
Tax Advisor: आजकल नौकरी, बिजनेस या ऑनलाइन काम करने वाले लोग टैक्स के उलझाऊ नियमों से रिटर्न भरने के चक्कर में काफी परेशान रहते हैं। इसी डर और उलझन से बचने के लिए भारत में टैक्स सलाहकारों (Tax Consultants) की मांग तेजी से बढ़ रही है। एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में हर 5 में से 1 भारतीय 20% ने एक्सपर्ट्स की मदद ली है, जो कि दुनिया के बड़े देशों के बराबर है। लोग टैक्स सलाहकारों की मदद इसलिए ले रहे हैं ताकि वे बिना किसी गलती के सही तरीके से अपना टैक्स और रिटर्न भर सकें, कानूनी दिक्कतों से बच सकें और सरकार द्वारा मिलने वाली टैक्स छूट का पूरा फायदा उठाकर अपने पैसे बचा सकें।
पहले जहां टैक्स भरना साल में सिर्फ एक बार का काम माना जाता था, वहीं अब नौकरीपेशा लोगों के साथ-साथ यूट्यूबर, फ्रीलांसर, कंटेंट क्रिएटर, ऑनलाइन सेलर्स और नए स्टार्टअप्स चलाने वाले युवा भी इसके दायरे में आ रहे हैं। कमाई के नए और अलग-अलग तरीके बढ़ने की वजह से टैक्स के नियम भी काफी बदल गए हैं। इसी वजह से लोग रिस्क लेने के बजाय टैक्स एक्सपर्ट्स से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित और सही समझ रहे हैं।
स्टैटिस्टा के वैश्विक सर्वे के अनुसार, दुनिया भर के लोग टैक्स फाइलिंग के लिए विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं, जिसका वैश्विक औसत लगभग 14% है। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया 21% के साथ सबसे आगे है, स्पेन और भारत 20% एक ही स्थान पर हैं। इसके बाद कनाडा 19%, जर्मनी 18% और अमेरिका 16% जैसे देश आते हैं, जो इस वैश्विक औसत से काफी आगे हैं। कानून के दायरे में रहकर ज्यादा से ज्यादा टैक्स की बचत करने के लिए लोग विशेषज्ञ को फीस देना बेहतर मानते हैं।
दूसरी ओर, ब्राजील और इटली में यह आंकड़ा 14%, चीन और यूके में 13%, फ्रांस में 12%, दक्षिण कोरिया में 9% है, जापान में सबसे कम सिर्फ 5% लोग ही टैक्स सलाहकार की मदद लेते हैं। भारत जैसे देशों में टैक्स नियमों की जटिलता के कारण विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ी है।
| देश | टैक्स सलाहकारों की मदद लेने वाले लोगों का प्रतिशत |
|---|---|
| ऑस्ट्रेलिया | 21% |
| स्पेन | 20% |
| भारत | 20% |
| कनाडा | 19% |
| जर्मनी | 18% |
| अमेरिका | 16% |
| ब्राजील | 14% |
| इटली | 14% |
| चीन | 13% |
| यूनाइटेड किंगडम | 13% |
| फ्रांस | 12% |
| दक्षिण कोरिया | 9% |
| जापान | 5% |
भारत में टैक्स सलाहकारों की मांग लगातार बढ़ रही है, क्योंकि देश का टैक्स नेटवर्क तेजी से बड़ा हो रहा है और रिकॉर्ड तोड़ टैक्स कलेक्शन हो रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो देश में कुल 9.19 करोड़ आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किए गए। इनमें से 8.74 करोड़ रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन हुआ और 8.59 करोड़ रिटर्न को पूरी तरह प्रोसेस भी कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद करीब 15 लाख रिटर्न ऐसे रहे जो वेरिफाई होने के बाद भी प्रोसेसिंग की कतार में अटके रहे।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों के टैक्स सिस्टम से जुड़ने, अलग-अलग जरियों से कमाई करने और निवेश करने के कारण टैक्स के नियम काफी पेचीदा हो गए हैं, जिन्हें ठीक से समझने के लिए लोगों को टैक्स विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ रही है। भारत में टैक्सपेयर्स का दायरा लगातार बढ़ रहा है। नवंबर 2025 तक उनकी संख्या 1.5 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई।
