Mandku Dweep in CG: मदकू द्वीप न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन केंद्र माना जाता है।
Mandku Dweep in CG: मदकू द्वीप न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन केंद्र माना जाता है। यह बिलासपुर जिले के मस्तूरी विकासखंड में स्थित है और चारों ओर से शिवनाथ नदी से घिरा हुआ है, जिससे यह एक प्राकृतिक द्वीप का रूप लेता है। इसका क्षेत्रफल लगभग 24 हेक्टेयर है और यहां की भूमि उर्वर, हरी-भरी और मनोहारी दृश्यावलियों से भरपूर है।
मदकू द्वीप में पुरातत्वविदों को प्रागैतिहासिक काल के औजार, ताम्र और पत्थर के बर्तन, सिक्के, मिट्टी के बर्तन, और विभिन्न प्रकार के शिलालेख मिले हैं। यहां के अवशेषों से यह पता चलता है कि यह क्षेत्र न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि व्यापार और संस्कृति के आदान-प्रदान का भी केंद्र रहा होगा।
11वीं शताब्दी में यहां कई मंदिरों का निर्माण हुआ, जिनमें से कुछ आज भी खंडहर रूप में विद्यमान हैं। मंदिरों में पाए गए शिलालेखों और मूर्तियों में शैव और वैष्णव परंपराओं के प्रतीक मिलते हैं, जो धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
मदकू द्वीप को ‘केदार तीर्थ’ और ‘हरिहर क्षेत्र केदार द्वीप’ के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां धार्मिक स्नान और पूजा का विशेष महत्व है। साल भर यहां कई धार्मिक आयोजन होते हैं, विशेषकर महाशिवरात्रि और माघ पूर्णिमा के अवसर पर, जब हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं।
पर्यटन की दृष्टि से, यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक वातावरण का अद्वितीय मिश्रण प्रस्तुत करता है। नदी के बीच स्थित यह द्वीप पक्षी प्रेमियों, फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। यहां नाव से आने का अनुभव भी रोमांचक होता है।
हालांकि यह स्थान ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से इतना महत्वपूर्ण है, फिर भी यहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। शौचालय, पेयजल, उचित सड़क और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। इस स्थिति को देखते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की है और संबंधित विभागों को सुविधाओं के विकास के निर्देश दिए हैं, ताकि यहां आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु बेहतर अनुभव पा सकें।