
Teledensity : आपके मोबाइल में नेटवर्क है, इंटरनेट चल रहा है और ऑनलाइन भुगतान भी हो रहा है, लेकिन क्या राजस्थान में सभी लोगों तक दूरसंचार की पहुंच हो गई है? भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के आंकड़े इस सवाल पर चौंका रहे हैं। राजस्थान में मोबाइल कनेक्शन की संख्या भले ही 6.92 करोड़ के पार हो गई है, लेकिन टेलीडेंसिटी राष्ट्रीय औसत से 9.58 प्रतिशत पीछे है।
राजस्थान की डिजिटल तस्वीर को समझने के लिए सबसे पहले टेलीडेंसिटी के आंकड़ों पर नजर डालना जरूरी है। ट्राई के अनुसार अगस्त तक राजस्थान की टेलीडेंसिटी 85.49 प्रतिशत रही। इसके मुकाबले देश का औसत 95.07 प्रतिशत था। दोनों के बीच 9.58 प्रतिशत अंक का अंतर है। यह अंतर लोगों तक टेलीकॉम पहुंच की नई तस्वीर दिखा रहा है। टेलीडेंसिटी यानि हर सौ लोगों पर कितने मोबाइल कनेक्शन हैं।
एक्सपर्टस के मुताबिक राजस्थान में डिजिटल कनेक्टिविटी का आधार मजबूत है, लेकिन राष्ट्रीय औसत और अग्रणी राज्यों तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है। प्रदेश के लिए अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि मोबाइल और इंटरनेट का विस्तार केवल कनेक्शन के आंकड़ों में नहीं, बल्कि गांवों और शहरों में लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई दे।
टेलीडेंसिटी के आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली तस्वीर दिल्ली की है। यहां यह दर 371.29 प्रतिशत रही, जबकि बिहार सेवा क्षेत्र 64.34 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे रहा। राजस्थान की टेलीडेंसिटी 85.49 प्रतिशत है, जो हरियाणा के 91.75 प्रतिशत से 6.26 प्रतिशत अंक कम है। गुजरात में यह 101.57 प्रतिशत और पंजाब में 118.79 प्रतिशत दर्ज की गई। केरल में 124.06 प्रतिशत, हिमाचल प्रदेश में 129.01 प्रतिशत और कर्नाटक में 133.57 प्रतिशत रही। हालांकि, राजस्थान कुछ बड़े राज्यों से आगे भी है। उत्तरप्रदेश में 72.31 प्रतिशत और मध्यप्रदेश में 74.86 प्रतिशत रही। असम में यह 83.52 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 84.17 प्रतिशत दर्ज की गई।
रिलायंस जियो- 2.86 करोड़
एयरटेल- 2.64 करोड़
वोडाफोन-आइडिया- 81.55 लाख
बीएसएनएल- 59.66 लाख
राज्य-सालाना वृद्धि दर
दिल्ली- 33.41%
कर्नाटक- 24.12%
महाराष्ट्र- 13.99%
बिहार- 12.52%
गुजरात- 10.85%
मध्यप्रदेश- 7.21%
राजस्थान- 6.10%
तमिलनाडु- 5.74%
केरल- 3.31%
पश्चिम बंगाल- 2.28%
(राजस्थान की वृद्धि दर राष्ट्रीय औसत 10.81 प्रतिशत से 4.71 प्रतिशत अंक कम रही। यानि देश की औसत रफ्तार के मुकाबले धीमी बढ़ोतरी है)
ये परेशानी आज भी कायम
-नेटवर्क समस्या, कॉल ड्राप होने का सिलसिला बढ़ा।
-दावे के अनुसार डेटा स्पीड नहीं मिल रही। इसमें एक इलाके में संसाधन के अनुपात में ज्यादा उपभोक्ता होना भी एक कारण है।
-मोबाइल ऑपरेटरों का इन्फ्रास्ट्रक्चर बहुत ज्यादा अपग्रेड नहीं, लेकिन उपभोक्ता संख्या और डेटा उपयोग जरूर तेजी से बढ़ा है।
हालात और जरूरत
एक्सपर्ट के मुताबिक प्रदेश में टेलीफोन कनेक्शन का आधार बड़ा है और एक साल में करीब 40.3 लाख कनेक्शन बढ़े हैं। दूसरी और कुल टेलीडेंसिटी और इंटरनेट सब्सक्राइबर घनत्व राष्ट्रीय औसत से नीचे हैं। तीसरा, ग्रामीण क्षेत्रों में टेलीफोन कनेक्शनों की हिस्सेदारी मजबूत होने के बावजूद ग्रामीण इंटरनेट सब्सक्राइबर घनत्व शहरी क्षेत्रों की तुलना में काफी कम है। इसलिए राजस्थान में डिजिटल विकास का अगला चरण केवल नए मोबाइल कनेक्शन जोड़ने तक सीमित नहीं रह सकता। गांवों में इंटरनेट की उपलब्धता, नेटवर्क की गुणवत्ता, ब्रॉडबैंड विकल्पों का विस्तार और डिजिटल सेवाओं का वास्तविक उपयोग भी महत्वपूर्ण होंगे।राजस्थान जैसे बड़े भौगोलिक क्षेत्र वाले प्रदेश में दूर-दराज की बस्तियों तक कनेक्टिविटी पहुंचाना अलग तरह की चुनौती है।
देश में मोबाइल डेटा की खपत तेजी से बढ़ रही है, लेकिन प्रति जीबी डेटा से औसत राजस्व घट रहा है। कोरोना से पहले राजस्थान में मोबाइल डेटा की खपत प्रति उपभोक्ता 5 जीबी थी। कोरोना के दौरान 10 जीबी डेटा तक पहुंचा। अब यह 23 जीबी प्रति उपभोक्ता पहुंच गया है।
देश में दूरसंचार सेवाओं का बाजार भी लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2025-26 में टेलीकॉम सेक्टर का सकल राजस्व 4,04,067 करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के 3,72,097 करोड़ रुपए से 8.59 प्रतिशत अधिक है। राजस्थान के टेलीकॉम बाजार में निवेश, नेटवर्क विस्तार और डिजिटल सेवाओं की मांग बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
राजस्थान की दूरसंचार तस्वीर का सबसे अहम पहलू ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अंतर है। प्रदेश में कुल 7.01 करोड़ टेलीफोन कनेक्शनों (वायरलैस व वायरलाइन) में 3.60 करोड़ ग्रामीण और 3.41 करोड़ शहरी कनेक्शन हैं। इस तरह कुल कनेक्शनों में ग्रामीण हिस्सेदारी 51.38 प्रतिशत है, जबकि देश में ग्रामीण हिस्सेदारी 41.47 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्शनों की संख्या अधिक होने के बावजूद आबादी के अनुपात में पहुंच का स्तर कम है। इसका मतलब प्रदेश में ग्रामीण डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है। प्रदेश के दूरस्थ गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, ऑनलाइन सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान और कृषि संबंधी जानकारी के लिए इंटरनेट का तेजी से विस्तार बेहद जरूरी है।