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भारत के 45 UNESCO विश्व धरोहर स्थल, किस राज्य में सबसे ज्यादा, कौन सा है सबसे नया?

Newest UNESCO Site In India Sarnath : भारत में हुए 45 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल। जानें सबसे नया स्थल कौन सा है, किस राज्य में हैं सर्वाधिक धरोहरें और यूनेस्को दर्जा मिलने के फायदे।
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Jul 29, 2026
Newest UNESCO Site In India Sarnath
Newest UNESCO Site In India Sarnath : भारत में हैं 45 यूनेस्को स्थल, PC- Patrika

सारनाथ को जुलाई 2026 में UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल किए जाने के बाद भारत में कुल 45 विश्व धरोहर स्थल हो गए हैं। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के UNESCO स्थलों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। यह उपलब्धि सिर्फ सारनाथ या उत्तर प्रदेश के लिए ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए भी एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। ऐसे में यह जानना दिलचस्प है कि UNESCO विश्व धरोहर सूची क्या होती है, भारत में कितने स्थल इसमें शामिल हैं, सबसे ज्यादा स्थल किस राज्य में हैं और सबसे नया विश्व धरोहर स्थल कौन सा है।

UNESCO विश्व धरोहर सूची क्या है?

UNESCO (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) दुनिया भर की उन जगहों की पहचान और संरक्षण का काम करता है, जिनका सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक या प्राकृतिक महत्व पूरी मानवता के लिए असाधारण माना जाता है। ऐसी जगहों को UNESCO विश्व धरोहर (World Heritage) का दर्जा दिया जाता है।

किसी भी स्थल को यह दर्जा मिलना आसान नहीं होता। इसके लिए वर्षों तक शोध, दस्तावेजीकरण, विशेषज्ञ मूल्यांकन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जांच की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। एक बार सूची में शामिल होने के बाद वह स्थल केवल किसी एक देश की धरोहर नहीं रह जाता, बल्कि पूरी मानवता की साझा विरासत माना जाता है।

भारत में कितने UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं?

जुलाई 2026 तक भारत में कुल 45 UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं। इनमें सांस्कृतिक, प्राकृतिक और मिश्रित श्रेणियों के स्थल शामिल हैं। इन 45 स्थलों में अधिकांश सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनमें ऐतिहासिक स्मारक, मंदिर, किले, प्राचीन शहर और धार्मिक स्थल शामिल हैं। इसके अलावा कई राष्ट्रीय उद्यान और प्राकृतिक क्षेत्र भी UNESCO की सूची में जगह बना चुके हैं।

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जिनके पास सबसे समृद्ध और विविध विश्व धरोहर संपत्तियां हैं। देश की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, विभिन्न धर्मों की विरासत, वास्तुकला की विविधता और प्राकृतिक संपदा इस सूची में भारत की मजबूत उपस्थिति का प्रमुख कारण हैं।

नया UNESCO विश्व धरोहर स्थल कौन सा है?

भारत का सबसे नया UNESCO विश्व धरोहर स्थल सारनाथ है। जुलाई 2026 में दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में आयोजित UNESCO विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में सारनाथ को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की घोषणा की गई।

सारनाथ वही स्थान है जहां भगवान बुद्ध ने बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद अपना पहला उपदेश दिया था। बौद्ध धर्म में इसे धर्मचक्र प्रवर्तन स्थल कहा जाता है। यहीं से बौद्ध संघ की स्थापना हुई और बुद्ध के विचारों का प्रसार भारत से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचा।

UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त सारनाथ परिसर में चौखंडी स्तूप, धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ तथा प्राचीन विहारों के अवशेष शामिल हैं। लगभग 28 वर्षों तक चली नामांकन प्रक्रिया और कई दशकों के शोध के बाद सारनाथ को यह सम्मान मिला है।

किस राज्य में सबसे ज्यादा UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं?

भारत में सबसे अधिक UNESCO विश्व धरोहर स्थल महाराष्ट्र में हैं। राज्य के कुल छह स्थल UNESCO सूची में शामिल हैं। इनमें अजंता गुफाएं, एलोरा गुफाएं, एलीफेंटा गुफाएं, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, मुंबई का विक्टोरियन गोथिक एवं आर्ट डेको भवन समूह और मराठा मिलिट्री लैंडस्केप्स शामिल हैं। महाराष्ट्र की यह उपलब्धि बताती है कि राज्य में प्राचीन बौद्ध कला, मध्यकालीन वास्तुकला और औपनिवेशिक विरासत का अनूठा संगम मौजूद है। यही विविधता इसे भारत का सबसे समृद्ध UNESCO राज्य बनाती है।

उत्तर प्रदेश का स्थान कहां है?

