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Rapper Balendra Shah: रैप से राजनीति तक: बालेन शाह की सफलता की पूरी कहानी, जानिए ऐसे शख्सियतों को जो रैपर से राजनेता बने

Rapper Balendra Shah Nepal Next PM: नेपाल में 26 मार्च को संसदीय दल के नेता का चयन होना है और 27 को प्रधानमंत्री पद की ताजपोशी। रैपर से राजनेता बने बालेन शाह को इसका सबसे बड़ा दावेदार माना जाता है। बालेन शाह नेपाल के सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। क्या आपको पता है कि उनसे पहले किस देश में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बनाए जा चुके हैं? इसके साथ ही यह भी जानिए कि दुनिया में कौन हैं जो रैपर से राजनेता बने।

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Mar 24, 2026
रैपर बालेन शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री होंगे। (AI Image)

Rapper Balendra Shah Nepal Next PM: रैपर से राजनेता बने बालेन शाह इसी सप्ताह औपचारिक रूप से सिंह दरबार यानी कार्यपालिका के मुख्य सचिवालय में प्रवेश करेंगे। वह देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। वह नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। सिंह दरबार तक पहुंचने की उनकी यह यात्रा रोमांच और रहस्य से भरी रही है और अपने आप में एक किंवदंती बन चुकी है। उन्होंने संगीत की दुनिया से राजनीति का सफर तय कर नेपाल की राजनीति में सबसे सफल बदलाव दिखाया है। आमतौर पर राजनेताओं के बेटे या राजनीति के जरिए ही लोग सत्ता में पहुंचते हैं, लेकिन बालेन शाह का मामला बिल्कुल अलग है। आइए जानते हैं कैसे।

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बालेन की जीत बिल्कुल अलग

बालेन की जीत इतनी बड़ी है कि सभी चकित हैं। यह चुनाव परिणाम नेपाल की परंपरा से बिल्कुल अलग है। नेपाल में हमेशा राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन से ही सरकार बनती रही है। नेपाल के लिए यह एक ऐतिहासिक जनादेश है। आखिरी बार किसी पार्टी को दो-तिहाई बहुमत 1959 के पहले लोकतांत्रिक चुनाव में मिला था। उसके बाद ऐसा कभी भी नहीं हुआ। अब इस धमाकेदार जीत के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के पास संवैधानिक बदलाव तक करने की ताकत आ गई है।

भारत के बेंगलुरु में की पढ़ाई

बालेन ने स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बेंगलुरु के निट्टे मीनाक्षी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से मास्टर्स किया। लेकिन पढ़ाई के दौरान ही वे रैप करते रहे। उनके रैप में भ्रष्टाचार, गरीबी, खराब शहरी ढांचे और असमानता जैसे मुद्दों को उछाला गया। धीरे-धीरे उनकी टोली में युवाओं की फौज इकट्ठी होती चली गई। सामाजिक और राजनीतिक मुद्दे उछालने की वजह से उनकी राजनीतिक छवि तैयार होती चली गई।

भारी मतों के अंतर से जीता था मेयर का चुनाव

बालेन ने 2022 में मेयर का चुनाव लड़ा। हालांकि इस चुनाव में वह किसी पार्टी के उम्मीदवार के बतौर नहीं, बल्कि स्वतंत्र उम्मीदवार की हैसियत से लड़े। इस चुनाव में उन्होंने केशव स्थापित को 23,426 वोटों के अंतर से हराया। बालेन शाह को इस चुनाव में 61,767 वोट और केशव स्थापित को करीब 38,341 वोट मिले। इस चुनाव में उनके खिलाफ पारंपरिक बड़ी पार्टियों के उम्मीदवार भी मैदान में थे।

(Photo: X Account @ShahBalen )

बेहतर प्रशासक बनकर बुजुर्गों का भी दिल जीता

वर्ष 2022 में काठमांडू के मेयर बनने के बाद उन्होंने खुद को एक प्रभावी और कामकाज पर ध्यान देने वाले प्रशासक के रूप में स्थापित किया। नेपाल में जब पारंपरिक पार्टियों के खिलाफ जनता का गुस्सा बढ़ने लगा और बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, तब शाह और उनके समर्थकों ने तर्क दिया कि अगर वे काठमांडू बदल सकते हैं, तो देश भी बदल सकते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनका संदेश बेहद सरल था - “मुझे काम करने का मौका दीजिए” और “मैं काम करके दिखाऊंगा।” इस सहज नारों ने हर पीढ़ी को आकर्षित किया। युवा उनके रैपर वाली और बाहरी छवि से जुड़े, जबकि बुजुर्गों ने उन्हें एक सक्षम प्रशासक के रूप में देखा।

