
गांवों में खेत तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। कई बार किसान वर्षों से जिस रास्ते का उपयोग कर रहा होता है, उसे पड़ोसी अचानक बंद कर देता है। कहीं खेत तक जाने का रास्ता जोत लिया जाता है, कहीं मेड़ बनाकर रास्ता रोक दिया जाता है और कहीं रास्ते पर कब्जा कर लिया जाता है।
ऐसी स्थिति में किसान के सामने सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या खेत तक पहुंचना उसका कानूनी अधिकार है? अगर रास्ता बंद हो जाए तो शिकायत कहां करें और क्या कोर्ट जाना जरूरी होगा?
जमीन और रास्ते से जुड़े विवादों में नियमों की जानकारी न होने के कारण कई किसान वर्षों तक परेशानी झेलते हैं। इसलिए यह समझना जरूरी है कि खेत के रास्ते से जुड़े अधिकार क्या हैं और विवाद होने पर क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
किसी भी कृषि भूमि का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केवल जमीन नहीं, बल्कि उस तक पहुंचने का रास्ता भी होता है। यदि किसान अपनी जमीन तक ट्रैक्टर, कृषि यंत्र, बीज, खाद या फसल नहीं पहुंचा सकता, तो जमीन होने के बावजूद उसका उपयोग मुश्किल हो जाता है। इसी कारण कानून भी इस बात को महत्व देता है कि भूमि मालिक को अपनी जमीन तक उचित पहुंच (Access) मिलनी चाहिए।
रास्ते को लेकर विवाद होने पर सबसे पहला कदम यह देखना होना चाहिए कि संबंधित रास्ता राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है या नहीं।इसके लिए किसान अपने इन दस्तावेज देख सकता है-
यदि रास्ता सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, तो उसे बंद करना या उस पर कब्जा करना आसान नहीं होता। आज अधिकांश राज्यों में भू-नक्शा ऑनलाइन उपलब्ध है, जहां किसान अपने खसरा नंबर के आधार पर रास्ते की स्थिति देख सकता है।
चक रोड वह सार्वजनिक कृषि मार्ग होता है जिसे किसानों को खेत तक पहुंच देने के लिए राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाता है। इसका उपयोग गांव के एक से अधिक किसान कर सकते हैं। चक रोड पर आमतौर पर कोई व्यक्ति निजी स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता। यदि कोई व्यक्ति चक रोड पर कब्जा करता है या रास्ता बंद करता है, तो राजस्व विभाग कार्रवाई कर सकता है।
निजी रास्ता किसी व्यक्ति की निजी भूमि का हिस्सा होता है। यदि कोई किसान वर्षों से किसी दूसरे की निजी जमीन से होकर खेत तक पहुंच रहा है, तो हर मामले में उसे कानूनी अधिकार स्वतः नहीं मिल जाता। ऐसे मामलों में पुराने उपयोग, दस्तावेज और स्थानीय परिस्थितियां महत्वपूर्ण हो जाती हैं। यही कारण है कि चक रोड और निजी रास्ते का अंतर समझना जरूरी है।
पड़ोसी ने रास्ता बंद कर दिया तो क्या करें?
यदि कोई पड़ोसी खेत तक जाने वाला रास्ता बंद कर देता है, तो सबसे पहले विवाद को बातचीत से सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए। यदि समाधान नहीं निकलता, तो किसान को रिकॉर्ड के आधार पर कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।
लेखपाल और कानूनगो : सबसे पहले संबंधित लेखपाल या कानूनगो को शिकायत दी जा सकती है। वे मौके पर जाकर जांच कर सकते हैं और रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं।
तहसीलदार : यदि मामला हल नहीं होता, तो तहसीलदार के पास आवेदन किया जा सकता है। तहसीलदार राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांच कर सकते हैं और आवश्यक आदेश जारी कर सकते हैं।
एसडीएम (SDM) : यदि रास्ते पर अवैध कब्जा या गंभीर विवाद है, तो उपजिलाधिकारी (SDM) के समक्ष शिकायत की जा सकती है। एसडीएम राजस्व अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर रास्ता खुलवाने या कब्जा हटाने के निर्देश दे सकते हैं।
यदि रास्ता सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है और उस पर अवैध कब्जा पाया जाता है, तो राजस्व विभाग कब्जा हटाने की कार्रवाई कर सकता है। कई राज्यों में इसके लिए विशेष राजस्व प्रावधान मौजूद हैं। हालांकि कार्रवाई की प्रक्रिया राज्य और मामले की परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है।
ऐसी स्थिति में किसान सिविल कोर्ट में वाद दायर कर सकता है। कोर्ट रिकॉर्ड, नक्शे, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देता है।
यह सवाल अक्सर पूछा जाता है। केवल वर्षों तक रास्ते का उपयोग करने से हर मामले में स्वामित्व या स्थायी अधिकार नहीं मिल जाता। लेकिन लंबे समय से उपयोग, स्थानीय परिस्थितियां और रिकॉर्ड अदालत या प्रशासनिक जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में तथ्य और दस्तावेज दोनों महत्वपूर्ण होते हैं।