
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा व्यवस्थाओं में गिनी जाती है। आज देश में लगभग 80 करोड़ लोग मुफ्त राशन का लाभ ले रहे हैं। यही वजह है कि अक्सर सवाल उठता है कि आखिर इतने लोगों को मुफ्त अनाज क्यों दिया जा रहा है, इस पर सरकार कितना खर्च करती है और यह योजना कब तक जारी रहेगी।
मुफ्त राशन का आधार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 है। इस कानून के तहत ग्रामीण आबादी के 75% और शहरी आबादी के 50% तक लोगों को सस्ते खाद्यान्न देने का प्रावधान किया गया था।
अप्रैल 2020: कोविड-19 राहत के तौर पर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) शुरू हुई- NFSA के तहत मिलने वाले सस्ते राशन के ऊपर अतिरिक्त मुफ्त अनाज दिया जाने लगा।
दिसंबर 2022: PMGKAY को NFSA के साथ मिला दिया गया, और 1 जनवरी 2023 से एक साल के लिए तय हुआ कि लाभार्थियों को अनाज पूरी तरह मुफ्त मिलेगा (न कि सिर्फ सस्ते दाम पर)।
नवंबर 2023: कैबिनेट ने इस मुफ्त व्यवस्था को 1 जनवरी 2024 से अगले पांच वर्षों - यानी दिसंबर 2028 तक - के लिए बढ़ा दिया।
वर्तमान में अंत्योदय अन्न योजना (AAY) और प्राथमिकता परिवार (PHH) श्रेणी के लाभार्थियों को मुफ्त राशन मिलता है।
NFSA के तहत अधिकतम कवरेज 81.35 करोड़ लोगों की है। यह सीमा 2011 की जनगणना के आधार पर तय हुई थी (कुल आबादी का 67%)। अगस्त 2025 तक राज्यों ने करीब 80.6 करोड़ लाभार्थी चिन्हित कर लिए थे, यानी अधिकतम सीमा से करीब 79 लाख लाभार्थी अभी भी जोड़े जा सकते हैं।
यानी भारत की लगभग 140 करोड़ आबादी में से करीब 57% लोग किसी न किसी रूप में इस खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में आते हैं।
मुफ्त राशन योजना केंद्र सरकार की सबसे महंगी कल्याणकारी योजनाओं में से एक है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में PMGKAY के लिए ₹2,27,429 करोड़ (लगभग ₹2.27 लाख करोड़) का प्रावधान किया गया है। यह खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के कुल बजट का 97% हिस्सा है। पिछले वर्ष (2025-26) में भी संशोधित अनुमान के मुताबिक खर्च करीब इतना ही (₹2.27-2.28 लाख करोड़) रहा।
कोविड काल में अप्रैल 2020 से दिसंबर 2022 के बीच अतिरिक्त मुफ्त राशन वितरण पर सरकार ने कुल लगभग ₹3.9 लाख करोड़ खर्च किए थे। यह उस दौर में सामान्य से कहीं ज़्यादा खर्च था, क्योंकि तब NFSA वाले सस्ते राशन के ऊपर अतिरिक्त अनाज मुफ्त बांटा जा रहा था।
केंद्र सरकार ने नवंबर 2023 में फैसला लिया कि 1 जनवरी 2024 से मुफ्त राशन योजना को अगले पांच साल के लिए बढ़ाया जाएगा। इसका मतलब है कि वर्तमान व्यवस्था दिसंबर 2028 तक जारी रहेगी, और इस पूरी अवधि में सरकार का अनुमानित खर्च करीब ₹11.8 लाख करोड़ है। इसके अलावा सरकार ने इसी अवधि तक मुफ्त फोर्टिफाइड (पोषणयुक्त) चावल वितरण को भी मंजूरी दी है।
सरकार का कहना है कि मुफ्त राशन योजना का उद्देश्य गरीब और कमजोर वर्गों को खाद्य सुरक्षा देना है। इससे परिवारों का भोजन पर होने वाला खर्च कम होता है और आर्थिक संकट के समय भी उन्हें न्यूनतम खाद्यान्न उपलब्ध रहता है।
इस योजना को लेकर एक बहस भी चलती रहती है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि 80 करोड़ लोगों का कवरेज यह दिखाता है कि देश में बड़ी आबादी अभी भी खाद्य सुरक्षा पर निर्भर है। वहीं सरकार का तर्क है कि NFSA का कवरेज 2011 की जनगणना के आधार पर तय किया गया था और इसका उद्देश्य व्यापक खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह भी उल्लेखनीय है कि 2011 के बाद से आबादी काफी बढ़ चुकी है, इसलिए फ़िलहाल तय 67% वाली कवरेज सीमा और मौजूदा जनसंख्या के अनुपात को लेकर भी बहस होती रहती है।
| 🏷️ श्रेणी | 📌 आंकड़ा |
|---|---|
| लाभार्थी (अगस्त 2025 तक चिन्हित) | करीब 80.6 करोड़ |
| अधिकतम NFSA कवरेज | 81.35 करोड़ |
| PHH पात्रता | 5 किलो प्रति व्यक्ति/माह |
| AAY पात्रता | 35 किलो प्रति परिवार/माह |
| वार्षिक खर्च (बजट 2026-27) | ₹2.27 लाख करोड़ |
| पूरी तरह मुफ्त राशन की शुरुआत | 1 जनवरी 2023 |
| मौजूदा 5-वर्षीय विस्तार लागू | 1 जनवरी 2024 |
| मौजूदा विस्तार की अवधि | दिसंबर 2028 तक |
| 5 साल के विस्तार पर अनुमानित कुल खर्च | ₹11.8 लाख करोड़ |