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भारत का ये राज्य है महिला कलेक्टरों का ‘पावर हाउस’, देशभर के लिए बना मिसाल

भारत का दिल मध्य प्रदेश देश का ऐसा राज्य जहां बेटियों के हाथ में जिलों की कमान, 17 महिला कलेक्टर, दक्षिण राज्य भी मजबूत, प्रशासनिक ढांचे की बदल रही तस्वीर, महिला सशक्तिकरण का नया अध्याय, नया इतिहास...

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Apr 11, 2026
Women IAS Officers In India(patrika file photo)

Women Collectors: ये तस्वीर देखकर आप क्या सोचते हैं... ये हैं मध्य प्रदेश के सिवनी की पूर्व कलेक्टर की वो छवि जो मिसाल बन गई। जब उनका ट्रांसफर हुआ तो सिवनी की जनता सड़कों पर उतर आई, उन्हें भव्य विदाई दी गई, उन्हें पालकी में बैठाया गया। एक बेटी की तरह सम्मान देकर अभिवादन किया गया। एक महिला कलेक्टर की बिदाई एमपी के लिए ही नहीं बल्कि देशभर की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई। ये तो महज एक उदाहरण भर है।

भारत में बेटियों को देवी का रूप माना गया है। जहां उसे पूजने की बात की जाती रही, लेकिन उस बुरे दौर से बेटियां हर दिन गुजरती हैं, जहां वो घिनौने अपराध की भेंट चढ़ती हैं। क्रूरता की हदें पार करती अपराधी औरत के खौफनाक किस्से भी हम पढ़ते हैं और कामयाबी की सीढ़ी चढ़ती युवतियों के प्रेरणा लेख भी। ऐसी ही एक खबर थी कि मध्य प्रदेश में रातों-रात 26 IAS अफसरों के तबादले कर दिए गए। पता चला एमपी में 17 महिला कलेक्टर हैं। यानी 55 जिलों में से 17 जिलों में महिला नेतृत्व। मध्य प्रदेश जहां 31 फीसदी जिलों की कमान बेटियों के हाथों में है।

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यह वो संख्या है, जो मध्य प्रदेश में महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक भागीदारी की मजबूत तस्वीर दर्शाती है। बस यहीं से प्रेरित होकर patrika.com ने देशभर के राज्यों की तस्वीर जाननी चाही… क्या आप भी देखना चाहेंगे, जरूर पढ़ें संजना कुमार की खास रिपोर्ट…

देश के प्रशासनिक सिस्टम में एक बड़ा बदलाव साफ नजर आ रहा है, जिन जिलों की कमान कभी पुरुष अधिकारियों के हाथ तक ही केंद्रीत थी, वहां अब महिलाएं भी अपनी मजबूत स्थिति दर्ज करवा रही हैं। यह बदलाव केवल बढ़ती संख्या की बात नहीं है, बल्कि सोच और नेतृत्व की दिशा बदलने का अहम संकेत भी है।

अप्रैल 2026 के हालिया आंकड़े बताते हैं कि कई राज्यों में महिला IAS अधिकारी अब जिला कलेक्टर के रूप में निर्णायक और महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। और इस दौड़ में मध्य प्रदेश सबसे आगे निकल गया है। वो देशभर के राज्यों के लिए महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनकर उभरा है।

बता दें कि मध्य प्रदेश में दो दिन पहले ही 9 और 10 अप्रैल की दरमियानी रात को ही बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की गई। जिसमें एक नया रिकॉर्ड सामने आया-

1- सबसे बड़ा रिकॉर्ड कि राज्य के 17 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथ में है

2- दूसरा रिकॉर्ड कि यहां 26 IAS अधिकारियों के तबादले किए गए, जिनमें 14 जिलों के कलेक्टर बदले गए। इनमें 9 नई महिला IAS अफसरों को कलेक्टर पद की जिम्मेदारी दी गई।


यह रिकॉर्ड राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ी संख्या में महिला कलेक्टर होने का गौरव दर्शाता है, जो इसे महिला कलेक्टर पावर हाउस बना रहा है।

प्रशासनिक स्तर पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी अकेले मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि, देशभर के कई राज्यों में भी दिखाई दी है। इनमें साउथ के राज्यों में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर बेहद खूबसूरत नजर आती है। आप भी देखें- एमपी के बाद कौन दूसरे और कौन तीसरे और चौथे नंबर पर हैं कौन रह गया पीछे.-

