
'लॉकर खोला तो अंदर कुछ नहीं था…' कानपुर की 55 वर्षीय महिला रश्मि अरोड़ा के साथ जो हुआ, उसने बैंक लॉकर की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। महिला का दावा है कि उन्होंने 2003 में स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर के लॉकर नंबर 23 में करीब 50 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने रखे थे। बैंक बाद में भारतीय स्टेट बैंक में विलय हो गया। वर्षों बाद जब उन्होंने लॉकर खोला तो वह खाली मिला।
महिला ने बैंक प्रबंधन और कर्मचारियों पर गहने गायब करने की साजिश का आरोप लगाया है। पुलिस ने शाखा प्रबंधक और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस लॉकर के रिकॉर्ड, बैंक के दस्तावेज और सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रही है।
यह मामला अभी जांच में है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि गहने आखिर कैसे गायब हुए। लेकिन इस घटना ने एक जरूरी सवाल जरूर खड़ा कर दिया है-क्या बैंक लॉकर में रखा सोना पूरी तरह सुरक्षित है?
बैंक लॉकर में सोना रखने का मतलब यह नहीं कि बैंक उसकी पूरी जिम्मेदारी लेता है।बहुत से लोगों को लगता है कि बैंक को लॉकर का किराया देने का मतलब है कि अंदर रखे हर सामान की जिम्मेदारी बैंक की है। लेकिन नियम इससे अलग हैं।
आरबीआई के नियमों के मुताबिक बैंक को लॉकर की सुरक्षा के लिए उचित सावधानी बरतनी होती है, लेकिन बैंक को यह पता नहीं होता कि ग्राहक ने लॉकर के अंदर क्या रखा है और उसकी कीमत कितनी है। इसलिए सामान्य परिस्थितियों में बैंक लॉकर की सामग्री का बीमा नहीं करता।
हालांकि अगर लॉकर की सामग्री बैंक की लापरवाही, चोरी, डकैती, आग जैसी घटना या बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी के कारण गायब होती है, तो बैंक की जिम्मेदारी बनती है। ऐसे मामलों में बैंक की अधिकतम देनदारी लॉकर के सालाना किराये की 100 गुना राशि तक सीमित है।
यानी अगर किसी ने लॉकर में 50 लाख रुपये का सोना रखा है, तो जरूरी नहीं कि बैंक से चोरी साबित होने पर भी उसे पूरे 50 लाख रुपये वापस मिल जाएं।
हर घटना का तरीका अलग हो सकता है और किसी खास मामले में पुलिस जांच के बिना निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन सामान्य तौर पर कई तरह के जोखिम होते हैं।
लॉकर की अनधिकृत पहुंच : अगर कोई व्यक्ति ग्राहक की अनुमति के बिना लॉकर तक पहुंचता है तो यह गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है। बैंक के पास लॉकर कक्ष में प्रवेश और लॉकर संचालन से जुड़े रिकॉर्ड होने चाहिए।
आरबीआई के नियम बैंकों को लॉकर रजिस्टर और चाबी से जुड़े रिकॉर्ड में बदलाव का पूरा विवरण रखने और उसका लेखा-परीक्षण योग्य रिकॉर्ड बनाए रखने को कहते हैं।
बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी : आरबीआई के नियमों में खुद यह माना गया है कि अगर नुकसान बैंक कर्मचारी की धोखाधड़ी के कारण होता है तो बैंक की जिम्मेदारी बन सकती है। इसलिए किसी लॉकर से सामान गायब होने पर कर्मचारियों की भूमिका की जांच भी महत्वपूर्ण होती है।
लंबे समय तक लॉकर न चलाना : कानपुर की घटना में भी लंबे समय तक लॉकर नहीं खोला गया था। इसका मतलब यह नहीं कि लंबे समय तक लॉकर न चलाने पर बैंक अपने आप सामान निकाल सकता है।
आरबीआई के नियमों के अनुसार अगर लॉकर सात साल तक निष्क्रिय रहता है और ग्राहक का पता नहीं चलता, तभी बैंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत लॉकर की सामग्री को नामित व्यक्ति या कानूनी उत्तराधिकारी को सौंपने या नियमों के अनुसार निपटाने की कार्रवाई कर सकता है। इसके लिए बैंक को तय प्रक्रिया का पालन करना होता है।
किराया न देने पर लॉकर खोलना : अगर ग्राहक लगातार तीन साल तक लॉकर का किराया नहीं देता है तो बैंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत लॉकर खोल सकता है। लेकिन इसके लिए ग्राहक को पहले सूचना देनी होती है। संपर्क न होने पर बैंक को अखबारों में सार्वजनिक सूचना देने जैसी प्रक्रिया भी अपनानी होती है। लॉकर खोलने के दौरान बैंक अधिकारी और स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी तथा पूरी प्रक्रिया की रिकॉर्डिंग का भी प्रावधान है।
