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आपकी अगली सुबह की सैर बदल सकती है आपके शहर की तस्वीर, जानिए क्यों जरूरी है साइकिल ट्रैक?

cycle track benefits India: जरा सोचिए, अगर रोज वो 15-20 मिनट का जाम और आपकी फंसी हुई सी यात्रा, सिर्फ 5 मिनट में, बिना पेट्रोल खर्च किए और बिना पॉल्यूशन फैलाए पूरी हो जाए तो? एक सुरक्षित साइकिल ट्रैक न सिर्फ आपको ट्रैफिक जाम से आजादी दिला सकता है, बल्कि आपकी सेहत और आपके शहर की हवा को भी बेहतर बना सकता है!
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 25, 2026

cycle track benefits India

cycle track benefits India: हर शहर लिख सकता है अपना सेहतनामा, जानिए साइकिल ट्रैक क्यों जरूरी? (AI Creative)

Cycle track benefits India: शहर में साइकिल ट्रैक होना अब सिर्फ एक अच्छी सुविधा नहीं रहा, यह आपके रोजमर्रा के सफर से जुड़ी एक जरूरत बन चुकी है। जब हर सुबह ट्रैफिक जाम में फंसना, बढ़ता प्रदूषण और बिगड़ती सेहत आम बात हो गई हो, तब एक अलग और सुरक्षित साइकिल लेन आपको एक साफ, तेज और सस्ता विकल्प दे सकती है।

ट्रैफिक से राहत, सड़क पर ज्यादा जगह

जब साइकिल ट्रैक मोटर वाहनों की लेन से अलग बनाए जाते हैं, तो गाड़ियों की रफ्तार भी बेहतर होती है। यानी आपका पेट्रोल, समय और सांस लेने वाली हवा, तीनों की बचत।

आपकी सेहत और जेब, दोनों को फायदा

साइकिल चलाना सिर्फ ट्रैफिक से बचने का तरीका नहीं। यह दिल की बीमारियों और मोटापे के खतरे को भी घटाता है। TERI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में साइकिलिंग में निवेश से 5.5 गुना तक आर्थिक फायदा हो सकता है। वहीं छोटी दूरी की साइकिलिंग से हर साल करीब 1.8 ट्रिलियन की बचत संभव है।

आपकी रोज की यात्रा दरअसल साइकिल के लिए ही बनी है

भारतीय शहरों में करीब 60% यात्राएं 5 किमी से कम और 80% यात्राएं 10 किमी से कम होती हैं। यानी दफ्तर, बाजार या स्कूल तक का आपका रोज का सफर, दरअसल साइकिल के लिए एकदम सही दूरी में आता है।

सुरक्षा में भी बड़ा बदलाव

दिल्ली के BRT कॉरिडोर पर बने 5.6 किमी के साइकिल ट्रैक के बाद साइकिल चालकों की स्पीड 8 से बढ़कर 12 किमी/घंटा हो गई, हर किलोमीटर पर 2.5 मिनट की बचत हुई और दुर्घटना का खतरा 99% तक घट गया।

अब बदलाव शुरू हो चुका है

'India Cycles4Change' पहल के तहत देशभर के 107 शहर जुड़े, जिनमें से 41 शहरों ने साइकिल ट्रैक, पॉप-अप लेन और शेयर्ड साइकिल जैसी पहलें अपनाई। करीब 400 किमी मुख्य सड़कों और 3500 किमी मोहल्ला सड़कों पर काम शुरू हो चुका है। बेंगलुरु जैसे शहरों में 'साइकिल डे' जैसी पहलें भी लोगों को जोड़ने में कामयाब रहीं।

आपको क्या फायदा - और कैसे

समय की बचत - कम जाम, तेज सफर
सेहत में सुधार - दिल की बीमारी, मोटापे का खतरा कम
पैसों की बचत - पेट्रोल-डीजल का खर्च घटे
सुरक्षा - दुर्घटनाओं में भारी कमी
साफ हवा - प्रदूषण में कमी

देशभर में अब यह मुहिम रफ्तार पकड़ चुकी है

यह सिर्फ आपके शहर की बात नहीं है। पूरे देश में यह बदलाव धीरे-धीरे शक्ल ले रहा है। संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, स्मार्ट सिटी मिशन और AMRUT योजना के तहत देश के 61 शहरों में अब तक करीब 712 किलोमीटर लंबे साइकिल ट्रैक बनाए जा चुके हैं। आपका शहर भी इस सूची में शामिल हो सकता है, बस जरूरत है नागरिकों की मांग और प्रशासन की इच्छाशक्ति की।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल इस मामले में पहले से आगे रह चुकी है

भोपाल भारत का पहला शहर था, जिसने पूरी तरह ऑटोमेटेड पब्लिक बाइक शेयरिंग सिस्टम शुरू किया था। वहीं उदयपुर में फतेहसागर झील और हिरण मगरी जैसे इलाकों में बने साइकिल कॉरिडोर को 2025 में स्वच्छ और सुरक्षित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए सराहा गया, जबकि हैदराबाद ने अपनी आउटर रिंग रोड पर सोलर-पावर्ड साइकिल ट्रैक तक बना दिया है।

सिर्फ शहरों तक ही नहीं, अब यह मुहिम हाईवे तक पहुंच चुकी है। साइकिल उद्योग की राजधानी कहे जाने वाले लुधियाना में NHAI ने पहली बार हाईवे किनारे साइकिल ट्रैक बनाने को मंजूरी दी है, जिसका पहला चरण करीब 18.6 करोड़ रुपए की लागत से 14.44 किमी में बनेगा।

कॉर्पोरेट और युवा वर्ग भी बन रहे मुहिम का हिस्सा

इस मुहिम से बेंगलुरु में हाल ही में हुए एक कार्यक्रम में 150 से ज्यादा साइकिल चालकों ने हिस्सा लिया और 90 दिन की एक कॉर्पोरेट साइकिलिंग चुनौती भी शुरू की गई।

इस मौके पर मौजूद नीदरलैंड्स के काउंसल-जनरल ने याद दिलाया कि नीदरलैंड्स ने भी पांच दशक पहले सुरक्षित सड़कों की जनता की मांग के चलते ही कार-केंद्रित शहरों से साइकिल-फ्रेंडली शहरों की तरफ अपना सफर शुरू किया था। यानी जो बदलाव आज यूरोप में मिसाल है, वह कभी वहां भी सिर्फ एक मांग से शुरू हुआ था।

कहना होगा कि आपका शहर हर दिन ट्रैफिक, प्रदूषण और बिगड़ती सेहत से जूझ रहा है। वहीं इसका एक आसान हल आपकी नजर के सामने है। अगर आपके शहर में अब तक साइकिल ट्रैक नहीं है, तो यह वक्त है अपने नगर निगम या जनप्रतिनिधि से इसकी मांग उठाने का। एक सुरक्षित साइकिल ट्रैक सिर्फ सड़क नहीं बदलता। यह आपके शहर की पूरी पहचान बदल सकता है।