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TSH, T3 और T4, जानिए कब कौन सा टेस्ट जरूरी? जानिए कैसे समझें अपनी थायरॉयड रिपोर्ट?

Thyroid Test: क्या आपको भी थायरॉयड है? क्या आप समय-समय पर थायरॉयड टेस्ट करवाते हैं? तो क्या आप थायरॉयड रिपोर्ट समझ सकते हैं? अगर नहीं, तो patrika+ के साथ समझिए तरीका...
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भारत

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Sanjana Kumar

Jul 31, 2026

Thyroid how to read test result in report

Thyroid how to read test result in report: थायरॉयड रिपोर्ट समझना जरूरी। (AI Creative)

Thyroid Test: थॉयरॉयड आजकल एक आम बीमारी का रूप ले चुकी है। हर साल लाखों लोग थायरॉयड की जांच करवाते हैं। इस रिपोर्ट में TSH, T3 और T4 के साथ ही Anti-TPO जैसे नाम देखे जा सकते हैं। लोग अक्सर यही देखकर घबरा जाते हैं और पूछने लगते हैं कि उनका TSH बढ़ा हुआ आया है, क्या उन्हें थायरॉयड है? तो कुछ लोग कहते नजर आएंगे उनका T3-T4 तो नॉर्मल है, फिर उन्हों थकान क्यों लग रही है? असल में थायरॉयड की रिपोर्ट सिर्फ एक नंबर नहीं होती, बल्कि वह शरीर के हार्मोनल संतुलन की पूरी कहानी बताती है। इसलिए एक मरीज या उसके परिजनों को अपनी ही रिपोर्ट को समझना भी उतना ही जरूरी है, जितना की थायरॉयड की जांच करवाना।

सबसे पहले समझिए TSH क्या है?

TSH यानी Thyroid Stimulating Hormone, थायरॉयड ग्रंथि नहीं, बल्कि मस्तिष्क में मौजूद पिट्यूटरी ग्रंथि बनाती है। इसका काम थायरॉयड को निर्देश देना होता है कि वह कितना T3 और T4 हार्मोन बनाए।

इसे ऐसे समझिए

TSH एक मैनेजर की तरह है, जबकि T3 और T4 काम करने वाले कर्मचारी हैं। जब कर्मचारी कम काम करते हैं, तो मैनेजर ज्यादा निर्देश देता है। जब कर्मचारी जरूरत से ज्यादा काम करने लगते हैं, तो मैनेजर निर्देश कम कर देता है।

T3 और T4 क्या करते हैं?

T3 (Triiodothyronine) और T4 (Thyroxine) शरीर के लगभग हर अंग की कार्यगति नियंत्रित करते हैं।

इनका असर शरीर पर कैसे पड़ता है

  • मेटाबॉलिज्म
  • दिल की धड़कन
  • शरीर का तापमान
  • ऊर्जा का स्तर
  • दिमाग की कार्यक्षमता
  • मांसपेशियों की ताकत
  • वजन
  • पाचन
  • बच्चों की शारीरिक वृद्धि और मस्तिष्क विकास

रिपोर्ट कैसे पढ़े?

पहली कंडिशन : अगर आपका TSH बढ़ा हुआ है और T3-T4 कम

तो यह बताता है कि आप Hypothyroidism के शिकार हैं। यानी थायरॉयड पर्याप्त हार्मोन नहीं बना पा रही। इसलिए पिट्यूटरी ज्यादा TSH बनाकर उसे लगातार काम करने का निर्देश दे रही है। वो लगातार काम कर रहा है, इसलिए बढ़ा हुआ है।

दूसरी कंडिशन: TSH कम आया है और T3-T4 बढ़े हुए दिख रहे हैं

आपकी यह रिपोर्ट बताती है कि आप Hyperthyroidism से पीड़ित हैं। मतलब थायरॉयड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बना रही है। इसलिए पिट्यूटरी TSH बनाना कम कर देती है।

तीसरी कंडिशन : TSH थोड़ा बढ़ा हुआ है, लेकिन T3-T4 सामान्य

इसका अर्थ है कि आपको Subclinical Hypothyroidism की शिकायत है। इस स्थिति में हर मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती। डॉक्टर उम्र, लक्षण, गर्भावस्था और अन्य बीमारियों को देखकर फैसला करते हैं कि दवाई देने की जरूरत है या नहीं।

Free T3 और Free T4 क्या हैं?

खून में ज्यादातर हार्मोन प्रोटीन से जुड़े रहते हैं। लेकिन जो हार्मोन बिना बंधे हुए होते हैं, वही शरीर में सक्रिय रूप से काम करते हैं। इसीलिए कई मरीजों में डॉक्टर Free T3 और Free T4 की जांच लिखते हैं। यह टेस्ट बताता है कि आपके शरीर में हार्मोन की वास्तविक सक्रिय मात्रा कितनी है।

Anti-TPO टेस्ट कब कराया जाता है?

यदि डॉक्टर को शक हो कि थायरॉयड की समस्या ऑटोइम्यून बीमारी (जैसे Hashimoto's Thyroiditis) के कारण है, तो Anti-TPO Antibody टेस्ट करवाया जाता है। यह जांच बताती है कि कहीं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) खुद अपनी थायरॉयड ग्रंथि पर हमला तो नहीं कर रही।

क्या सिर्फ TSH देखकर किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक थायरॉयड का इलाज केवल TSH के आधार पर तय नहीं किया जाता। मरीज की उम्र, लक्षण, गर्भावस्था, अन्य बीमारियां, दवाएं और पूरी रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाता है।

क्या खाली पेट टेस्ट जरूरी है?

ज्यादातर मामलों में TSH टेस्ट के लिए खाली पेट रहना जरूरी नहीं होता। लेकिन यदि आप Levothyroxine जैसी थायरॉयड की दवा लेते हैं, तो कई विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दवा लेने से पहले या डॉक्टर के बताए समय पर ही जांच कराएं, ताकि रिपोर्ट की तुलना सही तरीके से की जा सके।

रिपोर्ट सामान्य आने पर भी लक्षण क्यों रहते हैं?

कई बार थकान, वजन बढ़ना या बाल झड़ना सिर्फ थायरॉयड की वजह से नहीं होते। इनके पीछे कई कारण हो सकते हैं-

  • आयरन की कमी
  • विटामिन B12 की कमी
  • विटामिन D की कमी
  • एनीमिया
  • तनाव
  • नींद की कमी
  • अन्य हार्मोनल समस्याएं
  • इसलिए सिर्फ रिपोर्ट देखकर स्वयं दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

''थायरॉयड की रिपोर्ट को केवल एक नंबर की तरह नहीं देखना चाहिए। मरीज के लक्षण, उम्र, गर्भावस्था, अन्य बीमारियां और पूरी हार्मोन प्रोफाइल को साथ देखकर ही इलाज तय किया जाता है।''

-डॉ. विनोद कोठारी, एमडी मेडिसिन, भोपाल।