
UNFPA Survey online dating: आज की दुनिया को हम डिजिटल की दुनिया कहते हैं। सोशल मीडिया और ऐप्स के माध्यम से इंसान अपनी हर जरूरत पूरी कर रहा है। यहां तक डेटिंग ऐप्स और मेट्रोमोनियल साइट्स के माध्यम से आजकल रिश्ते बन रहे हैं। ऐसे में लोगों की आम धारणा बन चुकी है कि अब नई पीढ़ी अपना जीवनसाथी या पार्टनर मोबाइल स्क्रीन पर ही ढूंढ़ रही है। डिजिटल की इस दुनिया ने तो रिश्तों का स्वरूप ही बदल दिया है। लेकिन हकीकत इससे इतर और चौंकाने वाली है। UNFPA के सर्वे के मुताबिक 55 फीसदी से ज्यादा युवाओं ऐसे हैं जो घंटों मोबाइल या इंटरनेट पर समय बिताते हैं, लेकिन इनमें से कोई भी डेटिंग ऐप या लाइफ पार्टनर नहीं खोजता। यह आंकड़ा उन सभी एक्टिविटीज से कम है, जिनके लिए युवा इंरनेट का उपयोग कर रहा है।
patrika.com पर पढ़ें 'बदलती दुनिया, बदलता परिवार' और भाग- 3 में जानें ऑनलाइन डेटिंग ऐप और डिजिटल की दुनिया में रिश्तों का स्वरूप बदलने की बात में अब कितनी सच्चाई? पार्टनर की तलाश कहां कर रहे युवा?
दुनिया के 73 देशों के 1 लाख से ज्यादा युवक-युवतियों पर किए गए सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि ये युवा 2 घंटे या इससे ज्यादा का समय मोबाइल पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस पर बिता रहे हैं। सर्वे में शामिल लाखों युवाओं का एक बड़ा हिस्सा 55.1 फीसदी युवा ऐसे हैं जो बताते हैं कि वे डेटिंग या जीवनसाथी की तलाश करने इंटरनेट या सोशल मीडिया पर जरा भी समय नहीं बिताते।
यही नहीं इन युवाओं ने साफ कहा कि वे सबसे ज्यादा समय एंटरटेनमेंट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बिताते हैं। इसके बाद कुछ समय उनके काम से संबंधित होता है, तो कुछ समय जानकारियां हासिल करने के लिए, इसके अलावा डिजिटल के माध्यम से ही यह तबका अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करना या जुड़े रहना पसंद करता है। लेकिन डेटिंग या पार्टनर की तलाश के लिए ऑनलाइन समय इनके पास बिल्कुल नहीं है।
UNFPA की रिपोर्ट से संकेत तो मिल ही रहे हैं कि युवा डिजिटल की दुनिया में पार्टनर को खोजना ही नहीं चाहता। उसे अपना पार्टनर अपने आसपास की दुनिया में ढूंढ़ना है। इसे वो जानता हो, पहचानता हो।
सोशल एक्सपर्ट डॉ. विनिता गुप्ता बताती हैं कि हां ऐसा एक दौर गुजरा है कि जब लोग अपना पार्टनर किसी मेट्रीमोनियल वेबसाइट पर खोजते रहे। आज भी भारत के संदर्भ में ऐसा कहना सही रहेगा। हालांकि अब ऐसे युवाओं की संख्या कम हो रही है। क्राइम और अनजान लोगों से रिश्तों के खतरे भी बढ़े हैं। ऐसे में ऑफलाइन और जान-पहचान वाले लोगों के बीच बेहतर जीवनसाथी की तलाश बढ़ी है।
वे बताती हैं कि आज भी युवा परिवार, कार्यस्थल, शिक्षा जैसे संस्थानों और सामाजिक दायरे के माध्यम से बनाना पसंद कर रहे हैं। हालांकि रिपोर्ट इस पर बात नहीं करती। लेकिन रिपोर्ट में युवाओं से किए सवालों के जवाब जानकर ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि युवा डिजिटल भले ही है, लेकिन अब उसकी डिजिटल दुनिया में प्राथमिकताएं जरूर बदल गई हैं।
दुनिया के 73 देशों के 1 लाख से ज्यादा युवक-युवतियों पर किए गए सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि ये युवा 2 घंटे या इससे ज्यादा का समय मोबाइल पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मस पर बिता रहे हैं। सर्वे में शामिल लाखों युवाओं का एक बड़ा हिस्सा 55.1 फीसदी युवा ऐसे हैं जो बताते हैं कि वे डेटिंग या जीवनसाथी की तलाश करने इंटरनेट या सोशल मीडिया पर जरा भी समय नहीं बिताते।
यही नहीं इन युवाओं ने साफ कहा कि वे सबसे ज्यादा समय एंटरटेनमेंट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बिताते हैं। इसके बाद कुछ समय अपने काम से संबंधित होता है, तो कुछ समय जानकारियां हासिल करने के लिए, इसके अलावा डिजिटल के माध्यम से ही यह तबका अपने दोस्तों और परिवार के सदस्यों के साथ बातचीत करना पसंद करता है। लेकिन डेटिंग या पार्टनर की तलाश के लिए ऑनलाइन समय इनके पास बिल्कुल नहीं है।
भारत में डेटिंग ऐप्स का बाजार लगातार बढ़ रहा है। शहरी युवाओं के बीच डेटिंग ऐप का ट्रेंड बढ़ा है। लेकिन UNFPA की सर्वे रिपोर्ट कहती है कि पूरी दुनिया के युवाओं ती डिजिटल प्राथमिकताएं केवल डेटिंग ऐप तक सीमित नहीं हैं। ज्यादातर युवा इसे कामकाज के साथ ही एंटरटेनमेंट और जानकारी का साधन मानते हैं।
दरअसल परिवार, शादी और माता-पिता बनने के फैसले पर चर्चा को अक्सर यह मान लिया जाता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ऐसे आए हैं, कि इन्होंने शादी-विवाह जैसे रिश्तों के मायने ही बदल दिए हैं। लेकिन सर्वे रिपोर्ट इस धारणा को तोड़ती नजर आती है। रिश्तों के मामलों को लेकर युवाओं के व्यवहार कुछ जटिलता नजर आई है। लेकिन जीवनसाथी की तलाश का सबसे बड़ा माध्यम क्या है, फिलहाल ये पता होना अभी बाकी है।