Pet Travel Trend: ट्रेन यात्रा अब सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें उनके पालतू डॉग्स भी बराबर के सहभागी बनते जा रहे हैं। बदलती जीवनशैली और पालतू जानवरों के प्रति बढ़ते भावनात्मक जुड़ाव के चलते लोग अब अपने डॉग्स को परिवार के सदस्य की तरह हर जगह साथ लेकर जाना पसंद कर रहे हैं।
रायपुर@हिमांशु शर्मा। Pet Travel Trend: ट्रेन यात्रा अब सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसमें उनके पालतू डॉग्स भी बराबर के सहभागी बनते जा रहे हैं। बदलती जीवनशैली और पालतू जानवरों के प्रति बढ़ते भावनात्मक जुड़ाव के चलते लोग अब अपने डॉग्स को परिवार के सदस्य की तरह हर जगह साथ लेकर जाना पसंद कर रहे हैं। विशेषकर होली, दिवाली और नववर्ष जैसे त्योहारों के दौरान यह ट्रेंड और ज्यादा देखने को मिल रहा है।
रायपुर मंडल से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष त्योहारों के सीजन में कुल 462 डॉग्स ने ट्रेन में सफर किया। इनमें देसी और विदेशी दोनों नस्लों के डॉग्स शामिल रहे। हावड़ा-मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों में भी लोग अपने डॉग्स को साथ ले जाने से पीछे नहीं हट रहे।
रायपुर से इतने डॉग्स हुए बुक-
ट्रेन में डॉग्स को साथ लेकर जाने के लिए उसका पार्सल कार्यालय के जरिए लगैज टिकट बनाया जाता है। पार्सल में लगैज की रेट सबसे टॉप में होती है। यात्री जिस डॉग्स को साथ में लेकर जाना चाहता है, उसका फिटनेस सर्टिफिकेट, वैक्सीनेशन का सर्टिफिकेट जरूरी होता है। यदि साथ में लेकर जाना चाहते हैं तो उसके लिए कूपे (दो सीट वाला) फर्स्ट एसी में बुक करना होता है। इसके लिए वेटनरी डॉक्टर का ही सर्टिफिकेट मान्य होता है। सेकेंड और थर्ड एसी में यात्री अगर सफर कर रहा है तो, उसको डॉग्स ले जाने के लिए डॉग बॉक्स के लिए आवेदन देना होता है। गार्ड के पास यह डॉग बॉक्स की सुविधा होती है।
एसी चेयर कार, स्लीपर क्लास और बाकी दूसरी श्रेणी के डिब्बों में कुत्तों का प्रवेश पूरी तरह से बैन है। इन डिब्बों में कई यात्री होते हैं और पालतू जानवर दूसरों को परेशान कर सकते हैं। इतना ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। यही वजह है कि भारतीय रेलवे साझा डिब्बों में पालतू जानवरों को खुले में ले जाने की अनुमति नहीं देता।