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‘मोटी हो, काली हो, छोटी हो’ ऐसे ताने सुनकर थक चुके हैं? जानिए सेल्फ कॉन्फिडेंस वापस पाने का तरीका

body shaming self esteem: क्या आप भी बॉडी शेमिंग का शिकार हैं, आपके शरीर को लेकर किसी की टिप्पणी ने आपके मन को भीतर तक बेचैन कर दिया है। तो patrika.com का ये लेख आपको बताएगा किसी के भद्दा मजाक को कैसे दे सकती हैं मात और कैसे बनाए रख सकती हैं अपनी मोटी, काली या छोटी काया के साथ गजब का सेल्फ कॉन्फिडेंस, क्यों कि आप जैसी भी है बहुत खूबसूरत हैं
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Aug 25, 2026
body shaming self esteem
body shaming self esteem: बॉडी शेमिंग ने आपका कॉन्फिडेंस खो गया है, तो जरूर जानें कैसे रहेंगी खुश? (AI Creative)

Body shaming self esteem: क्या आपने कभी सोचा है कि दूसरों के शरीर को लेकर की गई आपकी टिप्पणी या मजाक कैसे सामने वाले के मन की शांति और मेंटल हेल्थ से लेकर उसकी पर्सनलिटी को प्रभावित कर देती है? ऐसे कई केस सामने आते हैं, क्योंकि शरीर की आलोचना चाहे वह वजन, रंग, ऊंचाई, चेहरे की बनावट या किसी अन्य शारीरिक विशेषता पर हो, आज की तेज-तर्रार दुनिया में एक आम, लेकिन गहरा असर छोड़ने वाला अनुभव बन चुका है।

सोशल मीडिया, परिवार, दोस्तों या कॉलेज के माहौल में यह टिप्पणियां अक्सर मजाक या 'फिक्र' के नाम पर की जाती हैं, लेकिन इसके पीछे छिपा दर्द और मानसिक प्रभाव अक्सर अनदेखा रह जाता है। यहां जानिए यह दबाव कैसे काम करता है, इसका असर क्या होता है और हम इससे कैसे निपट सकते हैं?

सामाजिक दबाव और मानसिक प्रभाव

कई शोध बताते हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों पर सोशल मीडिया (जैसे इंस्टाग्राम, स्नैपचैट) और कॉलेज के माहौल में शरीर की आलोचना ने चिंता, आत्म-संदेह और आत्म-मूल्य में कमी जैसे प्रभाव डाले हैं। इस अध्ययन में 30 छात्रों की पांच समूह चर्चाओं से यह सामने आया कि सोशल मीडिया की सजाई गई छवियां और कॉलेज में 'मजाक' के नाम पर होने वाली टिप्पणियां आत्म-छवि को गहराई से प्रभावित करती हैं।

सामाजिक मानदंडों और कलंक की जड़ें भी गहरी हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के एक समाजशास्त्रीय अध्ययन में बताया गया है कि शरीर की आलोचना केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक नियंत्रण का एक रूप है, जो आत्म-शर्म और सामाजिक बहिष्कार को जन्म देता है।

वैश्विक स्तर पर भी यह समस्या गंभीर मानी जा रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिकी मनोवैज्ञानिक संघ (APA) अब शरीर की छवि से जुड़ी परेशानियों को मानसिक स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं। ICD‑11 (अंतर्राष्ट्रीय रोग वर्गीकरण) ने बॉडी डिस्मॉर्फिक डिसऑर्डर और वजन से जुड़े कलंक को मानसिक और व्यवहार संबंधी विकारों की श्रेणी में शामिल किया है।

युवा और किशोर, सबसे ज्यादा प्रभावित

भारत में किशोर और युवा वर्ग इस दबाव से सबसे अधिक प्रभावित हैं। तमिलनाडु के एक अध्ययन में ग्रामीण युवतियों ने बताया कि सांस्कृतिक अपेक्षाएं और मीडिया की छवियां उनके आत्मसम्मान और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं।

