
व्यस्त वर्किंग एडल्ट्स के लिए 900 सेकंड (15 मिनट) की एक्सरसाइज एक व्यावहारिक और वैज्ञानिक रूप से समर्थित विकल्प है। आइए देखें कि इस बारे में असल में कौन-सा शोध मौजूद है और उससे क्या सीख मिलती है।
यूरोपियन हार्ट जर्नल में अक्टूबर 2022 में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ने लगभग 72,000 वयस्कों (जिन्हें अध्ययन शुरू होने पर हृदय रोग या कैंसर नहीं था) पर रिस्ट एक्टिविटी ट्रैकर से एक हफ्ते तक नज़र रखी। सात साल की फॉलो-अप अवधि में पाया गया कि जिन लोगों ने हफ्ते भर में सिर्फ़ 15 मिनट तीव्र (vigorous) गतिविधि की, उनमें किसी भी कारण से मृत्यु का जोखिम लगभग 18% कम था - भले ही यह गतिविधि पूरे हफ्ते में छोटे-छोटे हिस्सों में बंटी हो। जितनी अधिक तीव्र गतिविधि (लगभग 50 मिनट प्रति सप्ताह तक), उतना अधिक लाभ देखा गया, हालांकि सबसे बड़ी छलांग शुरुआती मिनटों में ही मिलती है।
यानी अगर आप हफ्ते में सीढ़ियां तेज़ी से चढ़ना, तेज़ चलना या छोटे-छोटे तीव्र बर्स्ट भी जोड़ लें, तो यह शून्य गतिविधि से काफ़ी बेहतर है।
हाल के वर्षों में सबसे उल्लेखनीय शोध दौड़ने की बजाय तेज़ चलने पर हुआ है। 2025 में हुए एक बड़े अध्ययन में लगभग 80,000 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें पाया गया कि रोज़ाना सिर्फ़ 15 मिनट तेज़ गति से चलना - भले ही यह "एक्सरसाइज" जैसा न लगे - कुल मृत्यु दर में लगभग 20% की कमी से जुड़ा था, विशेष रूप से हृदय संबंधी बीमारियों से होने वाली मौतों में। यह लाभ लोगों की अन्य शारीरिक गतिविधि के स्तर से स्वतंत्र था।
ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और ब्रिटेन के 73 कंपनियों के 11,575 कर्मचारियों पर हुए एक अध्ययन ("15 Minute Challenge") में पाया गया कि छह हफ्तों तक रोज़ाना 15 मिनट की शारीरिक गतिविधि से नींद की गुणवत्ता, मूड, ऊर्जा स्तर और समग्र स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ। हालांकि, तनाव में कमी का दावा उतना व्यापक नहीं था जितना अक्सर बताया जाता है - इस अध्ययन में केवल 42% प्रतिभागियों ने ही अपने तनाव में कमी महसूस की। तो कार्यस्थल पर छोटी एक्सरसाइज मूड और ऊर्जा के लिए फ़ायदेमंद है, लेकिन तनाव पर इसका असर सबके लिए एक-जैसा नहीं होता।
ये तरीके व्यायाम विज्ञान में स्थापित और व्यापक रूप से अनुशंसित हैं, भले ही किसी एक विशेष अध्ययन का हवाला हर बार न दिया जा सके:
व्यस्त जीवनशैली में भी थोड़े समय की नियमित गतिविधि - चाहे वह हफ्ते में बंटी हुई 15 मिनट की तीव्र एक्सरसाइज हो, रोज़ाना तेज़ चलना हो, या कार्यस्थल पर छोटा वर्कआउट ब्रेक - स्वास्थ्य में मापने योग्य सुधार ला सकती है। हालांकि हर दावे के पीछे शोध की गुणवत्ता और सीमाएं अलग होती हैं, इसलिए किसी नए फिटनेस रूटीन को अपनाने से पहले अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर या फिटनेस विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा।