
Brown Snake in Guam Island: इतिहास में कई ऐसे आक्रमण हुए हैं, जिन्होंने पूरे के पूरे टापुओं और देशों का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) तबाह कर दिया। प्रशांत महासागर के छोटे से द्वीप 'गुआम' (Guam) पर भूरे रंग के वृक्षीय सांप (Boiga irregularis) का कब्जा पर्यावरण विज्ञान की दुनिया की सबसे खौफनाक और हैरान कर देने वाली घटनाओं में से एक है। एक ऐसा सांप, जो अपने मूल निवास स्थान में सामान्य जीवन जीता था, उसने एक अनजान द्वीप पर पहुंचकर न केवल वहां के पक्षियों की प्रजातियों को निगल लिया, बल्कि इंसानों की बनाई बिजली व्यवस्था और आधुनिक तकनीक तक को भी ठप कर दिया।
दशकों से वैज्ञानिक एक विरोधाभास (Biological Paradox) से जूझ रहे थे कि आखिर कैसे महज कुछ ही सांपों से शुरू हुई आबादी ने पूरे द्वीप पर कब्जा कर लिया? साइंस एडवांसेज में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट ने इस रहस्य से पर्दा उठा दिया है। इस शोध से पता चला है कि इस सांप के डीएनए (DNA) के गहरे पन्नों में आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity) का एक ऐसा गुप्त रहस्य छिपा हुआ था, जिसे पुरानी तकनीकें कभी पकड़ ही नहीं सकीं। सिर्फ एक प्रजाति के सांपों की तेजी से हुई वृद्धि और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर बफेलो यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ट्रेवर क्रैबेनहोफ्ट, डॉ. क्रिस्टोफर ओसबोर्न, डॉ. लेवी ग्रे और यूएसजीएस (USGS) के वैज्ञानिकों ने अध्यन किया है।
ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण प्रशांत क्षेत्र के जंगलों में पाया जाने वाला भूरा वृक्षीय सांप (Brown Tree Snake) दिखने में भले ही एक आम सरीसृप लगे, लेकिन इसकी आक्रामक प्रवृत्ति बेजोड़ है। माना जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के ठीक बाद 1940 के दशक के बाद यह सांप गलती से अमेरिकी सैन्य माल वाहक विमानों या जहाजों के सामान में छिपकर गुआम द्वीप पर पहुंच गया। इस भूरे रंग के सांप के आगमन से गुआम द्वीप का काला अध्याय शुरू हो गया।
गुआम का पर्यावरण इस भूरे रंग के सांप के लिए स्वर्ग साबित हुआ, क्योंकि वहां इसका शिकार करने वाला कोई बड़ा शिकारी जीव मौजूद नहीं था। कुछ ही दशकों के भीतर इस सांप ने गुआम के जंगलों के लगभग सभी देशी वन पक्षियों (Native Forest Birds) का शिकार करके उन्हें विलुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया।
गुआम द्वीप पर परदेश से आया भूरे रंग का सांप केवल वनों तक सीमित नहीं रहा। इस सांप की वजह से इंसानी जीवन भी प्रभावित हुआ। यह सांप बिजली के खंभों, ट्रांसफॉर्मर और तारों पर चढ़ने में माहिर है। नतीजा यह है कि गुआम में हर साल सैकड़ों बार बड़े पैमाने पर बिजली कटौती (Power Outages) केवल इन सांपों की वजह से होती है।
पेड़ पर रहने वाले भूरे रंग के सांप की गुआम द्वीप पर आबादी काफी तेजी से बढ़ी। अमेरिका के नियंत्रण वाले इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सांपों का घनत्व बढ़कर प्रति वर्ग मील 30,000 सांपों तक पहुंच गया है। भूरे रंग की प्रजाति वाले इन सांपों पर जीवविज्ञान का बुनियादी नियम जिसे आनुवंशिक अवरोध (Genetic Bottleneck) कहते हैं, वह भी फेल हो गया।
वैज्ञानिक दृष्टि से जब नई जगह पर किसी प्रजाति के केवल 2, 4 या मुट्ठी भर जीव पहुंचते हैं तो उनकी आने वाली पीढ़ियां आपस में ही प्रजनन करती हैं। इसके कारण उनकी आनुवंशिक भिन्नता खत्म हो जाती है। कम आनुवंशिक विविधता वाली प्रजातियां बीमारियों, जलवायु परिवर्तन या पर्यावरणीय झटकों को झेल नहीं पातीं और धीरे-धीरे लुप्त हो जाती हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि गुआम द्वीप पर आनुवंशिक अवरोध (Genetic Bottleneck) की थ्योरी के मुताबिक, नए स्थान से आए भूरे रंग के सांप को लुप्त हो जाना चाहिए था।
वैज्ञानिकों का मानना था कि गुआम द्वीप पर इस विशाल आबादी की शुरुआत शायद केवल 2 या 3 सांपों से हुई थी। इतनी कम संख्या से शुरू हुई आबादी को कमजोर होकर खत्म हो जाना चाहिए था। लेकिन भूरे वृक्षीय सांप ने विज्ञान के सभी अनुमानों और उम्मीदों को फेल कर दिया। यह सांप न केवल जीवित रहा, बल्कि इसकी संख्या बहुत तेजी से बढ़ी। वैज्ञानिक सालों तक सोचते रहे कि यह प्रजाति आनुवंशिक तबाही (Genetic Depression) से कैसे बच निकली?
