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क्या आपके बच्चे में है छुपी एंग्जाइटी? जानिए पहचानने के आसान लक्षण!

क्या आपके बच्चे की हंसी के पीछे छिपी है चिंता? उनके अनकहे दर्द को समझने के लिए इन संकेतों पर ध्यान दें।
3 min read
Aug 13, 2026
anxiety in kids
प्रतीकात्मक तस्वीर | Gemini

बच्चों में चिंता अक्सर छुपी रहती है - वे इसे शब्दों में नहीं बता पाते, लेकिन उनके व्यवहार और शरीर की भाषा से यह साफ झलकता है। अगर आप एक माता-पिता, शिक्षक या देखभालकर्ता हैं, तो यह जानना जरूरी है कि कब चिंता सामान्य से आगे बढ़कर समस्या बन रही है। नीचे हम सरल भाषा में बताएंगे कि किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए, क्यों यह महत्वपूर्ण है, और आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

शारीरिक शिकायतें जो अक्सर असली वजह छुपाती हैं

बच्चे अक्सर सिरदर्द, पेट दर्द, मतली या चक्कर जैसी शिकायतें करते हैं, जबकि कोई मेडिकल वजह नहीं मिलती। Mayo Clinic के अनुसार, ये शारीरिक लक्षण चिंता का आम रूप हैं - जैसे तेज दिल की धड़कन, तेज सांस, बेचैनी, कंपकंपी, चक्कर, दस्त या सीने में कसाव।

भारतीय संदर्भ में ICMR की गाइडलाइन बताती है कि बिना स्पष्ट शारीरिक कारण के थकावट, दर्द, सिरदर्द, पेट दर्द, छाती में दर्द या फैंटिंग जैसी शिकायतें चिंता से जुड़ी हो सकती हैं।

भावनात्मक और व्यवहार संबंधी संकेत

बच्चों में चिंता अक्सर भावनात्मक बदलावों के रूप में दिखती है - जैसे बार-बार चिंता करना, तनाव में रहना, आत्मविश्वास की कमी, स्कूल या सामाजिक जगहों से बचना, मां से चिपकना, अजनबियों से डरना, या स्कूल जाने से इनकार करना।

Cleveland Clinic बताता है कि चिंता विकार वाले बच्चों में रोना, गुस्सा, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, भूख में बदलाव, नींद में परेशानी, और बार-बार टॉयलेट जाना जैसे व्यवहार भी दिख सकते हैं।

दैनिक जीवन में असर और बदलाव

जब चिंता बच्चे की रोजमर्रा की जिंदगी - स्कूल, खेल, दोस्तों या परिवार पर असर डालने लगे, तो यह चिंता विकार का संकेत हो सकता है। Mayo Clinic के Dr. Stephen Whiteside कहते हैं कि अगर बच्चा स्कूल नहीं जाना चाहता, परिवार से दूर हो रहा है, या दोस्तों से मिलने से बचता है, तो यह चिंता का गंभीर संकेत है।

NHS की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि अगर चिंता इतनी बढ़ जाए कि बच्चा रोजमर्रा की गतिविधियां करने में असमर्थ हो जाए - जैसे स्कूल न जाना या दोस्तों से मिलना छोड़ देना तो यह समस्या बन चुकी है।

आयु के अनुसार चिंता के रूप

छोटे बच्चों (लगभग 6 महीने से 3 साल तक) में अलगाव की चिंता (separation anxiety) सामान्य है - वे मां से दूर होने पर चिपक जाते हैं या रोते हैं, और यह आमतौर पर 2–3 साल की उम्र तक ठीक हो जाता है। बड़े बच्चों और किशोरों में चिंता का स्वरूप बदलता है - वे स्कूल, प्रदर्शन, दोस्ती या भविष्य को लेकर अत्यधिक चिंतित हो सकते हैं।

श्रेणीलक्षण
शारीरिकसिरदर्द, पेट दर्द, मतली, चक्कर, तेज दिल की धड़कन, सांस लेने में कठिनाई
भावनात्मक/व्यवहारबार-बार चिंता, आत्मविश्वास की कमी, गुस्सा, रोना, स्कूल या सामाजिक जगहों से बचना
दैनिक जीवन पर असरस्कूल न जाना, परिवार या दोस्तों से दूरी, सामान्य गतिविधियां छोड़ना

कब डॉक्टर से मिलें

अगर ये लक्षण कई हफ्तों तक बने रहें, रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो, या बच्चे में आत्महत्या या आत्म-हानि की बातें हों, तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें। ICMR की गाइडलाइन में बताया गया है कि अगर 4–6 हफ्तों में घरेलू उपायों से सुधार नहीं हो, तो विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है।

घरेलू मदद और शुरुआती कदम

शुरुआत में आप घर पर कुछ आसान तरीके आजमा सकते हैं - जैसे गहरी सांस लेना, आरामदायक बातें करना, चिंता के कारणों को समझना और धीरे-धीरे बच्चे को सामान्य गतिविधियों में वापस लाना। Mayo Clinic की Anxiety Coach जैसी ऑनलाइन टूल्स भी मददगार हो सकती हैं, जो चिंता और तनाव में अंतर समझने और उसे संभालने में सहायक होती हैं।

चिंता दूर करने के अतिरिक्त उपाय

बच्चों में चिंता प्रबंधन के लिए कुछ अतिरिक्त उपाय भी कारगर हो सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, जैसे खेलकूद या योग, तनाव को कम करने में मदद कर सकती है। बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना, जैसे चित्रकारी या संगीत, उनके भावनात्मक स्वास्थ्य को सुधार सकता है। इसके अलावा, बच्चों के लिए एक नियमित दिनचर्या बनाना और उन्हें पर्याप्त नींद दिलाना भी महत्वपूर्ण है।

बच्चों में चिंता अक्सर छुपी रहती है लेकिन अगर आप ध्यान दें, तो उसके संकेत साफ दिखते हैं। शारीरिक शिकायतें, भावनात्मक बदलाव, रोजमर्रा की जिंदगी पर असर - ये सब मिलकर बताते हैं कि चिंता सामान्य से आगे बढ़ चुकी है।

Updated on:
13 Aug 2026 11:00 am
Published on:
13 Aug 2026 11:00 am