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क्या बदलने वाली है भारतीय करेंसी? 165 साल बाद प्लास्टिक नोटों की तैयारी, जानिए क्यों उठाया जा रहा यह बड़ा कदम?

RBI Plastic Notes: भारतीय लोगों की जेब में जल्द ही पॉलीमर या प्लास्टिक नोट नजर आ सकते हैं। RBI ने इस दिशा में तैयारियां तेज कर दी हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक देश में अगले साल से प्लास्टिक नोट शुरू हो सकते हैं। अब सवाल है कि क्या कागज के नोट पूरी तरह बंद हो जाएंगे? पॉलीमर नोट आखिर होते क्या हैं? दुनिया के किन देशों ने इन्हें अपनाया है? भारत में नोटों का रोचक इतिहास भी... पढ़ें एक्सप्लेनर रिपोर्ट।
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Jul 18, 2026
Polymer Notes India
Polymer Notes India: RBI ने शुरू की बड़ी तैयारी, अगले साल तक पॉलीमर या प्लास्टिक नोट्स बाजार में लाने की तैयारी। (AI Generated Creative)

RBI Plastic Notes: आपकी जेब में रखा 10 या 20 रुपये का नोट आने वाले समय में कागज का नहीं, बल्कि पॉलीमर (प्लास्टिक) का हो सकता है। RBI ने देश में पॉलीमर नोटों (Polymer Notes) के संचालन का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है, जिसके लिए बड़ी तैयारी भी सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नोट छापने वाली इकाई BRBNMPL (Bharatiya Reserve Bank Note Mudran Private Limited) ने पॉलीमर बैंक नोटों के लिए विशेष सुरक्षा फीचर वाले सब्सट्रेट की आपूर्ति और निर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए वैश्विक स्तर पर एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) आमंत्रित किया है। इसमें इच्छुक कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। जानकारी के मुताबिक EOI के तहत बोली जमा करने के लिए 18 अगस्त लास्ट डेट तय की गई है।

सोशल मीडिया पर फैली थी अफवाह

लेकिन इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि मौजूदा कागजी नोट बंद हो जाएंगे। RBI ने खुद इस बारे में सफाई दी है, हाल ही में सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैली थी कि 30 जून 2026 से कागजी नोट पूरी तरह बंद हो जाएंगे और प्लास्टिक नोटों से बदल दिए जाएंगे। इस पर PIB Fact Check ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया था। RBI ने कहा था कि 30 जून 2026 तक कागजी नोटों को वापस लेने या उन्हें प्लास्टिक करेंसी नोटों से बदलने की कोई योजना नहीं है।

PIB ने जारी किया था PIB FACT CHECK वीडियो

PIB ने यह भी बताया कि एक वीडियो वायरल हो रहा था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आवाज जैसी डिजिटल रूप से बदली हुई आवाज का इस्तेमाल कर यह झूठा दावा किया गया था। यानी मौजूदा नोट पूरी तरह सुरक्षित और वैध बने रहेंगे। यह सिर्फ भारत की मुद्रा व्यवस्था में एक संभावित तकनीकी बदलाव की दिशा में शुरुआती कदम है। शुरुआती चरण में 10 और 20 के नोटों का पायलट परीक्षण होने की संभावना जताई जा रही है।

भारत आखिर क्यों बदलना चाहता है अपने नोट?

भारतीय नोट कपास-आधारित विशेष कागज से बनते हैं। छोटे मूल्य वर्ग यानी 10-20 रुपए के नोट बहुत तेजी से पुराने, गंदे लगने लगते हैं और फट भी जाते हैं। ऐसे में इन्हें बार-बार बदलना पड़ता है, जिससे छपाई और वितरण की लागत हजारों करोड़ रुपए तक हो जाती है। अब RBI ने तैयारी कर ली है कि भारत में प्लास्टिक नोटों का चलन शुरू किया जाए, ताकि नोटों की उम्र बढ़ाई जा सके, नकली नोटों पर बेहतर नियंत्रण हो सके, नोटों को पानी और गंदगी से अधिक सुरक्षा मिले, उन्नत सुरक्षा फीचर से तैयार इन नोटों के लंबे समय में प्रतिस्थापन से लागत कम होगी।

