Steroids Infertility in Men : सोशल मीडिया की फिटस्पिरेशन भारतीय युवाओं को स्टेरॉयड और असुरक्षित जिम सप्लीमेंट्स की ओर धकेल रही है। इनफर्टिलिटी , मानसिक स्वास्थ्य और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।
Steroid Side Effects in Youth : आजकल हर कोई फिट दिखना चाहता है। सोशल मीडिया पर चमकती तस्वीरें, सिक्स-पैक एब्स और तराशे हुए शरीर… यह सब देखकर कौन प्रभावित नहीं होगा? लेकिन क्या हमने कभी सोचा है कि इस फिटस्पिरेशन की दौड़ में हमारे युवा किस खतरनाक रास्ते पर निकल पड़े हैं? लखनऊ से आई एक चौंकाने वाली खबर हमें सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं हम 'परफेक्ट बॉडी' की चाहत में खुद को ही तो तबाह नहीं कर रहे?
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टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार , गोसाईंगंज के एक 25 साल के लड़के की कहानी सिर्फ एक इकलौता मामला नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत है। सोशल मीडिया पर दिख रही आदर्श तस्वीरों ने उसे इस कदर घेर लिया कि उसने 18 महीनों तक भूख कम करने वाली गोलियां और स्टेरॉयड का सेवन किया। नतीजा? मांसपेशियां तो बनीं लेकिन हड्डियां कमजोर हो गईं, हार्मोन का संतुलन बिगड़ गया, और सबसे खतरनाक बात उसे गंभीर मानसिक बीमारियां घेरने लगीं।
KGMU के प्रोफेसर आदर्श त्रिपाठी बताते हैं कि उसे पूरी तरह ठीक होने में दो साल लग गए। सोचिए, एक परफेक्ट बॉडी के जुनून ने उसकी जिंदगी के दो साल छीन लिए।
आज के युवा सोशल-मीडिया-रेडी शरीर पाने के लिए अवास्तविक छवियों के पीछे भाग रहे हैं। वे एक्टर्स को देखते हैं, जिन्हें अब जीरो फैट और बड़ी मांसपेशियों वाला शरीर चाहिए। 13-14 साल के बच्चे भी जिम जाने लगे हैं और स्टेरॉयड का इस्तेमाल कर रहे हैं - वे दवाएं जो हड्डियों की बीमारियों या मांसपेशियां बनाने के लिए नहीं बनी हैं। यह सब एक सस्ती ग्रे-मार्केट से खरीदा जा रहा है, बिना किसी डॉक्टरी सलाह के। स्टेरॉयड सिर्फ हड्डियां और दिल ही नहीं बढ़ाता, बल्कि युवाओं में दिल के दौरे का खतरा भी बढ़ा रहा है।
प्रोफेसर त्रिपाठी एक कॉलेज छात्र का उदाहरण देते हैं जिसने स्टेरॉयड और पार्टी ड्रग्स का सेवन किया। इसका नतीजा क्या हुआ? आक्रामकता, गुप्त व्यवहार, पढ़ाई में खराब प्रदर्शन और आर्थिक परेशानियां। एनाबॉलिक स्टेरॉयड से साइकोसिस, चिंता, डिप्रेशन, हड्डियों को नुकसान, कमजोर दृष्टि और नपुंसकता जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यह सिर्फ शारीरिक नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डाल रहा है। युवाओं में नींद की समस्या, मूड स्विंग्स और डिप्रेशन आम हो रहे हैं। कई लड़के ब्रेकअप या असफलता के बाद 'मर्दानगी' दोबारा हासिल करने के लिए भी स्टेरॉयड का सहारा लेते हैं।
हममें से कई लोग सोचते हैं कि जिम सप्लीमेंट्स सिर्फ प्रोटीन या क्रिएटिन हैं, जो सेहतमंद हैं। लेकिन प्रोफेसर त्रिपाठी चेतावनी देते हैं कि अनियमित जिम सप्लीमेंट्स भी गंभीर मानसिक और शारीरिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। टेस्ट बूस्टर और फैट बर्नर जैसे ओवर-द-काउंटर सप्लीमेंट्स में कैफीन या अन्य उत्तेजक पदार्थ हो सकते हैं, जो ब्लड शुगर को खतरनाक रूप से बढ़ाते हैं और दिल पर दबाव डालते हैं।
प्रजनन विशेषज्ञ का कहना है कि स्टेरॉयड का इस्तेमाल मर्दों की प्रजनन क्षमता पर गहरा असर डाल सकता है। उन्होंने एक 32 साल के मॉडल और बॉडीबिल्डर का उदाहरण दिया, जिसकी पत्नी पांच साल तक गर्भवती नहीं हो पाई। जब जांच हुई तो पता चला कि स्टेरॉयड लेने की वजह से उसके शरीर में शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम हो गई थी। इस समस्या को ठीक होने में पूरे तीन साल लग गए।
ऐसे 3–4 मामले वो हर महीने देखते हैं। कई बार मर्द बाहर से बिल्कुल फिट और ताकतवर दिखते हैं, लेकिन अंदर से उनकी प्रजनन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो चुकी होती है। कभी-कभी तो शुक्राणु बनना ही पूरी तरह बंद हो जाता है, और फिर रिकवरी में सालों लग जाते हैं या शायद कभी ठीक ही न हो पाए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रदूषण, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, शराब और खासकर स्टेरॉयड का दुरुपयोग, पुरुषों में बांझपन बढ़ाने के बड़े कारण हैं।
आज जरूरत है कि हम फिटने' की परिभाषा को फिर से देखें। सिक्स-पैक एब्स या मॉडल जैसी काया बनाना ही फिटनेस नहीं है। असली फिटनेस का मतलब है - शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना। स्कूलों, कॉलेजों और जिम में शारीरिक सकारात्मकता, यथार्थवादी स्वास्थ्य लक्ष्यों और ड्रग्स के खतरों के बारे में जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। सरकार को स्टेरॉयड की बिक्री को नियंत्रित करना चाहिए और हानिकारक ऑनलाइन सामग्री पर नजर रखनी चाहिए। क्योंकि जब फिटस्पिरेशन हमारी ज़िंदगी को तबाह करने लगे तो शायद वह प्रेरणा नहीं, बल्कि एक जानलेवा भ्रम बन जाती है।