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क्या ‘ब्रेन फॉग’ सिर्फ थकान नहीं? नई रिसर्च में सामने आया हंटिंगटन डिजीज से कनेक्शन, वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ी

Brain Fog: लंबे समय तक रहने वाले ब्रेन फॉग और याददाश्त की समस्या को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इसके कुछ जैविक संकेत हंटिंगटन डिजीज जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जुड़े पाए हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर ब्रेन फॉग वाला व्यक्ति हंटिंगटन रोग से पीड़ित है। जानिए क्या है ब्रेन फॉग और हंटिंगटन डिजीज...
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भारत

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Sanjana Kumar

Jul 31, 2026

Brain Fog Brain Health Alert

Brain Fog Brain Health Alert

Brain Fog: अगर आपको लंबे समय से दिमाग सुस्त लगना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, शब्द याद न आना या छोटी-छोटी बातें भूलने जैसी समस्या रहती है, तो इसे सिर्फ तनाव या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। एक नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि गंभीर और लंबे समय तक रहने वाले ब्रेन फॉग के कुछ जैविक संकेत हंटिंगटन डिजीज में दिखने वाले बदलावों से मेल खाते हैं।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह समानता मस्तिष्क की कोशिकाओं के काम करने के तरीके और सूजन (न्यूरो-इन्फ्लेमेशन) से जुड़ी हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हर ब्रेन फॉग वाला व्यक्ति हंटिंगटन डिजीज से ग्रस्त है। यह केवल दोनों स्थितियों के बीच संभावित जैविक संबंध की ओर इशारा करता है।

क्या है हंटिंगटन डिजीज?

हंटिंगटन डिजीज एक दुर्लभ और आनुवंशिक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है। इसमें दिमाग की तंत्रिका कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं, जिससे व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता, व्यवहार और शरीर की गतिविधियां प्रभावित होती हैं। विशेषज्ञ इसे कई बार डिमेंशिया और मोटर न्यूरॉन डिजीज जैसी समस्याओं का मिश्रण भी बताते हैं, क्योंकि इसमें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की गंभीर परेशानियां देखने को मिलती हैं।

रिसर्च में क्या मिला?

शोध में लंबे समय तक ब्रेन फॉग और अत्यधिक थकान से जूझ रहे लोगों की संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) क्षमता का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि इन लोगों में सूचना प्रोसेस करने की गति, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और मानसिक प्रतिक्रिया में वही तरह की धीमापन दिखाई दिया, जो हंटिंगटन डिजीज के शुरुआती चरणों में देखा जाता है।

विशेषज्ञ क्यों मान रहे हैं अहम?

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर ब्रेन फॉग के पीछे काम कर रहे जैविक कारणों को बेहतर तरीके से समझा गया, तो भविष्य में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की शुरुआती पहचान और इलाज के नए रास्ते खुल सकते हैं। फिलहाल इस संबंध की पुष्टि के लिए और व्यापक अध्ययन की जरूरत है।

किन लोगों में ब्रेन फॉग की शिकायत ज्यादा देखी जाती है?

इन स्थितियों में ब्रेन फॉग हो सकता है

  • नींद पूरी न होना
  • लंबे समय तक तनाव या चिंता
  • थायरॉयड की समस्या
  • विटामिन B12 या आयरन की कमी
  • कोविड के बाद (Long COVID)
  • कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव
  • न्यूरोलॉजिकल बीमारियां
  • हालांकि एक्सपर्ट यह भी चेता रहे हैं कि हर ब्रेन फॉग हंटिंगटन डिजीज का संकेत नहीं होता।

डॉक्टर से कब करें संपर्क?

  • यदि ये लक्षण लगातार 2 से 4 सप्ताह तक बने रहें या बढ़ते जाएं
  • रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे
  • बार-बार भूलने की समस्या से परेशानी
  • बोलने या सही शब्द याद करने में कठिनाई
  • ध्यान केंद्रित न कर पाना
  • परिवार में हंटिंगटन या अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी का इतिहास

हंटिंगटन डिजीज एक नजर में

  • यह एक आनुवंशिक (Genetic) बीमारी है।
  • HTT जीन में बदलाव इसकी प्रमुख वजह है।
  • यह मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है।
  • इसके लक्षणों में अनियंत्रित हरकतें, सोचने-समझने की क्षमता में कमी
  • व्यवहार में बदलाव भी इसके लक्षणों में शामिल हो सकते हैं।
  • फिलहाल इसका इलाज लक्षणों को नियंत्रित करने पर ही केंद्रित है।

रिसर्च की खास बातें

  • 80 हंटिंगटन मरीजों और 65 स्वस्थ लोगों की तुलना की गई।
  • MRI से CSF मार्गों का अध्ययन किया गया।
  • अलग अध्ययन में GFAP बायोमार्कर का विश्लेषण किया गया।
  • शोध से संभावित जैविक संबंध के संकेत मिले हैं, लेकिन कारण और परिणाम साबित नहीं हुआ है।

ध्यान दें अगर आपको भी लगता है कि आप भूलने लगे हैं, नाम याद रखने या निर्णय लेने में परेशानी हो रही है, ध्यान केंद्रित नहीं हो पा रहा है, तो इन बदलावों को भूलकर भी नजर अंदाज न करें। बल्कि अपने डॉक्टर से संपर्क करें, शुरुआत में रोग पकड़े जाएं तो उनका उपचार आसान हो जाता है।