165 साल का भारतीय नोटों का सफर

भारतीय मुद्रा का इतिहास केवल कागज के टुकड़े का इतिहासभर नहीं है, बल्कि देश की आर्थिक यात्रा का दस्तावेज है। 1861 में ब्रिटिश शासन ने Paper Currency Act लागू किया था और पहली बार कागजी मुद्रा जारी करने का विशेष अधिकार सरकार को मिला।

  • अप्रैल 1935 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की स्थापना हुई।
  • RBI ने पहली बार 1938 में अपने नाम से बैंक नोट जारी किए।
  • 1949 में स्वतंत्रता के बाद RBI का राष्ट्रीयकरण हुआ।
  • 1969–1990 में नई सुरक्षा तकनीकों वाले नोट आने लगे।
  • 1996 में महात्मा गांधी श्रृंखला (Mahatma Gandhi Series) शुरू की गई।
  • 2016 में नोटबंदी के बाद नई महात्मा गांधी (New) Series जारी की गई।
  • 2026 में अब भारत पॉलीमर नोटों की दिशा में तैयारी कर रहा है।

भारत में नोट आखिर बनते कहां हैं?

भारत में कागजी नोट छापने का काम चार प्रमुख प्रेसों में किया जाता है। RBI की इकाई BRBNMPL मैसूर (कर्नाटक), सालबोनी (पश्चिम बंगाल), तथा सरकार की SPMCIL नासिक (महाराष्ट्र), देवास (मध्य प्रदेश) में। इन प्रेसों में अत्याधुनिक मशीनों से नोट छापे जाते हैं। सुरक्षा धागा, वॉटरमार्क, माइक्रो प्रिंटिंग, इंटैग्लियो प्रिंटिंग और अन्य सुरक्षा फीचर जोड़े जाते हैं, ताकि नकली नोट बनाना किसी के लिए भी आसान न हो।

क्या भारत के नोट साधारण कागज के बने होते हैं?

इसका जवाब है नहीं। बहुत से लोग मानते हैं कि भारतीय नोट सामान्य कागज से बने होते हैं, जबकि वास्तव में वे विशेष कॉटन-आधारित बैंक नोट पेपर से तैयार किए जाते हैं। इसमें कपास के रेशों के साथ विशेष सुरक्षा तत्व शामिल होते हैं, जिससे यह सामान्य कागज से अधिक मजबूत और टिकाऊ बनता है। यही कारण है कि नोट आसानी से नहीं फटते और इनमें वॉटरमार्क के साथ ही सुरक्षा धागे जैसी विशेषताएं जोड़ी जा सकती हैं।

जब UPI दुनिया में मिसाल तो क्यों पड़ रही नए नोटों की जरूरत

भारत में UPI से लेन-देन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। जो संकेत है कि भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है। लेकिन RBI लगातार कहता है कि मुद्रा अभी भी बढ़ रही है। ग्रामीण भारत, छोटे व्यापार, बिजली, इंटरनेट की कमी, आपदा की स्थिति और डिजिटल विभाजन ऐसे बड़े कारण हैं कि, नकदी आज भी लोगों के दैनिक जीवन हिस्सा बनी हुई है। बता दें कि भारत में चलन में मौजूद बैंक नोटों का कुल मूल्य मार्च 2026 तक लगभग 41.23 लाख करोड़ रुपए था। मूल्य के हिसाब से सबसे अधिक हिस्सेदारी 500 के नोटों की है। डिजिटल भुगतान बढ़ने के बावजूद देशभर में नकदी की मांग भी लगातार बढ़ी है। यही कारण है कि पॉलीमर नोट लाने की तैयारी की जा रही है। वहीं कागज के नोटों से होने वाला वित्तीय घाटा भी इसकी वजह है।

इसे ऐसे समझें

छपाई की लागत

2023-24 में नोटों की छपाई पर कुल 5,101.4 करोड़ की लागत आई थी। यह नोटबंदी वाले साल को छोड़कर पिछले दो दशकों में सबसे ज्यादा थी। इसके बाद 2024-25 में यह लागत और बढ़कर 6,372.8 करोड़ हो गई, यानी एक साल में करीब 25% की वृद्धि दर्ज की गई थी।