ग्राहक की अपनी गलती : हर मामले में बैंक जिम्मेदार हो, ऐसा जरूरी नहीं। कई बार ग्राहक लॉकर ठीक से बंद किए बिना बाहर निकल सकता है या चाबी की सुरक्षा में लापरवाही हो सकती है।
दिसंबर 2024 में गाजियाबाद के मोदीनगर में करीब 31 लाख रुपये के गहने बैंक लॉकर से गायब होने का मामला सामने आया था। जांच में पुलिस ने पाया कि ग्राहक ने लॉकर ठीक से बंद नहीं किया था और बाद में बगल के लॉकर की महिला पर चोरी का आरोप लगा। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर अधिकांश गहने बरामद कर लिए थे।
इसलिए लॉकर से सामान गायब मिलने पर सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि चोरी वास्तव में बैंक के भीतर हुई, ग्राहक के लॉकर संचालन के दौरान हुई या लॉकर से सामान निकालने के बाद कहीं और।
यह मान लेना भी सही नहीं होगा कि बैंक लॉकर से रोजाना बड़ी संख्या में सोना चोरी हो रहा है। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 2021-22 से 2025-26 के बीच लॉकर चोरी के 40 मामले दर्ज किए गए। इनमें 18 मामले उत्तर प्रदेश और 12 झारखंड में थे। वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने लॉकर चोरी का कोई नया मामला दर्ज नहीं किया।
हालांकि हर विवाद को 'चोरी' कहना भी सही नहीं होगा। जून 2025 में बेंगलुरु में एक महिला ने एसबीआई लॉकर से करीब 145 ग्राम सोने और हीरे के गहने गायब होने की शिकायत की थी। बैंक ने चोरी से इनकार किया और पुलिस की जांच के दौरान सभी सामान मिलने की बात कही।
वहीं पुणे में 2024 में एक महिला ने सहकारी बैंक के लॉकर से करीब 13.59 लाख रुपये के गहने गायब होने की शिकायत की। खास बात यह थी कि बैंक के रिकॉर्ड में उस अवधि के दौरान लॉकर खोले जाने की जानकारी नहीं थी। मामले की पुलिस जांच शुरू हुई। यानी हर घटना में यह पता लगाना जरूरी है कि वास्तव में लॉकर कब और किसने खोला।
पहला कदम: लॉकर को दोबारा न छेड़ें
अगर लॉकर खाली या सामान कम मिले तो वहां मौजूद स्थिति को जितना संभव हो, वैसा ही रहने दें। बैंक से लिखित रूप में पूरी घटना दर्ज कराएं।
दूसरा कदम: बैंक से रिकॉर्ड मांगें
बैंक से लॉकर संचालन से जुड़े उपलब्ध रिकॉर्ड, प्रवेश रिकॉर्ड, लॉकर रजिस्टर और संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने का अनुरोध करें। आरबीआई के नियमों के तहत लॉकर संचालन और रिकॉर्ड की उचित व्यवस्था रखना बैंक की जिम्मेदारी है।
तीसरा कदम: पुलिस में शिकायत करें
अगर चोरी या धोखाधड़ी का संदेह है तो स्थानीय पुलिस में लिखित शिकायत देकर एफआईआर दर्ज कराने की मांग करें। खासकर बड़ी रकम के मामले में पुलिस जांच जरूरी है।
चौथा कदम: बैंक के उच्च अधिकारियों को शिकायत करें
शाखा से शिकायत करने के बाद बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय और बैंक के शिकायत निवारण अधिकारी तक मामला पहुंचाएं। शिकायत की रसीद या शिकायत संख्या जरूर लें।
पांचवां कदम: आरबीआई लोकपाल
अगर बैंक आपकी शिकायत का संतोषजनक समाधान नहीं करता या 30 दिनों के भीतर जवाब नहीं देता, तो ग्राहक आरबीआई की एकीकृत लोकपाल व्यवस्था के तहत शिकायत कर सकता है। यह व्यवस्था बैंकिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों के लिए है और इसके तहत शिकायत निवारण की सुविधा निशुल्क है। आरबीआई की शिकायत प्रबंधन प्रणाली के जरिए भी शिकायत दर्ज की जा सकती है।
बैंक लॉकर के अंदर क्या रखा है, इसका पूरा रिकॉर्ड आम तौर पर बैंक के पास नहीं होता। इसलिए ग्राहक को खुद सावधानी बरतनी चाहिए। सोने के गहनों की तस्वीरें, खरीद की रसीदें, वजन, शुद्धता और अनुमानित कीमत का रिकॉर्ड सुरक्षित जगह पर रखें। बहुत महंगे गहनों के लिए अलग से बीमा कराने पर भी विचार किया जा सकता है।
सबसे जरूरी बात, लॉकर को सालों तक बिना खोले न छोड़ें। समय-समय पर उसे खोलकर सामान की जांच करें और बैंक से अपने लॉकर की स्थिति की पुष्टि करते रहें।