केरल के एक अध्ययन में पाया गया कि 60 युवाओं में से आधे से अधिक लोग रोजमर्रा की जिंदगी में बॉडी शेमिंग का सामना करते हैं, जिससे उनकी सामाजिक उपस्थिति को लेकर चिंता और मानसिक अस्वस्थता जुड़ी हुई है।

एक अन्य अध्ययन में 20-30 वर्ष के युवाओं ने बताया कि शरीर की आलोचना ने उनकी आत्म-स्वीकृति और जीवन संतुष्टि को प्रभावित किया और मीडिया ने इस चक्र को और गहरा किया। इसे शोध में 'विषाक्त चक्र' कहा गया है।

कैसे निपटें, क्या होने चाहिएं व्यावहारिक कदम

यह जानना जरूरी है कि शरीर की आलोचना से निपटना संभव है और इसमें कुछ ठोस, व्यावहारिक कदम मददगार साबित हो सकते हैं-

  1. अपने विचारों को पहचानें और बदलें: जब नकारात्मक विचार आएं, जैसे 'मैं मोटी हूं', तो उसे पहचानें और सकारात्मक या तटस्थ विचार से बदलने की कोशिश करें। उदाहरण के लिए, 'मेरा शरीर मुझे चलने, हंसने, काम करने में मदद करता है।'
  2. खुद के प्रति दया और सहानुभूति रखें: खुद को कठोर आलोचना से बचाएं। बॉडी शेमिंग से जुड़ी शर्म को कम करने के लिए आत्म-दया (self-compassion) महत्वपूर्ण है।
  3. सोशल मीडिया और नकारात्मक माहौल से दूरी बनाएं : ऐसे अकाउंट्स को अनफॉलो कर दें, जो अवास्तविक सौंदर्य मानकों को बढ़ावा देते हैं। अपने आसपास सकारात्मक और स्वीकार्य लोगों को रखें।
  4. मीडिया साक्षरता और आलोचनात्मक सोच अपनाएं : जब विज्ञापन या सोशल मीडिया पर कोई छवि दिखे, तो खुद से पूछें, क्या यह वास्तविक है? क्या यह मेरे लिए मायने रखता है? इस तरह की सोच आपको मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।
  5. थेरेपी और समूह समर्थन CBT (कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी) और CFT (कम्पैशन‑फोकस्ड थेरेपी) जैसे सिद्ध मनोवैज्ञानिक तरीके आत्म-स्वीकृति और शर्म को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही, कॉलेज या समुदाय में डिजिटल साक्षरता और बॉडी पॉजिटिविटी कार्यक्रमों से जुड़ना भी सहायक हो सकता है।
  6. माइंडफुलनेस और सकारात्मक ध्यान: वर्तमान क्षण में खुद को केंद्रित करें, जैसे अपनी सांस, स्वाद, स्पर्श पर ध्यान देना। यह मानसिक शांति और आत्म-स्वीकृति बढ़ाता है।
  7. अपने शरीर की क्षमताओं पर ध्यान दें: शरीर की बनावट से अधिक यह देखें कि वह आपके लिए क्या-क्या कर सकता है, जैसे चलना, खाना पकाना, बच्चों को संभालना आदि।

कहना होगा कि शरीर की आलोचना एक गहरा मानसिक प्रभाव छोड़ने वाला सामाजिक दबाव है, लेकिन इससे निपटना संभव है। जब हम अपने विचारों को पहचानते हैं, खुद के प्रति दया रखते हैं, सकारात्मक माहौल बनाते हैं और मनोवैज्ञानिक सहायता लेते हैं, तो हम इस दबाव को तोड़ सकते हैं।

तो आपका अगला कदम हो सकता है कि आप किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें, माइंडफुलनेस अभ्यास शुरू करें या किसी थेरेपिस्ट से संपर्क करें। यह सफर धीरे-धीरे शुरू होता है, लेकिन हर कदम आपके आत्मसम्मान और मानसिक शक्ति को मजबूत करता है।

Updated on:
25 Aug 2026 01:09 pm
Published on:
25 Aug 2026 01:09 pm