Women leadership: महिला आरक्षण बिल आखिरकार कागजों में सिमट कर रह गया। विपक्ष के विरोध यानी सियासी सहमति ने इसका रास्ता अटका दिया और परिणाम ये हुआ कि भारतीय राजनीति में महिलाओं की हिस्सेदारी का सपना फिलहाल अधूरा ही रह गया। इस बहस के बीच भी कहना होगा आरक्षण न हो न सही… लेकिन जब-जब महिलाओं ने सत्ता की बागडोर संभाली है, उनके नेतृत्व ने एक नई और ऐसी परिभाषाएं गढ़ी हैं, जो दुनिया भर के लिए मिसाल बनी हैं। गौरव की बात ये है कि दुनिया के ऐसे देशों में भारत का नाम भी बड़ी शान से लिया जाता है। क्योंकि यहां भी महिला राजनेताओं की भूमिका वाले नेतृत्व ने ऐसे फैसले लिए जिन्होंने हर किसी को चौंका दिया और उनका असर भारतीय समाज और शासन दोनों को नई दिशा दे गया।
patrika.com की खास पेशकश में पढ़ें संजना कुमार की विशेष स्टोरी...मौका मिला तो महिलाओं ने इतिहास पढ़ा ही नहीं, बल्कि इतिहास रचा भी है, ऐतिहासिक कहानी बनकर पन्नों में सिमटी नहीं भविष्य भी गढ़ा है…
भारत की वो महिलाएं जिन्होंने अपने सख्त फैसलों से हर किसी को चौंका कर रख दिया। वक्त की जरूरत और नजाकत को देखते हुए उन्होंने निर्णय लेने में जरा भी देर नहीं की और जहां भी मौका मिला अपनी काबिलियत के ऐसे प्रमाण दिए कि शक की कोई गुंजाइश ही नहीं बची। अपनी योग्यता के ऐसे मापदंड बदले कि समाज को सोचने को मजबूर कर दिया कि अब महिलाओं को आगे लाना होगा…
Indira Gandhi(photo:patrika creative)
देश की प्रधानमंत्री और आयरन लेडी के रूप में जानी गईं इंदिरा गांधी को उनके कठोर फैसलों और मजबूत इरादों के लिए लोग आज भी याद करते हैं। कई ऐतिहासिक कदम जो दुनिया के लिए नजीर बन गए।
- 19 जुलाई, 1969 को इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक अध्यादेश पारित करके देश के 14 निजी बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया। आर्थिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया इंदिरा गांधी का यह फैसला महत्वपूर्ण फैसलों में गिना गया। इन 14 बैंकों में देश का करीब 70 फीसदी धन जमा था। अध्यादेश पारित होने के बाद इन बैंकों का मालिकाना हक सरकार के पास चला गया।
- 1971 में गांधी ने पाकिस्तान से युद्ध के बाद उसके दो टुकड़े करवा दिए। इस युद्ध में पाकिस्तान की शर्मनाक हार हुई और उसके 90,000 सैनिकों को भारत ने युद्धबंदी बना लिया था। तब अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें दुर्गा कहकर पुकारा था।
- इंदिरा गांधी के जीवन का एक और सबसे अहम फैसला 1974 में पोखरण में परमाणु परीक्षण का था। इस फैसले ने पूरे विश्व को चौंका कर रख दिया था। क्योंकि अब भारत परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया था।
- इंदिरा का राजभत्ता समाप्त करने का फैसला भी महत्वपूर्ण था। क्योंकि भारत में अपनी रियासतों का विलय करने वाले राजपरिवारों को एक निश्चित रकम देने की शुरुआत की गई थी। इस राशि को राजभत्ता या प्रिवी पर्स कहा जाता था।
- इंदिरा गांधी ने साल 1971 में संविधान में संशोधन करके राजभत्ते की इस प्रथा को खत्म किया। इसके अलावा इंदिरा ने अमेरिका के साथ मिलकर हरित क्रांति पर काम किया। देश में बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके किसानों को कम ब्याज दर पर कर्ज मुहैया कराए और खेती के सही तरीके तथा उसके जुड़ी कई अन्य जानकारियां किसानों को मुहैया कराई गई।