लोगों के दिलों में भरोसा जमाने में सफलता मिली

बालेन राजनीतिक दायरे से बाहर के व्यक्ति थे। मेयर बनने के बाद बालेन ने अपने काम से अपनी छवि एक ईमानदार और सक्षम प्रशासक की बनाई। बालेन ने राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी की स्थापना 2022 में की। यह एक मध्यमार्गी और सुधारवादी दल के रूप में बनी, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ और सुशासन के पक्ष में खड़ा है। यही वजह है कि लोगों का उनपर भरोसा इतना ज्यादा जम गया कि लोगों ने चुनाव में मतदान देते समय मन ही मन कहा कि हमें बालेन के रहते हुए किसी और की जरूरत क्यों है?

(Photo: FB Account Balendra Shah)

नेपाल के सामने कौन-कौन सी बड़ी चुनौतियां

नेपाल को अभी लंबा रास्ता तय करना है। करीब 3 करोड़ की आबादी वाला यह देश दक्षिण एशिया की गरीब अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यहां सीमित उद्योग, उच्च युवा बेरोजगारी और विदेशों से आने वाले पैसे (रेमिटेंस) पर भारी निर्भरता है। विदेशों में रोजगार करने वाले नेपाली हर साल करीब 11 अरब डॉलर रूपये अपने देश भेजते हैं। नेपाल का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड 21.09 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। हालांकि, बालेन और उसकी पार्टी को भारी जीत दिलाने के पीछे लोगों की यह मंशा भी थी कि वह सत्ता में आएं और देश से युवक और युवतियों के लगातार हो रहे पलायन की रफ्तार पर लगाम लगाएं। विदेशों में काम कर रहे युवकों को अपने ही देश में रोजगार मिले। बड़ी संख्या में नेपाली विदेश जाकर काम कर रहे हैं। बाहर रह रहे नेपालियों का देश में काफी वर्चस्व है और उनकी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से बहुत ज्यादा अपेक्षाएं हैं।

(Photo: X Account @BalenShah)

पार्टी के संस्थापक ही भविष्य में बन सकते हैं चुनौती

नई सरकार के सामने अंदरूनी चुनौतियां भी हैं। बालेन शाह और रवि लामिछाने के बीच संबंध भविष्य में जटिल हो सकते हैं, क्योंकि दोनों ही खुद को प्रधानमंत्री पद के लिए दावेदार मानते हैं। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की स्थापना लामिछाने ने की है और वह एक लोकप्रिय लेकिन विवादास्पद नेता के तौर पर जाने जाते हैं। यही वजह है कि दोनों के बीच आपसी तालमेल पर ही सरकार की सफलता निर्भर करेगी।

मधेसियों की होती रही है राजनीति में उपेक्षा

बालेन शाह का सामाजिक पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण है। वे मधेसी समुदाय से आते हैं, जो लंबे समय से राजनीतिक उपेक्षा की शिकायत करता रहा है। ऐसे में उनका राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष पद तक पहुंचना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। बीते चुनाव में एक बड़े उलटफेर में बालेन शाह ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को उनके ही गढ़ में हराया। इस जीत का श्रेय काफी हद तक बालेन शाह को ही जाता है। मधेसियों की अपेक्षाओं पर खरे उतरने का बालेन की प्रमुख चुनौतियों में से एक है।

नेपाल में 26 मार्च को सांसदों शपथ लेंगे और संसदीय दल के नेता चुनेंगे। यह उम्मीद की जा रही है कि बालेन शाह को संसदीय दल का नेता चुना जाएगा। 27 मार्च 2026 को नेपाल में प्रधानमंत्री पद की ताजपोशी होगी और यह तय माना जा रहा है कि देश को अगले पीएम के बतौर बालेन ही शपथ लेंगे। बालेन शाह की इस ऐतिहासिक ​जीत के बाद दो सवाल को लेकर लोगों के मन में बहुत सारी जिज्ञासाएं हैं। एक तो कि क्या वह दुनिया के सबसे कम उम्र के पहले प्रधानमंत्री बनेंगे? दूसरा क्या वह दुनिया के पहले रैपर हैं, जो राजनेता बने?