तमिलमाडु- यहां 10-12 महिला कलेक्टर हैं,

केरल- 14 जिलों में से लगभग आधे जिलों में महिला नेतृत्व ही है।

उत्तर प्रदेश- में 12-15 महिला कलेक्टर हैं, वर्तमान में, धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ भी रही है। यूपी का बहराइच ऐसा जिला है, जहां महिला कलेक्टर से लेकर हर प्रशासनिक पद महिलाएं ही संभाल रही हैं।

राजस्थान- यहां 8 महिला कलेक्टर हैं, ये सभी प्रशासनिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों की कमान संभाल रही हैं।

तेलंगाना- तेलंगाना भी महिला सशक्तिकरण के मामले में उभरता राज्य है। यहां 10-12 जिलों में महिला नेतृत्व दिखता है।

इसके अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी महिला कलेक्टरों की मौजूदगी बढ़ती नजर आ रही है। लेकिन स्थिति अभी एमपी, यूपी, साउथ के राज्यों और राजस्थान या तेलंगाना जैसी नहीं है।

क्यों बढ़ रही है कलेक्टर महिलाओं की संख्या?

भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं होतीं ज्यादातर महिलाएं

आमतौर पर देखने में आता है कि महिलाएं महिला बाल कल्याण, महिला बाल विकास से जुड़ी समस्याओं के समाधान में ज्यादा रूचि लेती हैं, वहीं ज्यादातर महिलाएं खासतौर पर बड़े पदों पर रहने वाली महिलाएं भ्रष्टाचारी नहीं होतीं। वे निष्पक्ष रहती हैं। इसके अलावा कुछ सामाजिक मुद्दे जो सरकार की प्रायोरिटी में रहते हैं, महिलाएं उन मुद्दों पर नेचुरल तरीके से काम कर पाती हैं।

फील्ड पोस्टिंग में भरोसा

यह दर्शाता है कि अब सरकारें महिलाओं को केवल डेस्क जॉब तक सीमित नहीं रखना चाहतीं, बल्कि जिला प्रशासन जैसे चुनौतीपूर्ण पदों पर भी नियुक्त कर रही हैं। सरकारें अब महिलाओं की संवेदनशीलता, कम्युनिकेशन स्किल को देखकर उन्हें मौका दे रही हैं। वे समझ गई हैं कि सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने वे पुरुषों से कहीं ज्यादा आगे हैं। महिलाएं समाज का ऐसा हिस्सा हैं, जो एक बड़ा सामाजिक बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण भागीदारी निभा सकता है।

''सिविल सेवा परीक्षा और एमपीपीएसी की तैयारी कराने वाले शिक्षक अभिषेक खरे कहते हैं कि दो बहुत बड़े कारण हैं इनमें पहला बड़ा कारण है कि महिला कलेक्टर को बेहद संवेदनशील माना जाता है। दरअसल एक कलेक्टर का काम होता है जन समस्याओं को सुनना, उन पर ध्यान देना और उनका त्वरित निवारण करना। वे काफी गहराई से इस काम में जल्दी इन्वॉल्व हो जाती हैं। महिलाओं की कम्यूनिकेशन स्किल उन्हें इस पद के लिए काबिल बनाती हैं कि वे लोगों से जल्दी कनेक्ट हो पाती हैं और नेचुरली तुरंत निर्णय लेने की क्षमता भी उनमें होती है। कलेक्टरों की पोस्टिंग का सीधा असर लोगों के जीवन पर नजर आता है। ये दो बड़े कारण हैं जो उन्हें इस पद के योग्य बनाते हैं।''

जमीनी बदलाव क्या?

  • ज्यादातर समस्याएं महिलाओं के साथ होती हैं, ऐसे में वे बिना डरे कलेक्टर के सामने अपनी समस्याओं को रख पाती हैं। उनका सॉल्यूशन दें पाती हैं। ऐसे में वे लोगों के दिलों से सीधे कनेक्ट होती हैं।
  • महिलाएं जिस जिले मे पदस्थ होती हैं, उस जिले के बहुत बड़ा प्रेरणा स्त्रोत बनती हैं। वहां रहने वाली महिलाएं, लड़कियां पढ़ाई-लिखाई को लेकर ही नहीं, बल्कि वे एक महिला अधिकारी की कार्यशैली से भी प्रभावित होती हैं। इस तरह सरकार की छवि भी स्वत: ही निखर कर समाज के सामने आती है। यही कारण है कि स्थानी युवतियों और महिलाओं की सोच में सकारात्मक बदलाव देखे जा सकते हैं। जो उनका जीवन स्तर तक बदल सकते हैं।
  • सबसे बड़ा बदलाव ये भी कि अब ये IAS अफसर महिलाएं इन जिलों के गांवों की युवतियों को भी प्रेरित कर रही हैं। परिवार और समाज दोनों ही स्तर पर बेटियों को प्रशासनिक सेवाओं में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  • महिला कलेक्टर महिला सुरक्षा के साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं पर भी बेहतर फोकस कर पाती हैं।
  • स्कूल ड्रॉप आउट कम करने और पोषण अभियान में एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
  • स्व सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाती हैं।

