
पाकिस्तान में क्वेटा के पास सोरंग कोयला क्षेत्र की दो कोयला खदानों से बचाव दल ने रातभर चले अभियान में 32 शव बरामद किए। वहीं, दो अन्य खनिकों की तलाश शुक्रवार को भी जारी रही। यह हादसा गुरुवार को क्वेटा से लगभग 30 किलोमीटर उत्तर-पूर्व स्थित सोरंग कोयला क्षेत्र की एक निजी कोयला खदान में हुआ। मीथेन गैस विस्फोट के बाद खदान में आग लग गई, जिससे खदान का एक हिस्सा ढह गया। विस्फोट का असर पास की एक अन्य कोयला खदान पर भी पड़ा। मृतकों के शव और घायलों को निकालने का काम जारी है। दुनिया के अलग अलग मुल्कों में खदानों में हर साल कई लोगों की जान चली जाती है। इन देशों में भारत और चीन शीर्ष देशों में शामिल हैं।
खनन उद्योग में काम करना आज भी दुनिया के सबसे खतरनाक पेशों में से एक है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के अनुसार, खनन क्षेत्र में काम करने वाले लोग वैश्विक कार्य क्षमता का लगभग 1% हैं, लेकिन यह क्षेत्र वैश्विक कार्य-संबंधित मौतों का लगभग 8% हिस्सा बनाता है। यह अनुपात बताता है कि खनन में जोखिम बहुत अधिक है।
सबसे खतरनाक खदानें: अंडरग्राउंड (भूमिगत) खदानें, विशेषकर धातु और गैर-धातु खदानें, सबसे खतरनाक मानी जाती हैं। अमेरिकी डेटा के अनुसार, भूमिगत धातु/गैर-धातु खदानों में मृत्यु दर औसत से अधिक थी। भूमिगत कोयला खदानों में आग, विस्फोट और छत गिरने जैसी घटनाएं सबसे अधिक जानलेवा होती हैं।
पिछले 5 वर्षों में खदानों में हुए हादसों में सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि, खदान हादसों में मौत के सटीक वार्षिक आंकड़े हर देश के लिए उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कुछ विश्वसनीय स्रोतों से हमें अहम जानकारी मिली है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले 5 वर्षों में शीर्ष पांच देशों में चीन, भारत, अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।
चीन- इस देश में कोयला खदानों में मौतों की संख्या सबसे अधिक है। हाल के वर्षों में सुरक्षा उपायों के बावजूद, मौतों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है।
भारत- 2021 में कोयला खदानों में 37 मौतें हुईं।
अमेरिका- 2021 में 29 मौतें दर्ज की गईं।
दक्षिण अफ्रीका- 2021 में 60 मौतें हुईं।
ऑस्ट्रेलिया- 2021 में 3 मौतें हुईं।
खदानों हादसों में हुई मौत के आंकड़े बताते हैं कि खनन उद्योग में सुरक्षा सुधार की कितनी आवश्यकता है। भूमिगत खदानों में सुरक्षा उपायों जैसे बेहतर वेंटिलेशन, छत और दीवारों की मजबूती, मशीनरी की सुरक्षित संचालन प्रणाली, और नियमित प्रशिक्षण बेहद जरूरी हैं। विशेष रूप से चीन और भारत जैसे देशों में, जहां खनन का पैमाना बहुत बड़ा है, वहां छोटे और अवैध खदानों में मौतों की संख्या और भी अधिक हो सकती है, जो आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं होती। यह एक गंभीर समस्या है जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। लेकिन, इस समास्या में सुधार संभव है। सही नीतियों, तकनीकी उपायों और निगरानी से यह जोखिम काफी कम किया जा सकता है।