
Mental Health Tips: मानिसक तनाव कम करने के टिप्स। (Image: AI)
Stress Relief Tips: वर्तमान में तनाव ज्यादातर किशोरियों के जीवन का आम हिस्सा बन चुका है। पढ़ाई, सोशल मीडिया, दोस्ती और खुद की पहचान को लेकर बढ़ते दबाव के बीच वे मानसिक रूप से अस्वस्थ महसूस करने लगी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 10–19 वर्ष की आयु वर्ग में लगभग एक में से सात किशोर मानसिक विकारों से प्रभावित होते हैं और लड़कियों में यह जोखिम लड़कों की तुलना में ज्यादा होता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि तनाव को कैसे कम किया जाए और मानसिक सेहत को कैसे मजबूत बनाया जाए।
स्क्रीन टाइम यानी मोबाइल, टीवी और इंटरनेट पर बिताया समय किशोरियों की मानसिक सेहत पर असर डालता है। एक अध्ययन के अनुसार, जो बच्चे और किशोर प्रतिदिन दो घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम बिताते हैं, उनमें अवसाद और चिंता का जोखिम बढ़ जाता है। ऑस्ट्रेलिया में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि 12-13 वर्ष के बच्चों पर इसका सबसे गंभीर प्रभाव देखा गया, खासकर लड़कियों में।
WHO की यूरोप शाखा ने 2022 में हुए HBSC अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि सोशल मीडिया का समस्या-पूर्ण उपयोग 11% किशोरों में देखा गया, जिसमें लड़कियों का प्रतिशत लड़कों से अधिक था (13% बनाम 9%)। इससे साफ होता है कि डिजिटल दुनिया में संतुलन बनाए रखना मानसिक सेहत के लिए कितना जरूरी है।
WHO के अनुसार, स्कूलों और समुदायों में जीवन कौशल सिखाने वाले कार्यक्रम, जैसे भावनाओं को समझना, तनाव से निपटना, आत्मविश्वास बढ़ाना, किशोरियों को मानसिक चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद करते हैं।
WHO की HAT गाइडलाइन्स (Helping Adolescents Thrive) में मनो-सामाजिक हस्तक्षेपों के बारे में बताया गया है, जो किशोरों में मानसिक विकारों की रोकथाम और आत्महत्या जैसी स्थितियों को कम करने में मदद करते हैं।
खुलकर बात करना, परिवार और स्कूल में भावनात्मक समर्थन (Emotional Support) देना किशोरियों को तनाव से निपटने में मदद करता है। WHO ने डिजिटल साक्षरता और संवाद को बढ़ावा देने की सलाह दी है।
CBT (Cognitive Behavioral Therapy) और IPT (Interpersonal Psychotherapy) जैसी मनोचिकित्सा विधियां भावनात्मक विकारों में सकारात्मक असर देती हैं। WHO ने सुझाव दिया है कि ये गैर-विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
स्क्रीन टाइम को सीमित करना, जीवन कौशल सिखाना, संवाद बढ़ाना, मनो-सामाजिक हस्तक्षेप और परामर्श, इन उपायों को एक साथ मिलाकर किशोरियों की मानसिक सेहत को मजबूत किया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, स्कूलों में डिजिटल साक्षरता और भावनात्मक शिक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है। परिवार में रोजाना बातचीत और भावनाओं को साझा करने का माहौल बनाया जा सकता है। यदि कोई किशोरी लगातार उदास या चिंतित दिखे, तो समय पर मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से संपर्क करना चाहिए।
यदि आप किशोरी हैं या किसी किशोरी की देखभाल कर रही हैं, तो शुरुआत स्क्रीन टाइम पर नजर रखने से करें। साथ ही, स्कूल या स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में जीवन कौशल या मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जानकारी लें। यदि जरूरत महसूस हो, तो RCI-लाइसेंसधारी क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक से सलाह लें।
डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है, चिकित्सा सलाह नहीं। यदि तनाव या अवसाद लंबे समय तक बना रहे, तो पेशेवर मदद लेने में संकोच न करें।
Updated on:
31 Jul 2026 06:51 pm
Published on:
31 Jul 2026 06:51 pm
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