
भारत में एथलेटिक्स की चर्चा अक्सर जेवलिन थ्रो, रेस वॉक या स्प्रिंट के आसपास घूमती रही है। जंपिंग इवेंट्स में भारतीय खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार उम्मीदें जगाईं, लेकिन विश्व जूनियर मंच पर पोडियम तक पहुंचना अब तक बड़ी चुनौती रहा था। अमेरिका के यूजीन में आयोजित 2026 World Athletics U20 Championships ने इस तस्वीर को बदल दिया।
9 अगस्त को भारतीय एथलेटिक्स के लिए इतिहास बना। 19 वर्षीय बसंत कुमार मेघवाल ने पुरुष हाई जंप में सिल्वर मेडल जीता, जबकि शाहनवाज खान ने पुरुष लॉन्ग जंप में ब्रॉन्ज अपने नाम किया। खास बात यह रही कि दोनों भारतीय जंपर्स ने एक ही चैंपियनशिप में पोडियम साझा किया। बसंत U20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में हाई जंप पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने, जबकि शाहनवाज इस प्रतियोगिता के पुरुष लॉन्ग जंप में पोडियम पर पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बने।
इन दो पदकों के साथ जेवलिन थ्रोअर आशिष यादव के सिल्वर को जोड़ दें तो भारत के खाते में तीन पदक हो गए। यह प्रदर्शन 2021 और 2022 की U20 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत के सर्वश्रेष्ठ पदक-हॉल के बराबर है। यानी भारत ने जूनियर विश्व एथलेटिक्स में अपने सबसे सफल अभियानों में से एक को फिर दोहरा दिया है।
बसंत की कहानी इस उपलब्धि का सबसे बड़ा आकर्षण है। राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ गांव से आने वाले बसंत ने हाई जंप के फाइनल में 2.21 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल हासिल किया। यह उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी है, जिसकी उन्होंने बराबरी की।
सोने का फैसला बेहद मामूली अंतर से हुआ। अल्जीरिया के यूनूस अयाची (Younes Ayachi) ने भी ऊंचाई के मामले में बाजी मारी और काउंटबैक के आधार पर गोल्ड अपने नाम किया। यानी बसंत और स्वर्ण पदक के बीच अंतर केवल ऊंचाई का नहीं, बल्कि प्रयासों की संख्या का था।
बसंत की सफलता अचानक नहीं आई। उनके प्रदर्शन में इस साल जबरदस्त सुधार हुआ है। वह पहले ही Asian U20 Athletics Championships में गोल्ड जीत चुके थे। उनकी कोच पूर्व राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी साहना कुमारी (Sahana Kumari) हैं। साहना कुमारी के अनुसार जब बसंत ने उनके साथ प्रशिक्षण शुरू किया था, तब वह करीब 2.11 मीटर तक कूद रहे थे। इस साल Junior Federation Cup में 2.21 मीटर की छलांग ने उनके तेजी से हो रहे सुधार का संकेत दे दिया था।
एक खिलाड़ी का 2.11 मीटर से 2.21 मीटर तक पहुंचना आंकड़ों में सिर्फ 10 सेंटीमीटर का सुधार दिखाई देता है, लेकिन हाई जंप जैसे इवेंट में यह अंतर बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसमें तकनीक, रन-अप, टेक-ऑफ, शरीर का नियंत्रण और मानसिक मजबूती—सब कुछ एक साथ काम करता है।
बसंत भारतीय नौसेना में Petty Officer भी हैं। खेल और सेवा की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने जिस तरह प्रदर्शन में सुधार किया है, वह उनके अनुशासन और प्रशिक्षण की ओर इशारा करता है।
अगर बसंत की कहानी ऊंचाई तक पहुंचने की है, तो शाहनवाज खान की कहानी लंबाई की सीमाएं तोड़ने की है। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ से आने वाले शाहनवाज ने 2026 सीजन में भारतीय लॉन्ग जंप के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में अपनी जगह बनाई। इस साल उन्होंने भुवनेश्वर में आयोजित Inter-State National Championships में 8.30 मीटर की छलांग लगाई थी। यह प्रदर्शन उन्हें विश्व U20 सूची में शीर्ष दावेदारों में ले आया। World Athletics की चैंपियनशिप प्रीव्यू रिपोर्ट के मुताबिक, यूजीन पहुंचने से पहले Shahnavaz 8.30 मीटर के प्रदर्शन के साथ दुनिया के U20 लॉन्ग जंपरों में शीर्ष पर थे।
