
रायपुर@सरिता दुबे। Vanshika Jain Inspirational Story: सुबह से रायपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही के बीच वंशिका जैन अपने कर्तव्य में जुटी रहती हैं। टिकट देखना, कभी यात्री को सही जानकारी देना और कभी बिना टिकट यात्रा करने वालों को रोकना यह अब उनकी रोजमर्रा की जिम्मेदारी है। लेकिन स्टेशन पर टिकट जांचने वाली यह 23 वर्षीय युवती सिर्फ रेलवे कर्मचारी नहीं, बल्कि पॉवरलिफ्टिंग की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं। खेल के मैदान में अपनी ताकत का लोहा मनवा चुकी वंशिका अब रेलवे की ड्यूटी निभाने के साथ खेल में भी आगे बढ़ने की तैयारी कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की रहने वाली वंशिका को खेल में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में टीटी के पद पर नौकरी मिली है। उनका मानना है कि खेल में मेहनत करने वाले युवाओं के लिए बेहतर भविष्य के अवसर मौजूद हैं। सही मार्गदर्शन और लगातार अभ्यास से खिलाड़ी अपनी पहचान बना सकते हैं। खास बात यह है कि खेल कोटे से नौकरी मिलने के बाद खिलाड़ियों को नौकरी के साथ अपने खेल को जारी रखने का अवसर भी मिलता है।
वंशिका का खेल सफर आसान नहीं था। बचपन से ही परिवार ने उन्हें अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे खेलों के प्रति उनका रुझान बढ़ा। शरीर की बनावट और ताकत को देखते हुए उन्होंने पॉवरलिफ्टिंग को अपना खेल चुना। शुरुआत में परिवार को इसके लिए तैयार करना पड़ा। परिवार की सहमति मिलने के बाद रिश्तेदारों की बातें भी सुननी पड़ीं। कई लोगों ने लड़कियों के इस तरह के खेल में जाने पर सवाल उठाए, लेकिन वंशिका ने अपना लक्ष्य नहीं बदला।
इस पूरे सफर में उनके पिता सबसे बड़े मार्गदर्शक बने। उन्होंने बेटी का हौसला बढ़ाया और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया। वंशिका कहती हैं कि पिता ने उन्हें हमेशा यह भरोसा दिलाया कि अगर मेहनत सच्ची है तो मंजिल जरूर मिलेगी। इसी भरोसे के साथ वह आगे बढ़ती गईं और हर पदक के साथ उनका आत्मविश्वास मजबूत होता गया।
महज 23 साल की उम्र में वंशिका अब तक 26 पदक अपने नाम कर चुकी हैं। राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में उन्होंने 6 स्वर्ण पदक जीते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनके खाते में एक स्वर्ण और एक रजत पदक है। इसके अलावा उन्होंने ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में भी स्वर्ण पदक हासिल किया है।
हैवीवेट वर्ग में उन्होंने200 किलोग्राम वेटलिफ्ट, 275 किलोग्राम स्क्वाट और 137.5 किलोग्राम बेंच प्रेस में अपनी क्षमता साबित की है। खेल उपलब्धियों के आधार पर ही उन्हें रेलवे में नौकरी का अवसर मिला।
रेलवे में टीटी की जिम्मेदारी मिलने के बाद वंशिका के सामने अब दोहरी जिम्मेदारी है- एक तरफ यात्रियों की टिकट जांचना और रेलवे की व्यवस्था में अपनी भूमिका निभाना, तो दूसरी तरफ अपने खेल को बनाए रखना और नई प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी करना। वह मानती हैं कि खिलाड़ियों के लिए खेल कोटे से मिलने वाली नौकरी सिर्फ रोजगार का साधन नहीं, बल्कि खेल को जारी रखने का मजबूत आधार भी है।
वंशिका लड़कियों और महिलाओं से कहती हैं कि परिवार या समाज के विरोध के कारण अपने सपनों से पीछे नहीं हटना चाहिए। उनका कहना है कि शुरुआत में लोगों की बातें परेशान कर सकती हैं, लेकिन अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो वही विरोध करने वाले लोग एक दिन आपकी सफलता की तारीफ करते हैं। कोशिश करना कभी मत छोड़िए। एक बार हिम्मत करके आगे बढ़िए और अपनी मेहनत पर भरोसा रखिए।