- पाक विभाजन के बाद से इंदिरा ने देश की गरीबी को हटाने का निश्चय किया। इसके लिए उन्होंने बीस सूत्रीय कार्यक्रम को जारी किया।
Sushma Swaraj(photo:patrika creative)
सुषमा स्वराज, एक ऐसा नाम जो भारत की राजनीति में सबसे लोकप्रिय रहा। एक लोकप्रिय नेता से इतर सुषमा की पहचान एक सक्रिय विदेश मंत्री की भी रही। 2014 से 2019 तक विदेश मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान कई अहम फैसले लिए गए। उनके साहसिक कदम जिन्होंने भारत की विदेश नीति और कूटनीति को एक नई दिशा दी। वे बीजेपी से सम्मानित ऐसी नेताओं में शामिल थीं, जिनकी प्रशासनिक क्षमता का लाभ देश को मिला।
- वे पहली ऐसी महिला राजनेता हैं, जिन्होंने दिखा दिया कि सोशल मीडिया कैसे मदद का बड़ा प्लेटफॉर्म हो सकता है। एक्स पर प्रॉब्लम शेयर करने वालों को कैसे तुरंत हेल्प मिल सकती है। उनके इस हेल्पिंग नेचर और अंदाज ने उन्हें करोड़ों लोगों के बीच लोकप्रियता दिलाई।
- उनके अहम फैसलों में कुलभूषण जाधव मामला शामिल है। जो उनके साहस से भरे व्यक्तित्व का परिचय देता है। पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव का मामला उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) पहुंचा दिया। इससे पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा।
- यमन संकट के दौरान उन्होंने 4,640 से ज्यादा भारतीयों को और 960 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन राहत को सफलता पूर्वक अंजाम दिया।
- ट्विटर को कूटनीति का जरिया बनाने वाली सुषमा स्वराज ने प्रवासी भारतीयो की मदद के रास्ते खोल दिए। दुनिया भर में मुसीबत में फंसे भारतीयों की मदद के लिए वे 21/7 उपलब्ध रहने वाली राजनेता बनीं। इनके कार्यकाल में विदेश मंत्रालय को आमजन के लिए सुलभ बन गया था।
- 2017 में चीन और बारत के बीच चले डोकलाम गतिरोध के दौरान उन्होंने कूटनीतिक बातचीत के जरिए तनाव को कम करने ही नहीं बल्कि उसे सुलझाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी।
J Jayalalithaa (photo:patrika creative)
AIADMK की प्रमुख रहीं जे जयललिता एक राजनेता से पहले एक्टर थीं। बाद में वे तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। उनका नाम तमिलनाडु की सबसे प्रभावशाली महिलाओं में शामिल है। तीन दशक तक राजनीतिक करियर संभालकर रखने वाली जयललिता से आम लोग इस तरह जुड़े थे कि उन्हें अम्मा कहकर बुलाते थे।
- 2013 में उनकी अम्मा कैंटीन योजना के तहत गरीबों जरूरतमंदों को बेहद कम दामों पर गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध करवाया गया। कहा जाता है कि उनके कार्यकाल में कोई भूखा नहीं सोया।
- कन्या भ्रूण हत्या और शिशु हत्या को रोकने के लिए उन्होंने अपने राज्य में अनूठी पहल शुरू की। इसके तहत अपने नवजात शिशुओं को वे राज्य को सौंप सकते हैं। ताकि वे जीवित रहें और सुरक्षित भी।
- महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी उन्होंने अहम कदम उठाए। जयललिता ने तमिलनाडु में महिला पुलिस स्टेशनों की स्थापना की और पुलिस बल में महिलाओं की भीगीरदारी को व्यापक स्तर पर बढ़ावा भी दिया।
- आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए विवाह सहायता योजना (मुथुलक्ष्मी रेड्डी मेमोरियल मैरिज असिस्टेंस) के तहत वित्तीय सहायता दीं।
