
रेलवे क्रॉसिंग पर आरओबी (रोड ओवर ब्रिज) का निर्माण एक बार फिर चर्चा में है। खासकर जब यह सवाल उठता है कि क्या यह वाकई में एक स्थायी समाधान है? आइए, इस मुद्दे को ताजा आंकड़ों और विशेषज्ञों की राय के साथ समझते हैं। हालांकि, ROB/RUB एक स्थायी समाधान, तभी माना जा सकता है, जब राज्य सरकारें समय पर भूमि, धन और समन्वय उपलब्ध कराएं। निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और परियोजनाओं की निगरानी व समीक्षा नियमित रूप से हो।
रेलवे और सड़क यातायात के बीच टकराव और जाम जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए आरओबी या आरयूबी (रोड अंडर ब्रिज) का निर्माण एक प्रमुख विकल्प रहा है। साल 2004 से 2014 की अवधि में भारतीय रेलवे ने 4,148 आरओबी/आरयूबी बनाए, जबकि 2014 से अक्टूबर 2025 में यह संख्या बढ़कर 13,653 हो गई। यह स्पष्ट संकेत है कि यह समाधान लगातार अपनाया जा रहा है।
लेटेस्ट आंकड़ों के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 तक भारतीय रेलवे पर कुल 16,499 मैनड लेवल क्रॉसिंग्स (MLCs) थीं, और सभी अनमैनड लेवल क्रॉसिंग्स (UMLCs) को 31 जनवरी 2019 तक समाप्त कर दिया गया था। 1 जनवरी 2026 तक 4,769 आरओबी/आरयूबी परियोजनाएं ₹1,14,298 करोड़ की अनुमानित लागत पर स्वीकृत हैं, जिनमें से कुछ महाराष्ट्र के नासिक जिले में भी शामिल हैं।
ROB/RUB का मुख्य उद्देश्य लेवल क्रॉसिंग पर होने वाले हादसों और जाम को रोकना है। यह समाधान ट्रेन और सड़क यातायात को अलग करके सुरक्षा बढ़ाता है और जाम की समस्या को काफी हद तक दूर करता है। रेलवे और सड़क यात्रियों को इसका फायदा मिल रहा है।
आरओबी/आरयूबी निर्माण में कई बाधाएं भी हैं। इसमें भूमि अधिग्रहण, अतिक्रमण हटाना, उपयोगिताओं का स्थानांतरण, विभिन्न विभागों से मंजूरी लेना और राज्य सरकारों के साथ समन्वय शामिल है। ये सभी कारक परियोजना की गति और समयसीमा को प्रभावित करते हैं।
एक ऑडिट रिपोर्ट (2008–09) में यह सुझाव दिया गया था कि रेलवे केवल उन्हीं आरओबी/आरयूबी परियोजनाओं को आगे बढ़ाए, जहां राज्य सरकार ने आवश्यक धन और भूमि उपलब्ध कराई हो। इससे यह स्पष्ट होता है कि योजना की स्थिरता राज्य सरकारों की भागीदारी पर निर्भर करती है।
2016 में शुरू हुए सेतु भारतम कार्यक्रम का उद्देश्य आरओबी/आरयूबी निर्माण को तेज करना था। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम में अब तक केवल 25% काम ही पूरा हुआ है। यह धीमी प्रगति इस समाधान की स्थिरता पर सवाल खड़ा करती है। आरओबी/आरयूबी निर्माण एक प्रभावी उपाय है। यह सुरक्षा बढ़ाता है, जाम कम करता है और यातायात को सुगम बनाता है।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर यह देखना होगा कि राज्य सरकारें और रेलवे मिलकर इस प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी कैसे बना सकते हैं। क्या भूमि अधिग्रहण और फंडिंग में सुधार होगा? क्या निर्माण की गति बढ़ेगी? इन सवालों के जवाब तय करेंगे कि आरओबी/आरयूबी वाकई में स्थायी समाधान बन पाता है या नहीं। यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबद्धता का भी है।