संघीय वित्त मंत्रालय के एक विभाग, सीबीडीटी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था कि देश में टैक्स देने वालों के साथ-साथ सरकार की टैक्स से होने वाली कमाई भी रिकॉर्ड रफ्तार से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कुल डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 19.58 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जिसमें से पर्सनल इनकम टैक्स और शेयर बाजार (STT) से होने वाली कमाई 25% बढ़कर 10.44 लाख करोड़ रुपये हो गई। डॉलर में देखें तो कॉर्पोरेट और पर्सनल टैक्स मिलाकर कुल राजस्व 235 अरब डॉलर रहा।
इसका मतलब है कि लोग सैलरी के अलावा शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड जैसी जगहों से भी खूब कमाई कर रहे हैं। ऐसे निवेशों पर टैक्स के नियम सामान्य सैलरी से कहीं ज्यादा उलझे हुए होते हैं, इसीलिए नौकरीपेशा लोगों से लेकर छोटे कारोबारियों और फ्रीलांसरों तक, हर कोई टैक्स एक्सपर्ट्स की मदद ले रहा है ताकि वे सही से टैक्स बचा सकें और कानूनी उलझनों से दूर रहें।
वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार को टैक्स से बड़ी आय हुई। सरकार को करीब ₹24.99 लाख करोड़ का नेट टैक्स राजस्व मिला, जबकि आयकर और कॉर्पोरेट टैक्स समेत कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 27.02 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15.6% अधिक है। इस बढ़ोतरी पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रत्यक्ष कर संग्रह लगभग तीन गुना बढ़ा है। उनके अनुसार यह देश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था, बेहतर टैक्स व्यवस्था और करदाताओं के बढ़ते भरोसे का संकेत हैं।
टैक्स सलाहकार का काम सिर्फ इनकम टैक्स रिटर्न भरना नहीं होता, बल्कि वे आपके पैसों के सबसे बड़े मददगार होते हैं। आपकी कमाई, खर्च और निवेश को समझकर आपको बताते हैं कि कानून के दायरे में रहकर आप अपना टैक्स कैसे बचा सकते हैं। इसके साथ ही, टैक्स के नए नियमों की जानकारी देना, सही दस्तावेजों को संभालना और इनकम टैक्स विभाग से कोई नोटिस आने पर उसका सही जवाब तैयार करना भी उन्हीं का काम होता है। एक टैक्स सलाहकार आपको वित्तीय नुकसान से बचाता है और आपके बिजनेस व पैसों को सही तरीके से मैनेज करने में मदद करता है।
व्यस्त जिंदगी में हर साल टैक्स के नियम और बजट लगातार बदल रहे हैं, जिससे आम लोगों के लिए नई-पुरानी टैक्स व्यवस्था और कटौतियों को समझना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में, आयकर रिटर्न (ITR) भरते समय छोटी सी गलती या अधूरी जानकारी भी बाद में इनकम टैक्स विभाग के नोटिस का कारण बन सकती है। इसी परेशानी से बचने के लिए लोग टैक्स विशेषज्ञ की मदद लेना बेहतर समझते हैं। एक विशेषज्ञ न केवल आपके समय की बचत करता है, बल्कि कानून के दायरे में रहकर आपको सही छूटों की जानकारी देता है जिससे आपका टैक्स भी बचता है।
छोटे व्यापारी और स्वरोजगार से जुड़े लोग अक्सर टैक्स नियमों को लेकर सबसे ज्यादा परेशान रहते हैं। उनकी आय हर महीने समान नहीं होती। कई बार जीएसटी, आयकर और अन्य वित्तीय नियमों को समझना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में टैक्स सलाहकार सिर्फ टैक्स भरने में ही नहीं बल्कि पूरे वित्तीय प्रबंधन को बेहतर बनाने में भी मदद करते हैं। इससे कारोबारियों को भविष्य की योजना बनाने में आसानी होती है। ऑनलाइन टैक्स फाइलिंग और डिजिटल वित्तीय सेवाओं ने टैक्स से जुड़े काम को आसान बना दिया है। इसके साथ ही लोग अपने पैसों और टैक्स की बेहतर योजना बनाने के लिए टैक्स सलाहकारों की मदद भी अधिक लेने लगे हैं।
भारत में हर 5 में से एक व्यक्ति का टैक्स सलाहकार की मदद लेना यह प्रतीत होता है कि लोग अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर जागरूक हो रहे हैं। बढ़ती कमाई, निवेश के नए विकल्पों और बदलते टैक्स नियमों के कारण विशेषज्ञ की सलाह जरूरी हो गई है। आज के समय में सिर्फ पैसा कमाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसका सही प्रबंधन करना भी आवश्यक है, और टैक्स सलाहकार इसी काम को आसान बनाते हैं।