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4.57 अरब साल के सूरज की उल्टी गिनती शुरू! क्या पृथ्वी को निगल जाएगा? वैज्ञानिकों ने बताया पूरा ‘Doomsday’

sun Life Cycle: सूरज गगन का एक तारा है... और यह करीब 4.57 अरब वर्ष पुराना है। हो सकता है कि वह अपने जीवन चक्र का आधा सफर पूरा कर चुका है। NASA समेत कई वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि आने वाले अरबों सालों में सूरज का बदलता स्वरूप पृथ्वी और पूरे सौरमंडल का भविष्य तय करेगा।
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Jul 17, 2026
Sun Life Cycle half complete
Sun Life Cycle half complete: धीरे-धीरे बदल रहा है सूरज का स्वरूप, वैज्ञानिकों ने की भविष्यवाणी(Photo AI Generated)

Sun Life Cycle: हर सुबह उगने वाला सूरज हमें जीवन देता है, लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि उसका भी एक तय जीवनकाल है। करीब 4.57 अरब वर्ष पुराना हमारा सूर्य अब अपने जीवन का लगभग आधा सफर पूरा कर चुका है। NASA और दुनिया के कई खगोलीय अनुसंधान संस्थानों के मुताबिक, आने वाले समय में सूर्य धीरे-धीरे और ज्यादा चमकीला होगा, फिर विशाल लाल दानव (Red Giant) में बदल जाएगा। अंततः एक White Dwarf बन जाएगा। इस पूरी यात्रा में सबसे बड़ा सवाल यह है कि पृथ्वी का क्या होगा? वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल, सौर भौतिकी और दूसरे तारों के अध्ययन के आधार पर इसका जवाब खोजने की कोशिश की है।

सूरज का भी इंसानों के लाइफ की तरह एक सफर

सूर्य कोई स्थायी खगोलीय पिंड नहीं है। NASA के अनुसार यह एक जी-टाइप मेन सिक्वेंस स्टार है। इसकी उम्र करीब 4.57 अरब वर्ष है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वह अभी अपने जीवनकाल करीब 10 अरब वर्ष का होगा। इसका अर्थ है कि वह अभी अपने जीवन का लगभग आधा सफर पूरा कर चुका है। सूर्य के केंद्र में हाइड्रोजन लगातार हीलियम में बदलती जा रही है। इसी नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) से ऊर्जा पैदा होती है। लेकिन यही प्रक्रिया धीरे-धीरे सूरज की संरचना भी बदल रही है। यही वजह है कि वैज्ञानिक कहते हैं कि भविष्य में सूर्य पहले से अधिक चमकीला होगा और अतत: लाल दानव (Red Giant) बन जाएगा।

क्या यह कल्पना है? क्या वैज्ञानिक अनुमान लगा रहे हैं?

इस सवाल पर वैज्ञानिकों का जवाब है नहीं। यह भविष्यवाणी किसी अनुमान या कल्पना पर आधारित नहीं है। इसके पीछे दशकों का वैज्ञानिक अध्ययन है। नासा यूरोपीयन स्पेस एजेंसी (ESA) और हार्वर्ड स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स (CFA) जैसे संस्थानों के वैज्ञानिक सूरज के द्रव्यमान, तापमान, ऊर्जा उत्पादन और उसके भीतर होने वाले कंपन या उसकी ध्वनि तरंगों का अध्ययन करते हैं। इस शोध से सामने आए आंकड़ों के आधार पर बनाए गए सोलर इवोल्यूशन मॉडल्स बताते हैं कि भविष्य में सूर्य किस तरह बदलेगा? वैज्ञानिक इन मॉडलों की तुलना ब्रह्मांड में मौजूद सूर्य जैसे अन्य तारों से भी करते हैं। इससे उनकी भविष्यवाणियों की पुष्टि हो जाती है। जो बताती है कि सूर्य का भविष्य कैसा होगा?

सूरज में आखिर क्या बदलाव हो रहा है?

सूर्य के केंद्र (Core) में हर सेकंड हाइड्रोजन के परमाणु आपस में मिलकर हीलियम बनाते हैं। इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) कहा जाता है। इसी से अपार ऊर्जा पैदा होती है। जैसे-जैसे हाइड्रोजन कम होती जाती है, सूर्य का केंद्र सिकुड़ता है और उसका तापमान बढ़ता है। इससे संलयन की गति और बढ़ती है। परिणामस्वरूप सूर्य पहले से अधिक ऊर्जा और प्रकाश छोड़ने लगता है। खगोल वैज्ञानिकों के मॉडलों के अनुसार सूर्य की चमक लगभग हर एक अरब वर्ष में करीब 10% तक बढ़ जाती है। यह प्रक्रिया अचानक नहीं बल्कि लगातार चल रही है।

पृथ्वी पर सबसे पहला असर क्या होगा?

