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क्या अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हिंसा वास्तव में बढ़ रही है? आंकड़ों से समझिए पूरा सच

भारत सरकार के आंकड़े 2024 और 2025 में ऐसी घटनाओं में बढ़ोतरी दिखाते हैं, जबकि अमेरिकी आंकड़े व्यापक तस्वीर को थोड़ा अलग तरीके से सामने रखते हैं। ऐसे में जरूरी है कि दावों से नहीं, आंकड़ों से समझा जाए कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हिंसा की असली स्थिति क्या है और इसके पीछे कौन से सामाजिक, राजनीतिक और नस्लीय कारण काम कर रहे हैं।
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Hate Crimes in USA

अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ अपराध बढ़ने के बारे में रिपोर्ट। (Photo: ChatGpt)

अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव को लेकर हाल के वर्षों में चिंता बढ़ी है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में इसे लगातार बढ़ते हमलों से जोड़कर देखा जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या उपलब्ध आंकड़े सचमुच यह साबित करते हैं कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ रही है?

इस सवाल का जवाब सीधा "हां" या "नहीं" नहीं है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारतीय नागरिकों और भारतीय मूल के लोगों से जुड़ी रिपोर्ट की गई घटनाओं में 2024 और 2025 में वृद्धि हुई है, लेकिन इन्हें अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ होने वाली सभी तरह की हिंसा का संपूर्ण आंकड़ा नहीं माना जा सकता।

पांच साल में बढ़ीं घटनाएं, लेकिन तस्वीर उतनी सीधी नहीं

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने 23 जुलाई 2026 को राज्यसभा में अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन में भारतीय नागरिकों तथा भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ दर्ज घटनाओं का पांच साल का आंकड़ा पेश किया।

अमेरिका के लिए आंकड़े इस प्रकार हैं — 2021 में 1, 2022 में 6, 2023 में 1, 2024 में 11 और 2025 में 14 घटनाएं दर्ज की गईं। यानी 2021 से 2025 के बीच कुल 33 घटनाएं दर्ज हुईं (तुलना के लिए, इसी अवधि में कनाडा में 36 और ब्रिटेन में 16 घटनाएं दर्ज हुईं)।

यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। इन 33 घटनाओं को केवल "हमले" या "हत्या" कहना सही नहीं होगा। विदेश मंत्रालय के जवाब का दायरा 'नस्लीय हमले, घृणा अपराध, भेदभाव और हिंसा' जैसी व्यापक श्रेणियों तक फैला था। इसलिए 33 का आंकड़ा यह नहीं बताता कि 33 भारतीयों की हत्या हुई या सभी घटनाएं शारीरिक हमले थीं।

क्या 2025 में वास्तव में बढ़ोतरी हुई?

हां। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में रिपोर्ट की गई घटनाएं 2023 के केवल 1 से बढ़कर 2024 में 11 और 2025 में 14 हो गईं। यानी हाल के दो वर्षों में वृद्धि स्पष्ट दिखाई देती है। लेकिन इसे पांच साल की लगातार बढ़ती हुई रेखा कहना गलत होगा, क्योंकि 2021 में 1, 2022 में 6 और 2023 में फिर 1 घटना दर्ज हुई थी। दूसरे शब्दों में अगर कहूं तो रुझान उतार-चढ़ाव भरा रहा है, लेकिन 2024-25 में घटनाओं का स्तर शुरुआती वर्षों की तुलना में अधिक रहा।

इसके साथ ही, विदेश मंत्रालय का डेटा केवल उन्हीं घटनाओं को दर्शाता है जो सरकार या भारतीय मिशनों की जानकारी में आईं। यह जरूरी नहीं कि अमेरिका में होने वाली हर घटना भारतीय दूतावास या भारत सरकार तक रिपोर्ट हो। इसलिए इसे वास्तविक हिंसा का पूर्ण सर्वेक्षण नहीं माना जा सकता।

अमेरिका का व्यापक डेटा क्या कहता है?

भारतीयों के लिए अलग से राष्ट्रीय स्तर पर हर प्रकार की हिंसा का कोई एकीकृत अमेरिकी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। FBI आमतौर पर hate crime को पीड़ित की नस्ल, जातीयता, धर्म, राष्ट्रीयता आदि से जुड़े पूर्वाग्रह के आधार पर वर्गीकृत करता है।

2025 के प्रारंभिक FBI आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि एंटी-एशियन घृणित अपराध (hate crimes) 318 मामलों पर रहे, जो 2024 के 379 मामलों से लगभग 16 प्रतिशत कम हैं। लेकिन यह संख्या महामारी से पहले के 2013-18 के औसत (133 मामले प्रति वर्ष) से अब भी लगभग 2.4 गुना अधिक है।
यानी व्यापक तस्वीर में एक दिलचस्प विरोधाभास है। 2025 में कुल एंटी-एशियन घृणित अपराध घटे, लेकिन वे अभी भी महामारी-पूर्व स्तर से काफी ऊपर रहे।

भारतीयों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेत: दक्षिण एशियाई और धार्मिक पहचान

