Patrika Special News

बारिश में जंगल-झरनों की ओर बढ़ा युवाओं का रुझान, छत्तीसगढ़ की साइकोलॉजिस्ट डॉ. शकुंतला दुल्हानी बोलीं- प्रकृति से दूर होता है तनाव

Weekend Getaways Chhattisgarh: राजधानी रायपुर समेत प्रदेशभर के युवा और महिलाएं वीकेंड पर नेचर ट्रेल, रेन वॉक और ट्रेकिंग को अपनी पहली पसंद बना रहे हैं। साइकोलॉजिस्ट डॉ. शकुंतला दुल्हानी का कहना है कि प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना तनाव कम करने और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने का आसान व प्रभावी तरीका है।
3 min read
Jul 10, 2026
Outdoor Activities in Monsoon
जंगल-झरनों की ओर बढ़ा युवाओं का रुझान (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Monsoon Nature Trail: प्रदेश में मानसून ने पूरी तरह रफ्तार पकड़ ली है। लगातार हो रही बारिश से जहां जंगल, पहाड़ और झरने जीवंत हो उठे हैं, वहीं राजधानी रायपुर समेत आसपास के क्षेत्रों में युवाओं और महिलाओं के बीच नेचर ट्रेल, रेन वॉक और वीकेंड ट्रेकिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। पूरे सप्ताह ऑफिस, पढ़ाई और डिजिटल स्क्रीन पर व्यस्त रहने वाले लोग अब सप्ताहांत में प्रकृति की गोद में कुछ सुकून भरे पल बिताना पसंद कर रहे हैं।

राजधानी से कुछ ही दूरी पर स्थित सेंध लेक (नया रायपुर), चिंगरा पगार वॉटरफॉल, नरहरा वॉटरफॉल, घटारानी वॉटरफॉल, सिरपुर के जंगलों और चित्रकोट की ओर जाने वाले प्राकृतिक रूट इन दिनों लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं। सुबह होते ही यहां युवाओं के समूह, परिवार और महिला ग्रुप पहुंचने लगते हैं। हरियाली, पहाड़ों से गिरते झरने, ठंडी हवाएं और बारिश का सुहाना मौसम लोगों को शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय बिताने का अवसर दे रहा है।

रेन वॉक और सनराइज ट्रेक बन रहे नया लाइफस्टाइल

इस मानसून में रेन वॉक, सनराइज ट्रेक, बर्ड वॉचिंग, फोटोग्राफी, आउटडोर योगा और कैंपिंग जैसी गतिविधियां युवाओं के लाइफस्टाइल का हिस्सा बनती जा रही हैं। सुबह-सुबह हल्की बारिश के बीच जंगलों की पगडंडियों पर ट्रेकिंग करना और झील किनारे बैठकर प्रकृति का आनंद लेना लोगों को आकर्षित कर रहा है। सोशल मीडिया ने भी इस ट्रेंड को नई रफ्तार दी है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर बारिश के बीच शूट की गई सिनेमैटिक रील्स, ड्रोन वीडियो और नेचर फोटोग्राफी लगातार वायरल हो रही हैं। यही वजह है कि अब अधिक से अधिक युवा प्राकृतिक स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं।

प्रकृति बनी तनाव दूर करने का आसान तरीका

रायपुर की साइकोलॉजिस्ट डॉ. शकुंतला दुल्हानी के अनुसार, प्रकृति के बीच बिताया गया समय मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बेहद लाभकारी होता है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में हरियाली के बीच कुछ घंटे बिताने से तनाव कम होता है, मन शांत रहता है और लगातार मोबाइल व लैपटॉप की स्क्रीन देखने से मिलने वाली मानसिक थकान भी दूर होती है।

उन्होंने बताया कि आजकल इसे 'इकोथैरेपी' (Eco Therapy) के रूप में भी जाना जाता है। वैज्ञानिक शोधों में भी यह सामने आया है कि प्राकृतिक वातावरण में समय बिताने से चिंता, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं में कमी आती है तथा व्यक्ति खुद को अधिक ऊर्जावान और सकारात्मक महसूस करता है।

बदल रही है वीकेंड की परिभाषा

कुछ साल पहले तक वीकेंड का मतलब मॉल, कैफे, शॉपिंग या फिल्म देखना होता था, लेकिन अब युवाओं की पसंद तेजी से बदल रही है। अब लोग छुट्टी के दिन शहर की भीड़-भाड़ से दूर हरियाली के बीच समय बिताना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

सुबह की ट्रेकिंग, जंगलों में वॉक, झील किनारे बैठकर सूर्योदय देखना और परिवार या दोस्तों के साथ प्राकृतिक स्थलों पर पिकनिक मनाना अब नए दौर का वीकेंड कल्चर बनता जा रहा है। राजधानी के कई फिटनेस और एडवेंचर ग्रुप हर रविवार नेचर ट्रेल, रेन वॉक और ट्रेकिंग का आयोजन भी कर रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं।

महिलाओं में भी बढ़ा आउटडोर ट्रेंड

नेचर ट्रेल का यह ट्रेंड अब केवल युवाओं तक सीमित नहीं है। महिलाओं में भी आउटडोर एक्टिविटी को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। कई महिला ग्रुप हर सप्ताहांत सुरक्षित स्थानों पर ट्रेकिंग, रेन वॉक, फोटोग्राफी और पिकनिक की योजना बना रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि प्रकृति के बीच कुछ घंटे बिताने से मानसिक ताजगी मिलती है, रोजमर्रा की भागदौड़ से राहत मिलती है और परिवार व दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने का अवसर भी मिलता है।

स्वास्थ्य और फिटनेस को भी मिल रहा बढ़ावा

विशेषज्ञों का मानना है कि नेचर ट्रेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। जंगलों और पहाड़ी रास्तों पर पैदल चलने से शरीर की एक्सरसाइज होती है, फेफड़ों को स्वच्छ हवा मिलती है और मानसिक तनाव भी कम होता है। यही वजह है कि फिटनेस के प्रति जागरूक लोग अब जिम के साथ-साथ नेचर वॉक और ट्रेकिंग को भी अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं।

सुरक्षा का रखें विशेष ध्यान

मानसून में प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती जरूर बढ़ जाती है, लेकिन इस दौरान सावधानी बरतना भी बेहद जरूरी है। तेज बहाव वाले झरनों और नदियों के पास जाने से बचें, मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें, फिसलन वाले रास्तों पर सतर्क रहें और प्लास्टिक या अन्य कचरा प्राकृतिक स्थलों पर न छोड़ें। सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से प्रकृति का आनंद लेना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

Updated on:
10 Jul 2026 01:30 pm
Published on:
10 Jul 2026 01:30 pm