नई पीढ़ी के लिए रोल मॉडल हैं महिला कलेक्टर

मध्य प्रदेश में हालिया तबादलों में कई महिला अधिकारियों को पहली बार कलेक्टर बनाया गया है। यह न केवल बड़ा प्रशासनिक बदलाव है, बल्कि एक संदेश भी है कि बेटियां सिर्फ सपने नहीं देख रहीं, बल्कि जिलों की दिशा और दशा दोनों बदल रही हैं। अब ये रोल मॉडल ही तो हैं, जो प्रदेश के जिलों की तस्वीर अपने दम पर बदलने आई हैं। उम्मीदों पर खरे उतरने का सपना लिए खुद को साबित करने आई हैं।

महिला कलेक्टर की ये कहानी क्या आप जानते हैं

MP IAS Officer sanskriti jain(photo FB)

एक संक्षिप्त परिचय: मध्य प्रदेशन कैडर 2015 बैच की आईएस अधिकारी जो मुख्य रूप से सिवनी जिले में कलेक्टर के रूप में अपने जन-केंद्रित कार्यों और अनोखी पालकी विदाई के लिए प्रदेश समेत देशभर में मशहूर हो गईं। उन्होंने लाड़ली बहना योजना को, अटल पेंशन योजना से जोड़कर महिला सशक्तिकरण में अहम भागीदारी निभाई। वर्तमान में वे भोपाल नगर निगम कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं।

खुद संस्कृति जैन से जब यह पूछा गया कि सिवनी से उनकी विदाई का विडियो काफी वायरल हुआ था, उन्हें कैसा लगा? इस पर उनका जवाब सुनकर आप समझ जाएंगे कि एक महिला कलेक्टर का होना या प्रशासनिक पदों पर महिलाओं का होना क्यों वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है…

संस्कृति जैन कहती हैं कि यह पल उन्हें भावुक कर गया। इस पल को वो जिंदगी भर नहीं भूलेंगी। उनका कहना था कि बतौर एक कलेक्टर सिवनी के लोगों ने उनके स्टाफ ने उन्हें भरपूर स्नेह दिया। सहयोग दिया। उन्होंने गिफ्ट डेस्क प्रोग्राम का जिक्र करते हुए बताया कि जनभागीदारी का ऐसा अद्भुत रूप वहां देखने को मिला कि जहां लोगों की मदद से करीब 14000 डेस्क बेंच सरकारी प्राथमिक स्कूलों में पहुंचाए गए।

उनका कहना है कि सफलता सिर्फ एक रैंक या पद का नाम नहीं है, बल्कि उस सोच का नाम है, जो आपको गिरकर भी आगे बढ़ने की ताकत देती है। उनका मानना है कि मुश्किल दौर, जैसे डिप्रेशन, असफलता, इंसान को तोड़ने के लिए नहीं आते हैं, बल्कि मजबूत बनाकर जाते हैं। उनके लिए प्रशासनिक सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति जवाबदेही निभाने का एक माध्यम है।

वे मानती हैं कि असली नेतृत्व वही है जो लोगों की समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी समझे, उनके समाधान के लिए हमेशा खड़ा रहे। अपनी सफलता को लेकर वे यही कहती हैं कि जीवन में संतुलन, संवेदनशीलता और लगातार सीखते रहने की आदत ही सफलता का मूलमंत्र है।

चुनौतियां भी कम नहीं

  • कार्य के घंटे
  • फील्ड में प्रेशर
  • सामाजिक अपेक्षाएंजैसी समस्याएं आज भी इनके लिए चुनौती हैं, लेकिन महिला कलेक्टर अपनी संवेदनशीलता और योग्यता के आधार पर लगातार अपने को साबित करती आगे बढ़ती जा रही हैं।

महिला कलेक्टरों की बढ़ती संख्या को लेकर patrika.com की ये स्टोरी केवल आंकड़ा भर नहीं है, बल्कि बदलते भारत की सुनहरी तस्वीर है। ये स्टोरी आपको कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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Updated on:
11 Apr 2026 06:43 pm
Published on:
11 Apr 2026 06:10 pm
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