
भर्तृहरि नाटक का मंचन राजर्षि अभय समाज की ओर से साल 1958 से लगातार किया जा रहा है। (फाइल फोटो -2025)
क्या आपने कभी सुना है कि किसी धार्मिक नाटक का मंचन रात 10 बजे शुरू होता हो और तड़के 5 बजे तक जारी रहता हो और वह भी प्रतिदिन और कई दिनों तक? ऐसे नाटक में काम करने वाले कलाकार एक भी पैसा नहीं लेते हों? दूर-दूर से लोग ऐसे नाटक को टिकट खरीदकर देखने आते हों?
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