दुनिया में अलग अलग मुल्कों के बीच कई वर्षों से लगातार संघर्ष जारी है। इसके चलते भारी नुकसान भी हो रहा है। एक ओर भारी तादाद में लोग मारे जा रहे हैं तो दूसरी ओर इससे अलग-अलग मुल्कों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। युद्ध के चलते दुनिया पीछे जा रही है। आइए पढ़ते हैं विस्तृत रिपोर्ट।
War Deaths : प्रथम विश्व युद्ध (1914-18) मानव इतिहास के सबसे घातक संघर्षों में से एक था, जिसमें 3.7 करोड़ (First World War Deaths Counts) से ज्यादा लोग मारे गए। प्रथम विश्व युद्ध की तुलना में द्वितीय विश्व युद्ध और अधिक घातक साबित हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) में 60 मिलियन से अधिक यानी 6 करोड़ (Second World War Deaths Counts)लोगों की जान गई थी। इस समय दुनिया में तीसरा विश्व युद्ध तो नहीं चल रहा लेकिन कई पड़ोसी देश आपस में उलझे हुए हैं और वह एक-दूसरे का अस्तित्व मिटाना चाहते हैं। इन युद्धों में जानमाल की हानि के अलावा आर्थिक नुकसान भी बहुत बड़े पैमाना पर होता है।
दुनिया में अलग-अलग देशों के बीच चल रही जंग के चलते पिछले 12 महीनों में 2.4 लाख लोग मारे जा चुके हैं। यह आंकड़ा रियल टाइम डेटा उपलब्ध कराने वाले वेबसाइट ACLED (Armed Conflict Location & Event Data Project) ने दिया है। वहीं गाजा और यूक्रेन के कारण 2023 से लेकर अबतक युद्ध में मरने वालों की संख्या 162,000 तक पहुंच गई।
हमास संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इजराइल-फिलिसतीन युद्ध में वर्ष 2023 से लेकर अबतक 61,000 से अधिक लोग मारे गए हैं। इजराइल और फिलिस्तीन का विवाद 1948 से ही चलता आ रहा है। हालांकि वर्ष 2023 के बाद इन दो देशों के बीच हालात बेकाबू हो चुके हैं। सीएसआईएस की रिपोर्ट के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध में रूसी सेना के लगभग 250,000 सैनिक मारे गए हैं और यूक्रेन के 60,000 से 100,000 सैनिक मारे जा चुके हैं।
प्रथम विश्व युद्ध में बड़ी संख्या में लोगों की मौत सिर्फ युद्ध में नहीं, बल्कि उसके बाद फैली बीमारियों से हुई। युद्ध के बाद फैली बीमारियों के चलते करीब 20 लाख लोगों की मौत होने का अनुमान लगाया गया। युद्ध के दौरान 60 लाख लोग लापता हो गए और उन्हें मृत मान लिया गया।
यह अनुमान अमेरिका स्थित सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के हालिया अध्ययन से मेल खाता है, जिसमें रूसी सेना के लगभग 250,000 सैनिक मारे गए हैं और घायलों सहित कुल हताहतों की संख्या 950,000 से अधिक है। यूक्रेन को भी भारी नुकसान हुआ है, रूस के साथ जारी युद्ध में यूक्रेन के 60,000 से 100,000 सैनिक मारे जा चुके हैं और कुल हताहतों की संख्या लगभग 400,000 है।
हालांकि युद्ध में हताहतों की सटीक संख्या की पुष्टि करना बेहद मुश्किल है, फिर भी स्वतंत्र रूसी समाचार एजेंसी मीडियाज़ोना ने आधिकारिक रिकॉर्ड, सोशल मीडिया पर प्रकाशित शोक संदेशों और कब्रों की तस्वीरों का उपयोग करते हुए मारे गए 111,000 से अधिक रूसी सैन्य कर्मियों के नाम पहचाने हैं। एजेंसी का मानना है कि वास्तविक मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक है।