  • सूर्य के Red Giant बनने से बहुत पहले ही पृथ्वी पर बदलाव शुरू हो जाएंगे। जब सूर्य की चमक बढ़ेगी तो पृथ्वी का औसत तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगेगा। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि लगभग एक अरब वर्ष बाद सूर्य की बढ़ी हुई ऊर्जा के कारण महासागरों का पानी तेजी से वाष्पित होने लगेगा। जल चक्र कमजोर होगा और वातावरण में जलवाष्प बढ़ने से तापमान और बढ़ सकता है।
  • इसके बाद पौधों के लिए प्रकाश संश्लेषण कठिन होता जाएगा। कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर कम होने और अत्यधिक गर्मी के कारण वनस्पतियां समाप्त होने लगेंगी। धीरे-धीरे ऑक्सीजन का स्तर भी घटेगा और पृथ्वी जटिल जीवन के लिए अनुपयुक्त होती जाएगी।
  • ध्यान देने वाली बात यह है कि यह प्रक्रिया अरबों वर्षों में होगी न कि आने वाले कुछ दशकों या सदियों में।
five important facts about sun: AI (Generated infographic)

क्या सूर्य सचमुच पृथ्वी को निगल जाएगा?

विज्ञान को लेकर जिज्ञासा रखने वालों के बीच सबसे पहला और चर्चित सवाल यही है कि क्या सूरज सच में अपने आसपास के ग्रहों के साथ पृथ्वी को भी निगल जाएगा? खगोल वैज्ञानिकों के के मुताबिक लगभग 5 अरब वर्ष बाद सूर्य अपने जीवन के अगले चरण में प्रवेश करेगा। तब वह Red Giant (लाल दानव) बन जाएगा। इस अवस्था में उसका आकार आज की तुलना में सैकड़ों गुना तक फैल सकता है।

सूरज बुध और शुक्र को निगल जाएगा, लेकिन पृथ्वी पर वैज्ञानिक एकमत नहीं

इस बात पर लगभग वैज्ञानिक सहमत हैं कि बुध (Mercury) और शुक्र (Venus) सूर्य के फैलते हुए बाहरी हिस्से में समा जाएंगे। लेकिन पृथ्वी को लेकर अभी भी वैज्ञानिक मॉडल पूरी तरह एक जैसे नहीं हैं। कुछ मॉडल बताते हैं कि सूर्य के द्रव्यमान में कमी आने से पृथ्वी की कक्षा थोड़ी बाहर खिसक सकती है। जबकि अन्य मॉडल कहते हैं कि सूर्य का फैलता हुआ बाहरी वातावरण और ज्वारीय प्रभाव (Tidal Effects) अंततः पृथ्वी को भी अपनी चपेट में ले सकते हैं। लेकिन एक बात लगभग तय मानी जाती है, यदि पृथ्वी उस समय तक भौतिक रूप से बच भी जाए, तब भी अत्यधिक गर्मी के कारण उस पर जीवन अरबों वर्ष पहले ही खत्म हो चुका होगा।

क्या इसका संबंध आज के ग्लोबल वार्मिंग से है?

इस सवाल पर वैज्ञानिक कहते हैं बिल्कुल नहीं। आज पृथ्वी पर हो रही Global Warming का मुख्य कारण मानव गतिविधियों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें हैं। संयुक्त राष्ट्र के IPCC की रिपोर्टें स्पष्ट करती हैं कि वर्तमान जलवायु परिवर्तन के लिए सूर्य की चमक में दीर्घकालिक वृद्धि जिम्मेदार नहीं है। यानी आज जो तापमान बढ़ रहा है, वह पृथ्वी पर इंसानी गतिविधियों का परिणाम है, जबकि सूर्य का विकास एक प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया है, जो अरबों वर्षों में होती है।

Sun life Cycle: AI Generated Infographic

क्या कहते हैं भारतीय शोध

-1- बता दें कि भारत में भी सूरज को लेकर अध्ययन और शोध किए जा रहे हैं। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन का Aditya-L1 मिशन सूरज का अध्ययन करने वाला भारत का पहला अंतरिक्ष मिशन है। जो सूर्य के बाहरी आवरण, सौर ज्वालाएं, कोरोनल मास इजेक्शन सौर हवा सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र आदि का अध्ययन कर रहा है। वह समझ रहा है कि वर्तमान में सूरज किस तरह काम कर रहा है।

-2- इसके साथ ही इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर ऑफ एस्ट्रोनोमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (IUCAA) के वैज्ञानिक तारों के विकास और सूरज जैसे तारों पर सैद्धांतिक शोध करते हैं। यहां स्टेलर इवोल्यूशन पर कई शोध प्रकाशित हुए हैं।

-3- इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA), बेंगलुरु के वैज्ञानिक सूरज की संरचना, सनस्पॉट, चुंबकीय गतिविधियों और सोलर साइकिल पर लंबे समय से शोध कर रहे हैं।

-4- उदयपुर सोलर ऑब्जर्वेटरी एशिया की प्रमुख सौर वेधशालाओं में से एक है। यहां सूर्य के कंपन, उसकी ध्वनि तरंगों और गतिविधियों का अध्ययन किया जाता है। ये अध्ययन भी सौर मॉडल्स को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं।

कहना होगा कि भारतीय वैज्ञानिक अभी सूर्य की गतिविधियों को समझकर वैज्ञानिक मॉडल्स को और मजबूत करने में लगे हैं, जिनके आधार पर वैज्ञानिक उसके आने वाले अरबों वर्षों के विकास या भविष्य का अनुमान लगा सकते हैं। लेकिन अब तक भारत में ऐसा कोई शोध नहीं किया गया, जिसके निष्कर्ष सूर्य के अंतिम भविष्य की कहानी सुनाते हों।

Updated on:
17 Jul 2026 05:09 pm
Published on:
17 Jul 2026 04:53 pm