(Photo: FB Account Balendra Shah)

बालेन से भी कम उम्र की महिला बन चुकी हैं प्रधानमंत्री

बालेन शाह दुनिया के दूसरे ऐसे शख्स हैं जो सबसे कम उम्र में प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। बालेन अभी सिर्फ 35 साल के हैं और यह दुनिया में प्रधानमंत्री बनने वालों की उम्र से कम या असामान्य लग सकता है। हालांकि, बालेन शाह से पहले फिनलैंड की सन्ना मारिन (Sanna Marin) दुनिया की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री बनी थीं। उन्होंने दिसंबर 2019 में जब उन्होंने कार्यभार संभाला, तब उनकी उम्र महज 34 वर्ष थी। वे उस समय न केवल फिनलैंड की, बल्कि दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनीं।

दुनिया में कुछ और भी रैपर हैं, जो राजनीति में हुए सफल

दुनिया में रैप और मनोरंजन से राजनीति के अन्य उदाहरण भी है। बॉबी वाइन युगांडा के एक प्रसिद्ध गायक, रैपर और राजनेता हैं, जिन्हें “पीपुल पॉवर” आंदोलन के नेता के रूप में जाना जाता है। उनका असली नाम रॉबर्ट क्यागुलान्यी सेंटामू है। युगांडा के बॉबी वाइन नेशनल यूनिटी प्लेटफॉर्म नामक राजनीतिक दल का नेतृत्व करते हैं। बॉबी देश की मुसेवेनी सरकार का विरोधी पार्टी के बतौर जानी जाती है।

बॉबी वाइन युगांडा में सत्ता विरोध का मुखर चेहरा

बॉबी ने अपने करियर की शुरुआत एक रेगे और एफ्रोबीट्स कलाकार के रूप में की। उनके गाने ज्यादातर गरीबी, भ्रष्टाचार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर केंद्रित होते हैं। युवा पीढ़ी बॉबी की दिवानी है। बॉबी वाइन ने वर्ष 2021 में राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा। उन्होंने युगांडा के राष्ट्रपति चुनाव में लंबे समय से सत्ता में रहे योवेरी मुसेवेनी को चुनौती दी। चुनाव के दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। बॉबी और उनके समर्थकों पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे और कार्रवाई भी हुई। राष्ट्रपति पद के चुनाव में वह मुसेवेनी को हरा नहीं सके लेकिन वह देश की राजनीति में महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभरे।

शाइन जेल से बाहर आकर बने सक्रिय राजनीति का चेहरा

शाइन भी प्रसिद्ध रैपर से राजनेता बने व्यक्ति हैं। उनका पूरा नाम मोसेस माइकल लेवी बारो है। वह 1990 और 2000 के दशक में एक लोकप्रिय हिप-हॉप रैप कलाकार के बतौर काफी चर्चा में रहते थे। लेवी बारो का 2000 में पहला अल्बम शाइन (Shyne) के नाम से आया और हिट रहा। इसके बाद से उनको लोग शाइन बुलाने लग गए। न्यूयॉर्क में एक नाइटक्लब में गोलीबारी में उनका नाम आया और दोषी ठहराए गए। उन्हें 10 साल की जेल हुई। जेल से जेल से रिहा होने के बाद उन्हें अमेरिका से निर्वासित कर बेलीज भेज दिया गया। वहां उन्होंने राजनीति में कदम रखा और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) से जुड़े। वर्ष 2020 में वे संसद सदस्य चुने गए।इसके बाद वे विपक्ष के नेता चुने गए।

कौन है किलर माइक ?

किलर माइक अमेरिका के एक प्रसिद्ध रैपर, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक टिप्पणीकार के रूप में जाने जाते हैं। उनका असली नाम माइकल सैंटियागो रेंडर है। उन्होंने वर्ष 2000 में अपना राजनीतिक कैरियर शुरू किया। वे खासकर अपने जोशीले और सामाजिक मुद्दों पर आधारित गीतों के लिए जाने जाते हैं। किलर माइक अमेरिका की सक्रिय राजनीतिक आवाज बन चुके हैं। वह अक्सर नस्लीय समानता, पुलिस सुधार, आर्थिक न्याय और शिक्षा के बारे में खुलकर बोलते हैं। वैसे तो उन्होंने आज तक कोई चुनाव नहीं लड़ा लेकिन वह कई राजनीतिक अभियानों को समर्थन दे चुके हैं।

Published on:
24 Mar 2026 04:48 pm
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