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World’s First Vaccine Clinic : ये झोपड़ी नहीं, 230 साल पुराना दुनिया का पहला वैक्सीन क्लिनिक है जनाब

Worlds first vaccine clinic : इस झोपड़ी में डॉ. एडवर्ड जेनर ने वैक्सीन बना दिया था। इसके बाद दुनिया को खतरनाक बीमारियों से लड़ने का नया हथियार मिला। आइए, जानते हैं कि दुनिया का पहला वैक्सीन क्लिनिक आज किस हाल में है।

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डॉ. जेनर की AI निर्मित तस्वीर और क्लिनिक की फाइल फोटो | Photo- AI Grok and The Washington post

World’s First Vaccine Clinic : अगर वैक्सीन नहीं होते तो सोचिए कि आज हम और किस तरह से बीमारियों से लड़ रहे होते। वैक्सीन के योगदान को कभी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। खासकर, ऐसे जगह को तो कभी भी नहीं जो दुनिया का पहला वैक्सीन क्लिनिक हो। हम बात कर रहे हैं जेनट हट (Jenner’s Hut) की जहां पहली वैक्सीन खोजी गई। आइए, जानते हैं कि ये जगह कहां है और आज किस हाल में है?

"पत्रिका स्पेशल" स्टोरी में आज हम दुनिया के पहले वैक्सीन क्लिनिक (First Vaccine Clinic) के बारे में जानेंगे-

ये झोपड़ीनुमा (Jenner’s Hut) स्थान वैक्सीन के सबसे सुनहरे यादों को समेटे हुए है। ये बगीचा के बीच लकड़ी, घास-फूस से निर्मित है और इंग्लैंड के एक शांत और सुंदर स्थान पर स्थित है। कहते हैं कि इसके दरवाजे से वैक्सीन की विरासत झांक रही है। दरअसल, यह कभी मेडिकल की दुनिया की चमत्कारी घटनाओं का स्थल था। यह 18वीं सदी के एक डॉक्टर एडवर्ड जेनर (Edward Jenner) का था, जिन्होंने दुनिया का पहला टीका विकसित किया था। इस तरह से ये झोपड़ी दुनिया के पहले टीकाकरण क्लिनिक में बदल गई।

खतरे में दुनिया का पहला वैक्सीन स्थल

लगभग 230 साल बाद, संरक्षणवादियों का कहना है कि इसे बचाने की जरुरत है। पिछले हफ्ते, इसे ऐतिहासिक इंग्लैंड के "खतरे में" (At Risk) स्थानों की सूची में शामिल किया गया था। ये उन हजारों ऐतिहासिक स्थलों में है जिन्हें राष्ट्रीय धरोहर के रूप में बचाना जरूरी है।

इसका प्रबंधन करने वाले जेनर संग्रहालय के निदेशक जेम्स रॉडलिफ ने कहा, "यह छोटी-सी झोपड़ी वह जगह थी जहां इतिहास बदल गया।" उन्होंने वाशिंगटन पोस्ट के साथ टेलिफॉनिक इंटरव्यू में कहा कि झोपड़ी की देखभाल की जाती थी, लेकिन इसके फूस की छत और लकड़ी के हिस्से - वर्षों पुराने होने के कारण खराब हो रहे हैं।

डॉ. जेनर मुफ्त में देते थे टीका

इंग्लैंड की स्टोरीबुक कॉट्सवोल्ड पहाड़ियों के पास, बर्कले, ग्लूस्टरशायर में स्थित इसी झोपड़ी से जेनर ने 1790 के दशक में अपना चेचक का टीका मुफ्त में पीड़ितों को लगाया था। रॉडलिफ ने कहा कि यह उसी सिद्धांत के तहत संचालित होता था जिस तरह के टीकाकरण क्लिनिक कोविड महामारी के दौरान दिए गए। उसी तरह यहां पर भी लोग चेचक (काउपॉक्स) से सुरक्षा के लिए मुफ्त में टीका लगवाने आते थे।