लेकिन फाइनल में कहानी उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। ऐंठन और एड़ी की चोट ने उनका प्रदर्शन प्रभावित किया और वह 7.87 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीत पाए।
यहां इस पदक की अहमियत समझना जरूरी है। वह अपने सीजन के सर्वश्रेष्ठ 8.30 मीटर प्रदर्शन से काफी पीछे रहे, फिर भी पोडियम तक पहुंचे। यानी कठिन परिस्थितियों में प्रदर्शन करने की क्षमता ने उन्हें पदक दिलाया।
शाहनावज ने प्रतियोगिता के बाद बताया कि शुरुआती दो प्रयास ठीक रहे, लेकिन तीसरे प्रयास के बाद उन्हें ऐंठन होने लगी और एड़ी में चोट भी लगी। इसके बावजूद उनका लक्ष्य एक ही था- पोडियम पर पहुंचना और भारत के लिए पदक जीतना।
उनकी कहानी में एक भावनात्मक अध्याय भी है। 2025 में जब उन्होंने पहली बार 8 मीटर का आंकड़ा पार किया था, तब उन्होंने अपने दिवंगत पिता नसीमुद्दीन को याद किया था। उन्होंने अपने बिब पर लिखा था-“8+ jump, I miss dad”। उनके पिता गांवों के बीच यात्रियों को ले जाने वाली जीप चलाते थे और 2018 में उनका निधन हो गया था। अब वही शाहनवाज विश्व U20 पोडियम पर हैं।
शाहनवाज की सफलता अकेली नहीं है। भारतीय लॉन्ग जंप में इस समय प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। वह तिरुवनंतपुरम के National Centre of Excellence में दो बार के कॉमनवेल्थ गेम्स पदक विजेता श्रीशंकर मुरली के साथ प्रशिक्षण करते हैं।
श्रीशंकर ने भी इस साल भारतीय लॉन्ग जंप में बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा किया था। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी खेल में एक मजबूत खिलाड़ी तभी तैयार होता है जब उसके आसपास भी मजबूत प्रतिस्पर्धा मौजूद हो। भारत के लिए यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय तक लॉन्ग जंप में उम्मीदें कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों पर टिकी थीं। अब युवा स्तर पर कई खिलाड़ी एक-दूसरे को आगे बढ़ा रहे हैं।
बसंत का हाई जंप सिल्वर, शाहनवाज का लॉन्ग जंप ब्रॉन्ज और आशिष यादव का जेवलिन सिल्वर—ये तीनों पदक मिलकर भारतीय एथलेटिक्स की नई तस्वीर पेश करते हैं।
भारत का U20 World Championships में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अब केवल एक इवेंट की कहानी नहीं रह गया है। 2021 और 2022 के अभियान की बराबरी करते हुए 2026 में भारत ने फिर तीन पदकों तक पहुंच बनाई है। लेकिन जूनियर स्तर की सफलता अपने आप सीनियर स्तर की सफलता में नहीं बदलती। यही इन खिलाड़ियों के सामने अगली बड़ी चुनौती है।
बसंत को 2.21 मीटर से आगे जाना होगा। शाहनवाज को 8.30 मीटर की अपनी छलांग को लगातार दोहराना होगा। आशिष और बाकी युवा एथलीटों के सामने भी जूनियर पदक को सीनियर अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि में बदलना ही चुनौती होगी।
Eugene में बसंत और शाहनवाज ने केवल दो पदक नहीं जीते। उन्होंने भारतीय एथलेटिक्स को एक संकेत दिया है- भारत की अगली बड़ी छलांग सिर्फ जेवलिन से नहीं आएगी। एक तरफ राजस्थान के अनूपगढ़ से निकला 19 वर्षीय हाई जंपर है, जिसने 2.21 मीटर पर इतिहास बनाया। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का युवा लॉन्ग जंपर है, जिसने 8.30 मीटर के साथ दुनिया का ध्यान खींचा और चोट के बावजूद विश्व चैंपियनशिप पोडियम तक पहुंच गया।
दोनों की कहानियां अलग हैं, इवेंट अलग हैं और चुनौतियां भी अलग हैं। लेकिन मंजिल एक है- विश्व स्तर पर भारत को स्थायी एथलेटिक्स शक्ति बनाना।
अब सवाल यह नहीं कि बसंत और शाहनवाज ने जूनियर स्तर पर क्या हासिल किया। असली सवाल यह है कि क्या भारत अगले कुछ वर्षों में इन दो युवा छलांगों को ओलंपिक पोडियम की ऊंचाई तक ले जा पाएगा?
Eugene में भारत ने छलांग लगाई है। अगली चुनौती इसे उड़ान में बदलना है।