सामाजिक कारणों में गहराई से जुड़ी हुई हैं। दोनों देशों के संबंध कभी पूरी तरह स्थिर नहीं रहे। इनके बीच तनाव का सबसे बड़ा कारण सीमा विवाद, आतंकवाद और आपसी अविश्वास है। सबसे प्रमुख मुद्दा ड्यूरंड लाइन (Durand Line) है।

क्यों ड्यूरंड लाइन को सीमा मानने केा तैयार नहीं अफगानिस्तान?

वर्ष 1893 में ब्रिटिश भारत और अफगान अमीर के बीच ड्यूरंड रेखा तय की गई थी। पाकिस्तान तो इस रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान ने कभी भी इसे खुले मन से स्वीकार नहीं किया। अफगानिस्तान इसके पीछे यह तर्क देता है कि यह सीमा रेखा समझौता ब्रिटिश सरकार के दबाव में हुआ था और इसके कारण पश्तून आबादी दो हिस्सों में बंट गई। ड्यूरंड लाइन दोनों देशों के बीच आज भी लगभग 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा के रूप में मौजूद है और यहां अक्सर गोलीबारी और झड़पें होती रहती हैं।

दोनों देशों के बीच आतंकवाद और उग्रवाद भी बड़ी वजह

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवाद का एक बड़ा कारण आतंकवाद और उग्रवाद है। पाकिस्तान लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि अफगानिस्तान ड्यूरंड लाइन के पास अपनी जमीन का इस्तेमाल पाकिस्तान-विरोधी आतंकवादी संगठन द्वारा किया जाता है। यह बताया जाता है कि इस इलाके में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) काफी सक्रिय है। पाकिस्तान का कहना है कि TTP के लड़ाके अफगानिस्तान में छिपकर पाकिस्तान में हमले करते हैं। दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती है और कहती है कि वह किसी भी देश के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगी। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर अविश्वास बना हुआ है।

तालिबान सरकार के साथ पाकिस्तान के बिगड़ते गए समीकरण

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव का तीसरा कारण तालिबान और राजनीतिक अस्थिरता है। वर्ष 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद शुरू में पाकिस्तान ने इसका स्वागत किया था, लेकिन समय के साथ संबंध बिगड़ते गए। सीमा पर बाड़ लगाने, चौकियां बनाने और सैन्य कार्रवाई को लेकर कई बार दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ चुके हैं। अफगास्तिान की तालिबानी सरकार ड्यूरंड रेखा पर पाकिस्तान द्वारा बनाई जा रही बाड़ का विरोध करता है।

वर्ष 2023 के बाद दोनों देशों के बीच इस वजह से बढ़ा झगड़ा

दोनों देशों के बीच लड़ाई की चौथी वजह अफगान शरणार्थीं हैंं पाकिस्तान में दशकों से लाखों अफगान शरणार्थी रह रहे हैं, जो सोवियत-अफगान युद्ध और बाद के संघर्षों के कारण वहां आए थे। हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने अवैध शरणार्थियों को वापस भेजने का अभियान चलाया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। पाकिस्तान ने 2025 में ही लगभग 11,55,221 अफगान नागरिकों को उनके वतन वापस भेज दिया। अफगानिस्तान इसे मानवीय संकट के रूप में देखता है, जबकि पाकिस्तान इसे अपनी आंतरिक सुरक्षा और आर्थिक बोझ से जोड़ता है। इसके अलावा हरिपुर ज़िले से लगभग 57,366 अफगान शरणार्थी स्वेच्छा से अफगानिस्तान लौट चुके हैं। वर्ष 2023 में जब पाकिस्तान ने अवैध प्रवासियों को हटाने का अभियान शुरू किया था। एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 850,000 अफगान नागरिक सितंबर 2023 के बाद से वापस लौटे।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच व्यापार और सीमा पार आवाजाही भी विवाद का विषय रही है। कई बार सीमा बंद होने से दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ा है। तस्करी और अवैध गतिविधियों को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं। संक्षेप में अगर कहना हो तो यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं है। यह ऐतिहासिक सीमा विवाद, आतंकवाद, राजनीतिक मतभेद, शरणार्थी संकट और आपसी अविश्वास का मिश्रण है। जब तक ड्यूरंड रेखा और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब तक दोनों देशों के संबंधों में तनाव बने रहने की संभावना है। आइए यह भी जानते हैं कि दोनों देशों के बीच कब-कब बड़े झगड़े हुए।

पाकिस्तान और अफगानिस्तान संघर्ष: 1949 में पहली बड़ी सीमा झड़प

अफगानिस्तान ने ड्यूरंड लाइन को मान्यता देने से इनकार किया, जिसके बाद सीमा पर गोलीबारी हुई और दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया।

  • अफगान सैनिकों ने 1960–61 में पाकिस्तानी इलाके में की घुसपैठ
  • अफगान सैनिकों ने पाकिस्तान के बाजौर इलाके में घुसपैठ की। दोनों देशों की सेनाओं के बीच काफी जोरशोर से लड़ाई हुई।
  • 1961 में दोनों देशों ने कुछ समय के लिए राजनयिक संबंध भी तोड़ दिए।
  • वर्ष 2007 के बाद TTP को लेकर सीमा पर लगातार झड़पें होती रहीं।
  • आतंकवाद और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा। कई बार तोप से गोले दागे और गोलीबारी हुई।
  • 2011 में अमेरिकी उपस्थिति में अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा पर गोलाबारी की घटनाएं हुईं।
  • वर्ष 2022–2024 के बीच लगातार हवाई हमले और भारी झड़पें जारी रहीं।
  • पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की सीमा के अंदर TTP ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसके जवाब में सीमा पर भारी गोलीबारी हुई। इसमें कई सैनिक और नागरिक हताहत हुए।
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