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World Puppetry Day 2026: एआई के संग नई उड़ान भर रही कठपुतली कला, सास के बाद बहू ने संभाली विरासत, जानें कैसे

World Puppetry Day: डिजिटल युग में जहां मनोरंजन के साधन मोबाइल स्क्रीन तक सिमटते जा रहे हैं, वहीं पारंपरिक लोककलाएं अब भी अपनी जीवंत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।

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Mar 21, 2026
सास के बाद बहू चला रही शो (फोटो सोर्स- पत्रिका)

ताबीर हुसैन. World Puppetry Day 2026: डिजिटल युग में जहां मनोरंजन के साधन मोबाइल स्क्रीन तक सिमटते जा रहे हैं, वहीं पारंपरिक लोककलाएं अब भी अपनी जीवंत उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। पपेट डे के अवसर पर कठपुतली शो संचालिका किरण मोइत्रा ने कहा कि तकनीक चाहे कितनी भी उन्नत हो जाए कठपुतलियों का आकर्षण कभी समाप्त नहीं होगा।

बच्चे, युवा, बुजुर्ग हर वर्ग के लिए यह कला आज भी मनोरंजन के साथ-साथ सीख का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि कठपुतली केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक जागरुकता, शिक्षा के अधिकार और विभिन्न सरकारी अभियानों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त जरिया बन सकती है यदि इसे उचित मंच और समर्थन मिले।

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सरकारी सहयोग से मिल सकती है नई पहचान

किरण बताती हैं, पिछले 25-26 वर्ष से उनका परिवार इस कला को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ा रहा है, लेकिन नई पीढ़ी का इसमें कॅरियर के रूप में कम रुचि लेना चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि उनकी सास नीलिमा मोइत्रा इस कला से जुड़ी थीं और उनके निधन के बाद भी वे बिना किसी सरकारी सहायता के इसे आगे बढ़ा रही हैं।

सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर नए प्रयोग किए हैं और कई नई कठपुतलियां तैयार की हैं, जिनमें प्रसिद्ध व्यक्तित्वों के चेहरे भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की ओर से सहयोग, अनुदान या योजनाएं मिलें तो इस लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सकती है।

इसलिए मनाया जाता है दिवस

पपेट डे पारंपरिक कठपुतली कला के संरक्षण, संवर्धन और इसके महत्व को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य नई पीढ़ी को इस लोककला से जोडऩा और कलाकारों को प्रोत्साहित करना है, ताकि यह विरासत आने वाली पीढिय़ों तक सुरक्षित रह सके।

विश्व कठपुतली दिवस का उद्देश्य

विश्व कठपुतली दिवस का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कठपुतली कला को संरक्षित करना और इससे जुड़े कलाकारों को सम्मान देना है। हर वर्ष 21 मार्च को मनाया जाने वाला यह दिवस लोगों को इस प्राचीन लोक कला के महत्व से परिचित कराता है। इसकी शुरुआत 2003 में एक अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा की गई थी, जो विश्वभर में कठपुतली कला के संरक्षण और विकास के लिए कार्यरत है।

यह दिवस कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करता है और नई पीढ़ी को इस कला से जोड़ने का प्रयास करता है। साथ ही, यह सांस्कृतिक विरासत को बचाने और उसे आधुनिक समय के अनुरूप ढालने की प्रेरणा देता है। कठपुतली न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश देने का प्रभावी माध्यम भी है।

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Published on:
21 Mar 2026 03:47 pm
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