जेनर की झोपड़ी को डॉक्टरों ने इसे नया नाम दिया- "वैक्सीनिया का मंदिर" (Temple of Vaccinia)। जेनर ने अपने आसपास देखा कि डेयरी में काम करने वालों को चेचक जैसा संक्रमण हो रहा है। इससे महिलाएं भी काफी ग्रसित थीं। इसको रोकने के लिए जेनर ने खोज कि ताकि खतरनाक काऊपॉक्स को रोका जा सके।

क्योंकि, जेनर हर रविवार को इससे ग्रसित मरीजों के घाव का इलाज करते थे। वो देखते थे कि लोग किस तरह से इससे पीड़ित हैं। यही सब देखने के बाद उन्होंने इसके खिलाफ पहला वैक्सीन तैयार किया।

जेनर की यह तकनीक जो आज भी आधुनिक टीका तकनीक का मूल आधार मानी जाती है।

पहला टीका-विरोधी आंदोलन

आपको जानकार हैरानी होगी कि टीकाकरण क्लिनिक ने दुनिया के पहले टीका-विरोधी आंदोलन (world’s first anti-vaccine movement) को भी जन्म दिया था। क्योंकि, जेनर स्वयं यह नहीं बता पाए थे कि टीका वास्तव में क्यों-कैसे काम करता है, इसलिए कई ब्रिटिश नागरिक संशय में थे। कुछ को डर था कि यह ईश्वर प्रदत्त उपचार शक्तियों का उल्लंघन करता है। अन्य लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि गाय की तरह मनुष्यों के सींग और खुर उग आएंगे।

लेकिन टीके की प्रभावशीलता ने इस तरह के सवालों का जवाब दिया। यह जल्द ही दुनिया भर में फैल गया। 1809 तक, संयुक्त राज्य अमेरिका ने न्यू इंग्लैंड में अपना पहला नगरपालिका चेचक टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया।

जुगाड़ू तरीके से रखी जाती थी वैक्सीन

स्पेनियों ने लाखों लोगों को चेचक का टीका लगाया, समुद्र पार टीके को जीवित रखने के लिए जीवित लोगों - 22 अनाथों - का इस्तेमाल किया। यात्रा के दौरान हर कुछ दिनों में लड़कों को क्रमिक रूप से काऊपॉक्स से संक्रमित करके, आयोजक टीके को जीवित रखने में सफल रहे।

पहले टीका को रखने के लिए विशेष सुविधा नहीं थी जैसे आजकल खास तरीके से किया जाता है। ताकि टीका को सुरक्षित तरीके से कहीं भेजा जा सके। इसलिए, कुछ खास जुगाड़ू तरीके से वैक्सीन को भेजा जाता था। स्पेनियों ने 1803 के बाल्मिस अभियान के दौरान दुनिया भर की यात्रा की और तभी लाखों लोगों को चेचक का टीका लगाया। समुद्र पार टीके को सुरक्षित रखने के लिए जीवित लोगों (22 अनाथों) का इस्तेमाल किया।

WHO ने किया चेचक का उन्मूलन

जेनर की खोज के दो शताब्दियों के भीतर, विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने 1980 में चेचक उन्मूलन की घोषणा कर दी। इसके तहत सिर्फ जरूरतमंदों को ही ये टीका दिया जाता था। कई लोग इस टीके को मानवता की सबसे बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक मानते हैं। 3,000 वर्षों के दौरान चेचक ने करोड़ों लोगों की जान ली है, उनको बचाने के लिए ये वरदान की तरह है।

रॉडलिफ ने कहा कि संग्रहालय ने शेड की मरम्मत के लिए कुछ फंड जुटाए हैं। जल्द ही मरम्मत का काम शुरू हो जाएगा। उन्हें उम्मीद है कि यहां पर घूमने-फिरने के लिए आने वाले लोग भी इसकी मदद के लिए आगे आएंगे।

(वाशिंगटन पोस्ट का यह आलेख पत्रिका.कॉम पर दोनों समूहों के बीच विशेष अनुबंध के तहत पोस्ट किया गया है)