कितने नोट छापे गए

2021-22 में 2,225 करोड़ नोटों से बढ़ाकर 2023-24 में कुल इंडेंट और सप्लाई 2,430 करोड़ नोट हो गई। इसी दौरान 500 रुपए के नोटों का इंडेंट 1,280 करोड़ से घटकर 900 करोड़ रह गया।

कितने नोट नष्ट करने पड़े

2023-24 में 2,12,493 लाख यानी करीब 2,124.93 करोड़ यानी 21.24 अरब, खराब नोट नष्ट किए गए, जबकि 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,385.63 करोड़ यानी 23.8 अरब हो गया।

आखिर क्या है पॉलीमर नोट?

अगर आप यह सोचते हैं कि पॉलीमर नोट एक सामान्य प्लास्टिक से बना नोट है, तो आप गलत हैं। यह सामान्य प्लास्टिक से नहीं, बल्कि विशेष Biaxially Oriented Polypropylene (BOPP) नामक पॉलीमर फिल्म से तैयार होगा। इसमें विशेष कोटिंग होती है, जिससे प्रिंटिंग संभव हो पाती है। साथ ही इसमें पारदर्शी विंडो, उन्नत सुरक्षा फीचर और विशेष प्रकार की स्याही का इस्तेमाल किया जाएगा।

दुनिया में कहां-कहां है पॉलीमर नोटों का ट्रेंड

दुनिया भर में करीब 30 से ज्यादा देश ऐसे हैं जहां या तो प्लास्टिक नोट पूरी तरह चलन में हैं, या फिर छोटे मूल्य वर्ग के कुछ नोटों के रूप में बाजार में इनका इस्तेमाल हो रहा है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा, यूके, सिंगापुर, ब्रुनेई, रोमानिया, वियतनाम और मेक्सिको जैसे देश शामिल हैं।

पॉलीमर नोट के फायदे

ये कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा टिकाऊ हैं, पानी से जल्दी खराब नहीं होते, गंदे कम होते हैं, इनका नकली नोट बनाना मुश्किल होता है, और लंबे समय तक चलने के कारण बार-बार छपाई की जरूरत नहीं पड़ती।

इनके नुकसान भी कम नहीं

शुरुआती लागत अधिक होती है, अत्यधिक गर्मी में ये कुछ हद तक खराब हो सकते हैं, भारतीयों में नोट मोड़कर रखने की आदत है इसलिए लोग इसे मोड़ने में असुविधा महसूस कर सकते हैं, और इन्हें छापने के लिए मौजूदा मशीनरी व तकनीकी ढांचे में बड़े बदलाव और नई तकनीक की जरूरत पड़ेगी।

जानिए पॉलीमर या प्लास्टिक नोट की ये 10 और खास सुरक्षा फीचर्स

Security features of polymer notes (AI Infographic)

1- पारदर्शी विंडो (Transparent Window):नोट में एक या एक से अधिक पारदर्शी विंडो होती हैं। इनमें जटिल डिजाइन, होलोग्राम या ऑप्टिकली वेरिएबल इमेज बनी होती हैं, जो कोण बदलने पर रंग या आकार बदलती दिखाई देती हैं।

2- एडवांस्ड होलोग्राम (Advanced Holograms): 3D प्रभाव वाले होलोग्राम जो नोट को घुमाने पर अलग-अलग इमेज या रंग दिखाते हैं।

3- माइक्रोप्रिंटिंग (Microprinting):बहुत छोटे अक्षर या टेक्स्ट जो नंगी आंख से देखे नहीं जा सकते। लेकिन माइक्रोफाइंग ग्लास से साफ पढ़े जा सकते हैं।

4- कलर शिफ्टिंग इंक (Colour-Shifting Ink):नोट को झुकाने या घुमाने पर रंग बदलने वाली विशेष स्याही नजर आती है जैसे हरी से नीली होती हुई।

5- उभरी हुई प्रिंटिंग (Raised/Intaglio Printing): नोट पर कुछ हिस्से उभरे हुए होते हैं, जो छूने पर महसूस होते हैं। यह विशेषता ऐसी है जो नकली नोट बनाना कठिन कर देती है।

