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‘अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार’… क्यों बनीं छत्तीसगढ़ की ये तीन नदी सावन की सबसे बड़ी पहचान? देखिए

Rivers of Chhattisgarh: सावन की दस्तक के साथ ही छत्तीसगढ़ की नदियां अपने पूरे वेग से बह रही हैं। लगातार हो रही बारिश से महानदी, अरपा, पैरी, इंद्रावती, शिवनाथ, हसदेव और केलो समेत प्रदेश की प्रमुख नदियां उफान पर हैं।
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Updated: 30 Jul 2026, 1:29 PM IST
Chhattisgarh News
'अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार'… (फोटो सोर्स- AI)

Chhattisgarh Rivers: सावन के पहले ही सप्ताह में छत्तीसगढ़ की धरती हरियाली से सराबोर है। लगातार हो रही झमाझम बारिश ने प्रदेश की प्रमुख नदियों- महानदी, अरपा, पैरी, इंद्रावती, शिवनाथ, हसदेव और केलो को नया जीवन दे दिया है। उफनती धाराएं, लबालब घाट और खेतों तक पहुंचा पानी केवल मानसून की ताकत नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का भी जीवंत स्वरूप बन गया है।

ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो राज्य गीत की अमर पंक्तियां "अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार…" इन दिनों वास्तविक रूप लेकर पूरे प्रदेश में गूंज रही हों। अच्छी बारिश ने जहां किसानों के चेहरे पर मुस्कान लौटाई है, वहीं प्रदेश की नदियों ने सावन के स्वागत को प्रकृति के सबसे सुंदर उत्सव में बदल दिया है।

सावन में क्यों सबसे खास हो जाती हैं ये तीन नदियां? जानें

सावन और छत्तीसगढ़ का रिश्ता केवल मौसम का नहीं, बल्कि संस्कृति, आस्था और जीवन का भी है। जैसे-जैसे बारिश बढ़ती है, वैसे-वैसे प्रदेश की नदियां अपने पूरे वेग से बहने लगती हैं। घाटों से लेकर जंगलों और खेतों तक पानी का विस्तार दिखाई देता है। मिट्टी की सोंधी खुशबू, लहरों की आवाज और चारों ओर फैली हरियाली इस बात का एहसास कराती है कि प्रकृति अपने सबसे खूबसूरत रूप में लौट आई है।

इसी मौसम में महानदी प्रदेश की जीवनरेखा बनकर खेतों को पानी देती है, अरपा राज्य गीत की पहली पंक्ति के कारण सांस्कृतिक पहचान बन जाती है और पैरी राजिम के त्रिवेणी संगम के कारण आस्था का केंद्र बन जाती है। यही तीनों नदियां सावन के दौरान छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान बन जाती हैं। प्रदेश की जीवनरेखा कही जाने वाली महानदी, उत्तर छत्तीसगढ़ की पहचान अरपा और आस्था की प्रतीक पैरी नदी इस समय सबसे अधिक चर्चा में हैं। इन नदियों में बढ़ा जलस्तर केवल प्राकृतिक बदलाव नहीं बल्कि खेती, पेयजल, जैव विविधता और प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए भी शुभ संकेत माना जा रहा है।

बारिश ने लौटाई खेती की उम्मीद

प्रदेशभर में लगातार हो रही बारिश के कारण धान की बुआई में तेजी आई है। जलाशयों और बांधों का जलस्तर बढ़ रहा है। जिन क्षेत्रों में कुछ दिन पहले तक सूखे जैसी स्थिति बनने लगी थी, वहां अब किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद नजर आने लगी है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी कई जिलों में भारी बारिश की संभावना बनी हुई है।

महानदी : छत्तीसगढ़ की जीवनरेखा

  • उद्गम: सिहावा पर्वत, धमतरी
  • लंबाई: 858 किलोमीटर

महानदी केवल प्रदेश की सबसे बड़ी नदी नहीं, बल्कि लाखों किसानों की जीवनरेखा है। सिंचाई, पेयजल और उद्योगों के लिए इसका पानी सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसका प्राचीन नाम चित्रोत्पला और नीलोत्पला है। शिवनाथ, हसदेव, मांड, पैरी और सोंढूर जैसी नदियां इसकी प्रमुख सहायक नदियां हैं। सावन में महानदी का बढ़ा जलस्तर प्रदेश में बेहतर कृषि और जल सुरक्षा का संकेत देता है।

  • अरपा : राज्य गीत की पहली पहचान
  • उद्गम: पेंड्रा-लोरमी पठार
  • लंबाई: 147 किलोमीटर

अरपा नदी बिलासपुर अंचल की पहचान मानी जाती है। पेंड्रा-लोरमी पठार से निकलकर यह शिवनाथ नदी में मिलती है। छत्तीसगढ़ के राजगीत की शुरुआत "अरपा पैरी के धार…" से होने के कारण इस नदी का सांस्कृतिक महत्व सबसे अधिक माना जाता है। सावन में इसका शांत प्रवाह उफान में बदल जाता है और घाटों पर प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।

  • पैरी : आस्था और संगम की नदी
  • उद्गम: भाठीगढ़ पहाड़ी, मैनपुर (गरियाबंद)
  • लंबाई: 96 किलोमीटर

पैरी नदी गरियाबंद जिले की भाठीगढ़ पहाड़ी से निकलती है और राजिम में महानदी से मिलती है। यहां महानदी, पैरी और सोंढूर का त्रिवेणी संगम है। प्रसिद्ध राजीवलोचन मंदिर भी इसी नदी के किनारे स्थित है। सावन के दौरान यहां धार्मिक गतिविधियां बढ़ जाती हैं और हजारों श्रद्धालु संगम में स्नान करने पहुंचते हैं।

छत्तीसगढ़ मानसून 2026: बारिश का रिपोर्ट कार्ड

एक नजर : इन तीन नदियों की खासियत

क्या आप जानते हैं?

  • छत्तीसगढ़ का राजगीत
  • लेखक: नरेंद्र देव वर्मा
  • राजगीत घोषित: 1 नवंबर 2019
  • पहली पंक्ति: "अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार…"

सावन की बारिश केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, प्रकृति और लोकजीवन का उत्सव है। जब अरपा की धार, पैरी का प्रवाह और महानदी की अपार जलराशि एक साथ उफान पर होती हैं, तब राज्य गीत की पंक्तियां केवल शब्द नहीं रह जातीं, बल्कि प्रदेश की जीवंत तस्वीर बन जाती हैं। यही कारण है कि हर सावन में ये तीनों नदियां छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पहचान बन जाती हैं और हर छत्तीसगढ़िया के मन में सहज ही राजगीत गूंज उठता है- "अरपा पैरी के धार, महानदी हे अपार..."

छत्तीसगढ़ की मुख्य नदियाँ

प्रदेश की अन्य नदियां भी उफान पर

महानदी, अरपा और पैरी के अलावा इंद्रावती, शिवनाथ, हसदेव और केलो नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। कई स्थानों पर घाट जलमग्न हो गए हैं और नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। हालांकि यह पानी प्रदेश की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद लाभदायक माना जा रहा है।

Updated on:
30 Jul 2026, 1:29 PM IST
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