15 अक्टूबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Garba : उदयपुर में 49 वर्षों से चली आ रही अनोखी परंपरा, सिर्फ ढोलक की थाप पर होता है गरबा

Garba : न डीजे का शोर, न आधुनिक संगीत की चकाचौंध- यहां आज भी माताजी की भक्ति, पारंपरिक गीतों और गुजराती संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिलती है। वर्ष 1978 में युवाओं ने जिस परंपरा की नींव रखी थी, वह आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ आगे बढ़ रही है। अगले वर्ष इसकी स्वर्ण जयंती मनाई जाएगी। इस बारे में पढ़िए राजीव जैन की खास रिपोर्ट।
3 min read
Google source verification

भारत

•

image

Swatantra Mishra

•

image

राजीव जैन

•

Oct 15, 2026

Garba on Dholak Beats

सहस्त्र औदिच्य समाज की ओर से 49 साल पुरानी परंपरा जारी है। (Photo: Patrika, Designed: ChatGpt)

Garba : जहां आज गरबा बड़े आयोजनों, डीजे और आधुनिक संगीत की धुनों के बीच खेला जाता है, वहीं सहस्त्र औदिच्य समाज का गरबा आज भी धर्म, आस्था और परंपरा की विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। ढोलक की थाप, सामूहिक भक्ति गीत और गरबा कलश की आराधना के साथ शुरू हुआ सफर 49 वर्षों से समाज की धार्मिक विरासत को सहेज रहा है। वर्ष 1978 में सहस्त्र औदिच्य धर्मशाला में समाज के युवाओं ने जिस परंपरा की शुरुआत की, वह आज भी नवरात्रि में उसी श्रद्धा और उत्साह से आगे बढ़ रही है। अगले साल आयोजन के 50 वर्ष पूरे होने पर समाज स्वर्ण जयंती वर्ष मनाएगा।

image

पूरी खबर पढ़ने के लिए लॉगिन करें।