6- सुरक्षा धागा (Security Thread):नोट में पूरी तरह एम्बेडेड या विंडो वाले मेटालिक/पॉलीमर धागे जो रोशनी में चमकते हैं, उनका इस्तेमाल किया जाता है।

7- UV फ्लोरेसेंट फीचर्स: अल्ट्रावायलेट (UV) लाइट के नीचे चमकने वाले पैटर्न, फाइबर या टेक्स्ट हैं।

8- इन्फ्रारेड फीचर्स: विशेष स्याही जो इन्फ्रारेड स्कैनर में खास पैटर्न दिखाती है।

9- लेजर पर्फोरेशन (Laser Perforations):नोट पर छोटे-छोटे छेदों से बने मूल्य या प्रतीक इसे अलग बनाते हैं।

10- यूनिक सीरियल नंबर:बेहतर गुणवत्ता के साथ प्रिंट किए गए सीरियल नंबर जिन्हें डुप्लिकेट करना मुश्किल होता है।

16 साल पहले शुरू हुई थी पॉलीमर नोटों की तैयारी

भारत में प्लास्टिक नोटों की प्रक्रिया 2010 में शुरू हुई थी, जब RBI ने प्री-क्वालिफिकेशन नोटिस जारी किया था। तब 8 कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई थी, और यह प्रक्रिया 2013-14 तक चली। इन नोटों के ट्रायल को लेकर सरकार ने संसद में बताया था कि 10 रुपए मूल्य वर्ग के एक अरब पॉलीमर नोटों को देश के पांच शहरों, जयपुर, शिमला, भुवनेश्वर, मैसूर और कोच्चि में ट्रायल किया जाना प्रस्तावित था। लेकिन बाद में यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।

RBI Polymer Notes (AI Infographics)

मंजूरी के बाद क्यों नहीं छप सके पॉलीमर नोट

उस समय एक बड़ी समस्या थी, देश के एटीएम, कैश डिपॉजिट और नोट गिनने की मशीनें केवल कागजी नोटों के हिसाब से डिजाइन की गई थीं। ये पारंपरिक मशीनें पॉलीमर नोटों की बनावट और सेंसर को प्रोसेस नहीं कर सकती थीं। मशीनों को अपग्रेड करने की उच्च लागत और कच्चे माल के आयात में आने वाला बड़ा खर्च इस प्रक्रिया की राह में रोड़ा बन गया था।

इस बार जारी EOI में घरेलू निर्माण की योजना

पिछली नाकाम कोशिशों से सीख लेते हुए, इस बार जारी किए गए EOI में पॉलीमर शीट आयात करने के बजाय उसके घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। लागत कम करने की दिशा में घरेलू निर्माण सुविधा स्थापित करने के लिए कंपनियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।

अब और क्या बदलेगा?

पॉलीमर नोटों के वितरण और हैंडलिंग के लिए बदलाव किए जाने हैं। इसके लिए एटीएम को अपग्रेड किया जाएगा, और नोट प्रोसेसिंग के तकनीकी ढांचे में भी बदलाव देखने को मिलेगा।

सिक्कों को बढ़ावा देने वाली योजना हुई फेल

जब पॉलीमर नोटों के ट्रायल में तकनीकी अड़चनें आ रही थीं, तब RBI ने सिक्कों को चलन में लाने का विकल्प चुना था। लेकिन सिक्कों की स्वीकार्यता छोटे नोटों से भी कम रही। इसे देखते हुए RBI ने इस विकल्प को छोड़ना बेहतर समझा और अब पॉलीमर नोटों को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

बता दें कि फिलहाल पॉलीमर नोट अभी सिर्फ तैयारी के शुरुआती चरण में हैं और इसे पूरी तरह लागू होने में अब भी वक्त लगने वाला है। कहना होगा कि आपकी जेब में मौजूद कागजी नोट अभी पूरी तरह सुरक्षित है और वैध भी। अगर बदलाव आएगा भी, तो वह धीरे-धीरे और पायलट टेस्टिंग के माध्यम से ही आएगा।

Updated on:
18 Jul 2026 04:25 pm
Published on:
18 Jul 2026 04:02 pm