Death Hole Photos : एक डेथ होल के बारे में जानिए, जिसके ना जाने कितने मौत के घाट उतारे गए। ये गोवा के सबसे पुराना किला में स्थित है। चलिए, हम आपको इस होल की असली फोटो दिखाते हैं।
Story of Death Hole :"मौत कब कहां से आ टपके कोई नहीं जानता…", ये लाइन आपने कई बार कही या सुनी होगी! आज हम एक ऐसी डेथ होल की कहानी बताने जा रहे हैं जिसके नीचे खड़ा होने का मतलब है कि काम तमाम। ये होल बहुत बड़ा नहीं, देखने में एकदम छोटा है। देखकर यकीन करना मुश्किल हो सकता है कि इसने कईयों की जान ली होगी। आज पत्रिका स्पेशल में हम इस डेथ होल के बारे में विस्तार से जानेंगे। पत्रिका टीम के रवि कुमार गुप्ता ने रीस मैगोस किला (Reis Magos Fort) में इस डेथ को जाकर देखा भी।
अमरीन शेख (गोवा की इतिहासकार व टूर गाइड) इसके बारे में बताया, हम जिस डेथ होल की बात कर रहे हैं वो रीस मैगोस किला में है। ये नॉर्थ गोवा के मांडवी नदी के किनारे स्थिति है। ये गोवा का सबसे पुराना किला है। यहीं पर थ्री किंग चर्च भी है जिसे मंदिर तोड़कर बनाने की बात कही जाती है।
अमरीन कहती हैं कि डेथ होल किला के एंट्री गेट 1 और गेट 2 बीच है। ये इसलिए था कि अगर दुश्मन ने पहला दरवाजा तोड़ दिया तो अगले गेट के पहुंचने से पहले डेथ होल के जरिए उन पर अटैक किया जा सके। इस होल के बारे में दुश्मनों को पता नहीं होता था। पर, किला के अंदर का सैनिक होल से देखकर आक्रमणकारियों पर खौलता तेल डाल देता था या यहीं से गोली चलाई जाती थी। इस तरह से डेथ होल के जरिए आक्रमणकारियों को रोकने का काम होता था।
साल 1493 में आदिल शाह सल्तनत, बीजापुर ने पहली बार इसे बनाया था। ये तब मिलिट्री पोस्ट हुआ करता था। आज भी इसकी बनावट को देखकर इस बात को समझा जा सकता है। किले के कोने-कोने पर इस तरह के एरो हेड बने होते थे जिस पर दुश्मनों पर हमला करने के लिए युद्ध उपकरण (कैनिन) लगे होते थे।
ये किला कई बार बना है। पहली बार पुर्तगालियों ने सल्तनत को हराने के बाद कब्जा कर लिया था। साल 1551 में इसे फिर से बनवाया गया था। 1707 में इस किला को लगभग पूरी तरह से बनवाया गया था। ये किला वायरसरायों का निवास भी रह चुका है।
ये हमारे शहीदों के लिए मौत का किला था। पुर्तगालियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले भारतीय क्रांतिकारियों को सजा दिया जाता था। यहां पर बने जेल में उन वीरों को कैद करके रखा जाता था।
स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां पर कईयों क्रांतिकारियों को पुर्तगालियों ने मौत के घाट उतारा था। आज भी शहीदों की आत्मा किले के अंदर भटकती है। हालांकि, ये दावा कितना सच है इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है।