- उनके अम्मा वॉटर और नमक योजना के साथ ही गुटखा और लॉटरी पर प्रतिबंध के फैसले भी अहम माने जाते हैं। क्योंकि दोनों ही परिवारों को या तो उजाड़ रहे थे या बर्बाद कर रहे थे।
pratibha patil (photo:patrika creative)
देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में प्रतिभा पाटिल का नाम भी भारतीय राजनीति में दर्ज है। इनके कार्यकाल में इनके फैसलों ने स्पष्ट किया कि एक राजनेता का संवेदनशील होना उसका सबसे बड़ा गुण है। लेकिन फैसलों में सख्ती इससे भी बड़ी जरूरत है।
- प्रतिभा पाटिल ने अपने 5 साल के कार्यकाल में दया याचिकाओं का निपटारा करने में बड़ा रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने 30 से अधिक मौत की सजा को उम्रकैद में बदला। उनकी संवेदनशीलता का परिचय देने वाले इन मामलों के बीच एक मामला उनकी सख्ती भी दिखाता है कि उन्होंने ऐसी 5 दया याचिकाओं को खारिज भी किया, ये दया याचिकाएं उनकी थीं जा राजीव गांधी के हत्यारे थे।
- महिला सशक्तिकरण को अनिवार्य और उसका समर्थन करने वाली देश की पहली राष्ट्रपति के रूप में प्रतिभा पाटिल ने महिला शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को अस्वीकार्य करार देते हुए महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) का पुरजोर समर्थन किया और इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया।
- प्रतिभा पाटिल ने राष्ट्रपति भवन परिसर में 'रोशनी' नामक परियोजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण प्रबंधन और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से रोजगार पैदा करना था।
- उन्होंने यूपीए (UPA) सरकार के कार्यकाल में राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाली और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों में निर्णय लेकर खुद को साबित किया।
- इनके अलावा प्रतिभा पाटिल विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला राजनेता भी रहीं। उन्होंने इन मंचों पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दों पर खुलकर बात की।
Nirmala Sitaraman (photo:patrika creative)
- पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण ने 1 अप्रैल, 2020 से बैंकों के व्यापक एकीकरण को प्रभावी करते हुए 10 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का चार बैंकों में विलय किया।
- उन्होंने दिसंबर 2023 में लोकसभा में सीजीएसटी (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2023 पेश किया।
- करदाताओं को बड़ी राहत देते हुए उन्होंने कराधान व्यवस्था को सरल बनाने के लिए, केंद्रीय बजट 2023 के दौरान आयकर स्लैब में बदलाव किया गया।
- कोविड-19 महामारी ने जब देश में आर्थिक चिंताएं पैदा कीं, तो राहत पैकेज के एक घटक के रूप में, नकदी की आवश्यकता वाले MSME की सहायता के लिए आपातकालीन ऋण गारंटी योजना (ECLGS) की शुरुआत की।
- 1 अप्रैल 2022 से, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट 2022 पेश करते समय घोषित आयकर नियमों में कुछ बदलाव भी लागू हो गए। इनमें से एक था क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल संपत्तियों पर टैक्स। निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2022 में घोषणा की थी कि, 'किसी भी आभासी डिजिटल संपत्ति के हस्तांतरण से होने वाली किसी भी आय पर 30 प्रतिशत की दर से कर लगाया जाएगा।'
- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 2024 के बजट भाषण में घोषणा की कि महिलाओं और लड़कियों के लिए एक नई छोटी बचत योजना शुरू की जाएगी। जो महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने वाली घोषणा थी।
- इनके कार्यकाल में ही एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2023 अगस्त 2023 में संसद द्वारा पारित किया गया था। संशोधनों में ऑफशोर संस्थाओं द्वारा ऑनलाइन मनी गेमिंग पर जीएसटी लगाने का प्रावधान किया गया है।
- केंद्रीय वित्त मंत्री ने अपने छठे बजट भाषण में भारत के 'तकनीक-प्रेमी युवाओं' के लिए 1 लाख करोड़ रुपए के कोष की घोषणा की थी। उन्होंने आने वाले वर्षों को तकनीक-प्रेमी युवाओं के लिए 'स्वर्ण युग' के रूप में देखा। इस दौरान उन्होंने स्टार्टअप्स का समर्थन करते हुए कहा था कि, 'हमें ऐसे कार्यक्रम बनाने की आवश्यकता है जो, हमारे युवाओं और प्रौद्योगिकी की शक्तियों को संयोजित करें।'
Mamta Banerjee (photo: patrika creative)
ममता बनर्जी राजनीति का ऐसा चेहरा है जो जमीनी संघर्षों से उभरकर निकला। महिला सशक्तिकरण की दिशा में उन्होंने अपने स्तर पर कई योजनाएं शुरू कीं।
महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित इनकी योजनाओं में 'कन्याश्री' महिला शिक्षा के लिए, तो 'लक्ष्मी भंडार' महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने वाली ऐसी महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं, जो देशभर के लिए प्रेरणा बन गईं, खास तौर पर राजनीति पार्टियों के लिए गेम चेंजर साबित हुईं।
इन योजनाओं ने ममता को आमजन के इतना करीब पहुंचा दिया कि आज पश्चिमी बंगाल की ये कद्दावर महिला राजनेता दीदी के नाम से जानी जाती है।
वो विदेशी चेहरे जो बन गए मिसाल
एंजला मर्केल, जर्मनी (Anjela Markel- Germany )
एंजला 16 साल तक जर्मनी की चांसलर रहीं। उन्होंने इन 16 सालों में खुद को यूरोप की सबसे प्रभावशाली नेताओं में स्थापित कर दिया। उनके नाम की मिसालें दी जाती हैं कि कैसे यूरोप के आर्थिक संकट में उन्होंने अपने अहम और ठोस फैसलों से अकेल जर्मनी को ही नहीं बल्कि पूरे यूरोप को स्थिरता दी।
जेसिंडा अर्डर्न (Jacinda Ardern- New Zealand)
Jacinda Ardern New Zealand (photo: patrika creative)
Jacinda Ardern का नाम आते ही लोग उनकी संवेदनशीलता और प्रभावी नेतृत्व को याद करते हैं। कोविड-19 और क्राइस्ट चर्च पर हुए आतंकी हमले में जब हर किसी की आंख में आंसू और दिलों में अपनों को खोने के जख्म थे, तब उन्होंने मानवता की मिसालें कायम कीं। उनके निर्णयों ने हालात ऐसे संभाले कि वे दुनिया भर के लिए प्रेरणा बन गए।
मार्ग्रेट थैचर( Margaret Thatcher )
Margaret Thatcher, Britain (photo:patrika creative)
दुनिया भर में आइरन लेडी के नाम से मशहूर हैं ब्रिटेन की पहली महिला प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर। अपने स्पष्ट फैसलों और सख्त रवैये से उन्होंने देश को एक नई दिशा दी। जिसने राजनीतिक ही नहीं बल्कि देश के आर्थिक स्तर को भी बदलकर रख दिया।
कमला हैरिस (Kamala Harris: America)
Kamala Harris, America(photo:patrika creative)
अमेरिका की पहली पहली अश्वेत और पहली भारतीय मूल की महिला जो उपराष्ट्रपति बनीं। इन्हें दुनिया भर में विविधता, समावेश का प्रतीक माना जाता है।