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रजिस्ट्री में छिपे जोखिम! ये 5 दस्तावेज जरूर चेक करें, वरना हो सकता है धोखा

Property Registry: इस लेख में रजिस्ट्री दस्तावेजों की जांच करने की प्रक्रिया के बारे में बताया गया है। आम नागरिक इसे समझकर संपत्ति खरीदने में होने वाले कानूनी और आर्थिक जोखिम से बच सकते हैं।
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भारत

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Adarsh Thakur

Jul 31, 2026

Property Registry Verification

Property Buying Tips: प्रॉपटी खरीदने से पहले ये दस्तावेज जरूर चेक करें।(Image: AI)

Property Buying Tips: रजिस्ट्री दस्तावेज, जिन्हें हम अक्सर "रजिस्ट्री" कहकर ही जानते हैं...वास्तव में संपत्ति खरीदने या बेचने की प्रक्रिया का केवल एक हिस्सा होते हैं। कई बार यही दस्तावेज, यदि सही तरीके से न जांचे जाएं, तो बड़े कानूनी और आर्थिक जोखिम का कारण बन सकते हैं। इस लेख में समझिए, रजिस्ट्री की जांच कैसे करें, किन दस्तावेजों पर ध्यान दें और किन गलतियों से बचें।

रजिस्ट्री क्या है और क्यों पर्याप्त नहीं?

रजिस्ट्री अर्थात् रजिस्टर्ड सेल डीड (बिक्री विलेख) वह कानूनी दस्तावेज है, जो संपत्ति का मालिकाना हक दर्शाता है और यह रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में दर्ज होता है। यह सबसे मजबूत कानूनी प्रमाण माना जाता है।

लेकिन केवल रजिस्ट्री होना ही काफी नहीं है। यह दस्तावेज सिर्फ उस समय की स्थिति दर्शाता है, और पिछली मालिकाना शृंखला (Ownership Chain) में छिपे विवाद, ऋण या अन्य दावे उजागर नहीं करता।

कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं?

  • सेल डीड / कंवेयन्स डीड: यह वह दस्तावेज है, जो संपत्ति का मालिकाना हक स्थानांतरित करता है और रजिस्टर्ड होना चाहिए।
  • 30 वर्ष की टाइटल चेन: पिछले 30 वर्षों में संपत्ति किन-किन के नाम रही, यह पता होना चाहिए और हर ट्रांसफर रजिस्टर्ड होना चाहिए।
  • एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (EC): यह प्रमाणित करता है कि संपत्ति पर कोई ऋण, बंधक या कानूनी दावा तो नहीं है।
  • खसरा–खतौनी / जमाबंदी / खाता: राजस्व रिकॉर्ड, जो मालिकाना हक, खेती या कब्जे की जानकारी देते हैं।
  • म्यूटेशन (दाखिल-खारिज): यह दर्शाता है कि संपत्ति का नाम राजस्व रिकॉर्ड में बदला गया है या नहीं।
  • CERSAI रजिस्ट्रेशन: यह जांचता है कि संपत्ति पर कोई बैंक ऋण या सिक्योरिटी तो नहीं है।
  • भूमि उपयोग प्रमाणपत्र / नक्शा / मंजूरी: विशेषकर कृषि भूमि को आवासीय में बदलने के लिए आवश्यक है।

कैसे करें दस्तावेजों की जांच?

  1. सब-रजिस्ट्रार कार्यालय या राज्य के ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर सेल डीड, EC और अन्य रिकॉर्ड देखें।
  2. ऑनलाइन पोर्टल पर संपत्ति का सर्वे नंबर, दस्तावेज संख्या, मालिक का नाम आदि डालकर जानकारी लें।
  3. CERSAI की वेबसाइट पर जाकर जांचें कि संपत्ति पर किसी बैंक का दावा या बंधक है या नहीं।
  4. स्थानीय राजस्व कार्यालय या नगर निगम से खसरा, खतौनी, जमाबंदी और म्यूटेशन की जानकारी लें।
  5. दस्तावेजों की असलियत जांचने के लिए एक अनुभवी संपत्ति वकील से सलाह लें। वकील 30 वर्ष की टाइटल चेन, अदालतों में लंबित मुकदमे और दस्तावेजों की वैधता की गहराई से जांच कर सकते हैं।

आम गलतियां और उनसे बचने के उपाय

  • केवल रजिस्ट्री पर भरोसा करना: रजिस्ट्री होना आवश्यक है, लेकिन यह अकेले मालिकाना हक की पुष्टि नहीं करता। EC, टाइटल चेन, म्यूटेशन और राजस्व रिकॉर्ड भी देखें।
  • GPA (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) पर भरोसा: कई धोखाधड़ी इसी पर आधारित होती हैं। GPA मालिकाना हक नहीं देता, इसलिए रजिस्टर्ड सेल डीड ही मांगें।
  • दस्तावेजों की नकल पर भरोसा: हमेशा असली दस्तावेज देखें और सरकारी रिकॉर्ड से मिलान करें।
  • स्थानीय जानकारी न लेना: आसपास के लोगों से पूछताछ करें। कई बार विवाद या दावा स्थानीय स्तर पर ही पता चल जाता है।

इस तालिका से समझें आवश्यक दस्तावेज और उनका महत्व:

दस्तावेजक्या दर्शाता हैक्यों आवश्यक है
सेल डीड (रजिस्टर्ड)मालिकाना हक का कानूनी ट्रांसफररजिस्ट्री एक्ट के तहत वैधता
टाइटल चेन (30 वर्ष)पिछले मालिकों की पूरी जानकारीकिसी छिपे दावे का पता चलता है
एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेटऋण, बंधक, कानूनी दावेसंपत्ति पर कोई बकाया नहीं
खसरा–खतौनी / जमाबंदीराजस्व रिकॉर्ड, खेती/कब्जाअसली मालिक कौन है, पता चलता है
म्यूटेशननाम का राजस्व रिकॉर्ड में बदलावसरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज
CERSAI रजिस्ट्रेशनबैंक/ऋण संबंधी दावेबैंक का दावा तो नहीं
भूमि उपयोग / नक्शाभूमि का कानूनी उपयोगअवैध रूपांतरण से बचाव

अगला कदम क्या हो?

संपत्ति खरीदने से पहले ऊपर बताए गए सभी दस्तावेजों की जांच करें। असली दस्तावेजों को सरकारी रिकॉर्ड से मिलाएं। यदि कुछ समझ में न आए, तो तुरंत किसी संपत्ति वकील से सलाह लें। सावधानी और सही जांच से आप रजिस्ट्री में छिपे जोखिमों से बच सकते हैं और संपत्ति खरीद को सुरक्षित बना सकते हैं।