भारतीय समुदाय की स्थिति समझने के लिए केवल "Asian" श्रेणी देखना पर्याप्त नहीं है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय में हिंदू, सिख, मुस्लिम और अन्य धार्मिक समूह शामिल हैं।

FBI के प्रारंभिक 2025 आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, anti-Sikh hate crimes 2024 के 142 से बढ़कर 2025 में 226 हो गए। करीब 59 प्रतिशत की वृद्धि, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इसी तरह anti-Hindu hate crimes 25 से बढ़कर 28 हुए, यानी लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि, और यह भी अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

यहां भी सावधानी जरूरी है। किसी सिख या हिंदू के खिलाफ घृणित अपराध को स्वतः "भारतीयों के खिलाफ अपराध" नहीं कहा जा सकता, क्योंकि अमेरिका में इन धार्मिक समुदायों में भारतीय मूल के अलावा दूसरे देशों के लोग भी शामिल हैं। फिर भी ये आंकड़े भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों के लिए महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हैं।

राजनीति और H-1B विवाद का कितना असर?

2024 के अमेरिकी चुनाव के बाद ऑनलाइन anti-Asian और anti-South Asian बयानबाजी में तेज वृद्धि की रिपोर्ट सामने आई। Stop AAPI Hate के आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 में anti-Asian slurs की संख्या करीब 88,000 तक पहुंच गई, जो संगठन की अगस्त 2022 से शुरू हुई निगरानी में सबसे अधिक मासिक संख्या थी। चुनाव के बाद ऐसे slurs में करीब 66 प्रतिशत वृद्धि देखी गई, जबकि anti-South Asian slurs नवंबर 2024 की तुलना में जनवरी 2025 में लगभग 75 प्रतिशत बढ़े।

इस बहस में भारतीयों की खास स्थिति है, क्योंकि भारतीय नागरिक अमेरिकी H-1B कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी समूहों में शामिल हैं। H-1B, आव्रजन और "विदेशी कर्मचारी अमेरिकी नौकरियां ले रहे हैं" जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस कभी-कभी नस्लीय और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी भाषा में बदल जाती है। रिपोर्टों में भारतीयों को "jobs stealing" जैसे आरोपों के साथ निशाना बनाए जाने की बात भी सामने आई है।

लेकिन इससे यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि किसी एक राजनीतिक विचारधारा के सभी समर्थक भारतीयों के खिलाफ हैं। उपलब्ध आंकड़े राजनीतिक माहौल और ऑनलाइन नफरत के बीच संबंध का संकेत जरूर देते हैं, लेकिन हर वास्तविक हिंसक घटना का कारण साबित नहीं करते।

क्या स्थिति बहुत खराब हो रही है?

पूरी तस्वीर मिश्रित है। 2026 के AP-NORC/AAPI Data सर्वे में करीब एक-चौथाई AAPI वयस्कों ने पिछले एक साल में hate crime या hate incident जैसे मौखिक उत्पीड़न या शारीरिक हमला का अनुभव होने की बात कही। यह अक्टूबर 2023 के 36 प्रतिशत से कम है। इसी दौरान FBI के प्रारंभिक आंकड़े भी 2024 से 2025 के बीच anti-Asian hate crimes में गिरावट दिखाते हैं।

लेकिन इसी सर्वे में लगभग 10 में से 3 AAPI वयस्कों ने माना कि अगले पांच वर्षों में उन्हें नस्ल या जातीयता के आधार पर भेदभाव का सामना करने की आशंका है। सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि नफरत की भाषा अब केवल कोविड-19 से जुड़ी नहीं रही; उसमें anti-immigrant बयानबाजी का हिस्सा बढ़ा है। खतरा है, लेकिन सनसनी से बचना होगा

तो क्या अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है?

भारत सरकार के आंकड़ों के आधार पर, 2024 और 2025 में रिपोर्ट की गई घटनाएं निश्चित रूप से बढ़े हुए स्तर पर हैं। 2025 में 14 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2021 और 2023 में केवल एक-एक घटना दर्ज हुई थी।

लेकिन यह कहना कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हिंसा "हर साल लगातार बढ़ रही है", सही नहीं होगा। इसी तरह 33 घटनाओं को 33 हत्याएं या 33 शारीरिक हमले बताना भी गलत होगा।

असल तस्वीर यह है कि भारतीय और व्यापक दक्षिण एशियाई समुदाय को नस्लीय पूर्वाग्रह, धार्मिक घृणा, anti-immigrant बयानबाजी और ऑनलाइन नफरत से जुड़े जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं व्यापक anti-Asian hate crime 2025 में घटा जरूर है, लेकिन अभी भी महामारी-पूर्व स्तर से काफी ऊपर है।

इसलिए इस मुद्दे पर सबसे जरूरी चीज डर फैलाना नहीं, बल्कि सही आंकड़े, स्पष्ट श्रेणियां और हर घटना की स्वतंत्र जांच है। यही तरीका बताएगा कि अमेरिका में भारतीयों के खिलाफ हिंसा वास्तव में कितनी बढ़ी है, और उसके पीछे असली कारण क्या हैं।