वर्ष 1939 से 1945 तक चले दूसरे विश्व युद्ध में आर्थिक नुकसान को लेकर इतिहासकार डॉ. हेलेन फ्राई बताते हैं, उस समय हुए आर्थिक नुकसान का अंदाजा आज के हिसाब से करें तो करीब 21 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 1,764 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। हालांकि तीसरे विश्व युद्ध में इससे 1000 गुणा ज्यादा नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। अगर 1000 गुणा ज्यादा नुकसान की बात करें तो तीसरे विश्व युद्ध में कुल नुकसान करीब 17,64,000 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है।
सूडान में अप्रैल 2023 से सूडानी सेना (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच हिंसक गृहयुद्ध जारी है। दोनों की देश की सत्ता पर नियंत्रण हासिल करने के लिए लड़ रहे हैं। इसके चलते दुनिया का सबसे बड़ा विस्थापन संकट पैदा हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक गृहयुद्ध के चलते यहां 2023 से अब तक कम से कम 150,000 लोग मारे जा चुके हैं। अबतक हज़ारों लोगों की मौत हो चुकी है और 15 मिलियन से ज़्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है। सूडान दुनिया का सबसे ज़्यादा बेघर होने वाले लोगों का देश बन चुका है। यहां एक अनुमान के अनुसार 30 मिलियन से ज़्यादा लोगों को मानवीय मदद की ज़रूरत है। यहां 26 मिलियन से ज़्यादा लोग भूख से जूझ रहे हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच लगातार हो रही बमबारी और मिसाइल हमलों और ड्रोन हवाई हमलों के बीच गूंजते सेना की गाड़ियों के सायरन ने लाखों स्कूली बच्चों के लिए रोजमर्रा की खौफ का सामान बन चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) के अनुसार, यूक्रेन में वर्ष 2025 में 340 शैक्षणिक केन्द्र या तो ध्वस्त हो चुके हैं या फिर उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया गया है। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार साल से ज्यादा समय से युद्ध चल रहा है और यह अनुमान लगाया जा रहा है कि 46 लाख से अधिक बच्चों को शिक्षा हासिल करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
यूएन एजेंसी के अनुसार, पिछले चार वर्षों में अब तक 2,800 से अधिक स्कूल या तो ध्वस्त या फिर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इसके चलते करीब 10 लाख बच्चे स्कूल जाने की सुविधा से वंचित होकर ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मजबूर हुए हैं। यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के अलग अलग इलाकों में युद्ध के चलते 10 हजार से अधिक छात्र मारे गए।
संयुक्त राष्ट्र की 2024 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि बच्चों के अधिकारों के हनन के 41 हज़ार 370 मामले दर्ज हुए। इसी रिपोर्ट में इस अवधि में यह देखा गया कि स्कूलों पर हमले 44 प्रतिशत बढ़े और बच्चियों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं 34 प्रतिशत तक बढ़ गईं हैं।
- दुनिया में फ़िलिस्तीन, मेक्सिको और यूक्रेन दुनिया के सबसे खतरनाक स्थान बन चुके हैं।
- म्यांमार दुनिया का सबसे खंडित संघर्ष है, जहां 1,200 से अधिक अलग-अलग सशस्त्र समूह अशांति या विद्रोह में शामिल हैं।
- पिछले 12 महीनों में पाकिस्तान में नागरिकों के लिए खतरा बढ़ गया है और क्षेत्रीय विद्रोहों में वृद्धि और भारत के साथ थोड़े समय के लिए लेकिन तीव्र संघर्ष के कारण राजनीतिक हिंसा से होने वाली मौतों में वृद्धि हुई है।
- हैती में राजनीतिक हिंसा के परिणामस्वरूप 4,500 से अधिक हैतीवासी मारे गए।
- इक्वाडोर में 2024 की तुलना में राजनीतिक हिंसा के परिणामस्वरूप 1,000 से अधिक लोग मारे गए हैं।
स्रोत: ACLED