सारनाथ के शामिल होने के बाद उत्तर प्रदेश में UNESCO विश्व धरोहर स्थलों की संख्या चार हो गई है। राज्य के चार UNESCO स्थल हैं।

  • ताजमहल
  • आगरा किला
  • फतेहपुर सीकरी
  • सारनाथ

ताजमहल दुनिया के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में गिना जाता है, जबकि आगरा किला और फतेहपुर सीकरी मुगल वास्तुकला के महत्वपूर्ण उदाहरण हैं। अब सारनाथ के जुड़ने से उत्तर प्रदेश को बौद्ध विरासत के वैश्विक केंद्र के रूप में भी नई पहचान मिली है।

अन्य प्रमुख राज्यों में कितने UNESCO स्थल हैं?

महाराष्ट्र के बाद तमिलनाडु, कर्नाटक, राजस्थान और उत्तर प्रदेश ऐसे राज्य हैं जहां कई UNESCO स्थल मौजूद हैं। तमिलनाडु में महाबलीपुरम के स्मारक समूह, ग्रेट लिविंग चोल टेमल्स और नीलगिरि माउंटेन रेलवे जैसी धरोहरें शामिल हैं। कर्नाटक में हम्पी, पट्टदकल और होयसला मंदिर समूह जैसे विश्व प्रसिद्ध स्थल हैं।

राजस्थान में जयपुर शहर, जंतर-मंतर, केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान और राजस्थान के पहाड़ी किले UNESCO सूची का हिस्सा हैं। दिल्ली में कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा और लाल किला शामिल हैं। वहीं गुजरात में रानी की वाव, चंपानेर-पावागढ़ और ऐतिहासिक अहमदाबाद शहर UNESCO मान्यता प्राप्त स्थल हैं।

UNESCO दर्जा मिलने से क्या फायदा होता है?

किसी भी स्थल को UNESCO विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के कई फायदे होते हैं। सबसे बड़ा लाभ अंतरराष्ट्रीय पहचान का होता है। दुनिया भर के पर्यटकों का ध्यान उस स्थल की ओर आकर्षित होता है, जिससे पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचता है।

इसके अलावा संरक्षण और प्रबंधन के लिए सरकारों पर जिम्मेदारी बढ़ जाती है। कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध होता है।

UNESCO का दर्जा किसी स्थल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को वैश्विक स्तर पर प्रमाणित करता है। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए उस धरोहर को सुरक्षित रखने की संभावना भी मजबूत होती है।

UNESCO दर्जा मिलना इतना कठिन क्यों होता है?

किसी स्थल को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले उस स्थल को देश की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया जाता है। इसके बाद एक विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार किया जाता है जिसमें यह साबित करना होता है कि उस स्थल का महत्व असाधारण और वैश्विक है।

फिर ICOMOS और IUCN जैसी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ संस्थाएं स्थल का निरीक्षण करती हैं। वे उसकी प्रामाणिकता, संरक्षण की स्थिति और ऐतिहासिक महत्व का मूल्यांकन करती हैं।

अंत में UNESCO की विश्व धरोहर समिति निर्णय लेती है कि स्थल को सूची में शामिल किया जाए या नहीं। सारनाथ के मामले में भी यह प्रक्रिया लगभग 28 वर्षों तक चली, जिसके बाद उसे विश्व धरोहर का दर्जा मिल सका।

भारत की विरासत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सूची?

भारत दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। यहां बौद्ध, जैन, हिंदू, सिख, इस्लामी और औपनिवेशिक विरासत से जुड़े अनगिनत स्मारक मौजूद हैं।

UNESCO सूची में शामिल स्थल भारत की इसी बहुआयामी पहचान को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं। ताजमहल प्रेम का प्रतीक है, हम्पी विजयनगर साम्राज्य की शक्ति का, अजंता-एलोरा कला और आध्यात्मिकता का, जबकि सारनाथ शांति, करुणा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

सारनाथ के UNESCO विश्व धरोहर सूची में शामिल होने के साथ भारत के कुल विश्व धरोहर स्थलों की संख्या 45 हो गई है। महाराष्ट्र सबसे ज्यादा छह UNESCO स्थलों वाला राज्य है, जबकि सारनाथ देश का सबसे नया विश्व धरोहर स्थल बन गया है। UNESCO का दर्जा किसी भी स्थल के लिए सिर्फ सम्मान नहीं, बल्कि उसकी वैश्विक पहचान, संरक्षण और भविष्य की जिम्मेदारी का प्रतीक भी होता है। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को देखते हुए आने वाले वर्षों में देश के कई और स्थलों के UNESCO सूची में शामिल होने की संभावनाएं बनी हुई हैं।

Updated on:
29 Jul 2026 04:13 pm
Published on:
29 Jul 2026 04:13 pm