बफेलो विश्वविद्यालय (University at Buffalo) के नेतृत्व में, यूनिवर्सिटी ऑफ इंग्लैंड और US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के शोधकर्ताओं ने गुआम द्वीप पर पल रहे भूरे रंग के सांपों की प्रजाति पर अध्यन किया। जब शोधकर्ताओं की टीम ने USGS की 'ब्राउन ट्री स्नेक रैपिड रिस्पांस टीम' द्वारा एकत्र किए गए सांपों के DNA के नमूनों का विश्लेषण किया तो उनके सामने हैरान कर देने वाला सच आया। जांच में पता चला कि इस भूरे रंग के सांप के जीनोम में 19,000 से भी अधिक संरचनात्मक भिन्नताएं (Structural Variants) पाई गईं।
शोधकर्ता लेवी ग्रे के मुताबिक, DNA के यह खंड या तो बार-बार दोहराए गए थे या पूरी तरह से हटा दिए गए थे, अथवा उनके स्थान बदल दिए गए थे। कुल मिलाकर ये संरचनात्मक भिन्नताएं DNA के एकल अक्षरों (Base Pairs) में होने वाले बदलावों की तुलना में जीनोम के 8 गुना अधिक हिस्से को प्रभावित करती हैं। यानी कि जिस सांप को वैज्ञानिक आनुवंशिक रूप से कमजोर और एक जैसा मान रहे थे, उसके DNA के अंदर विविधता का एक विशाल महासागर मौजूद था।
वैज्ञानिकों ने सांपों पर गहन अध्यन के लिए लॉन्ग-रीड सीक्वेंसिंग (Long-Read Sequencing) नाम की अत्याधुनिक आनुवंशिक तकनीकी का इस्तेमाल किया। यह तकनीकी जीनोम के बहुत बड़े और निरंतर टुकड़ों की जांच करती है। इससे 50 बेस पेयर या उससे अधिक बड़े DNA खंडों में हुए बदलाव, जिन्हें संरचनात्मक भिन्नताएं (Structural Variations) कहा जाता है, उनका पता लगाना संभव हो जाता है। वहीं, पुरानी तकनीक (Short-Read Sequencing) DNA को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर केवल सिंगल बेस पेयर के बदलावों को देख पाती थी, जैसे- A का G में बदलना)।
गुआम द्वीप पर कब्जा करने वाले सांपों में प्रतिरक्षा और सूंघने की अद्भुत क्षमता पाई गई। ये विशेषताएं 19,000 से अधिक संरचनात्मक भिन्नताएं जीनोम में बेतरतीब ढंग से नहीं फैली थीं। वे विशेष रूप से सांप के दो मुख्य तंत्रों पर केंद्रित थीं।
1- प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System): इसके कारण यह सांप नई बीमारियों और संक्रमणों के प्रति बेहद प्रतिरोधी (Resilient) बन गया।
2- गंध महसूस करने वाले जीन (Olfactory Genes): इसके सूंघने के तंत्र से जुड़े डीएनए में भारी विविधता देखी गई।
भूरे वृक्षीय सांप शिकार खोजने और रास्ता तलाशने के लिए अपनी दोमुंही जीभ का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वे हवा में मौजूद रासायनिक कणों को सूंघते हैं। यह सांप अपने मूल निवास स्थान (ऑस्ट्रेलिया आदि) में अक्सर दूसरे सांपों को भी खा जाते हैं। लेकिन गुआम में, जहां लाखों सांप बेहद तंग जगह में रह रहे हैं। वहां वे एक-दूसरे का शिकार नहीं करते हैं।
गुआम द्वीप पर पाए जाने वाले भूरे रंग के वृक्षीय सांप पर किए गए अध्यन के मुख्य लेखक क्रिस्टोफर ओसबोर्न ने अहम जानकारी दी है। क्रिस्टोफर ओसबोर्न के मुताबिक, इन सांपों को दूसरे द्वीपों पर फैलने के लिए प्रयास जारी हैं। इन सांपो के DNA में इस छिपे लचीलेपन (Genetic Flexibility) का मतलब है कि यह इंसानी नियंत्रण के उपायों, जहर या पर्यावरणीय बदलावों के खिलाफ हमारी सोच से कहीं अधिक मजबूत और प्रतिरोधी हो सकता है।
यह संभव है कि लुप्तप्राय प्रजातियों के जीनोम में हमारी समझ से कहीं अधिक लचीलापन छिपा हो। अब जब हम आनुवंशिक विविधता के इन अनदेखे स्रोतों (Structural Variants) को मापने लगे हैं तो यह समझने में मदद मिल रही है कि कैसे अत्यधिक अंतर्विवाहित प्रजातियां भी अपने बदलते पर्यावरण के अनुकूल ढल सकती हैं।
गुआम द्वीप पर पहुंचने के बाद ही उसमे विविधता विकसित हुई है या नहीं। वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब खोजने में लगे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, आमतौर पर जीनोम में इतने बड़े बदलावों को विकसित होने में हजारों साल और कई पीढ़ियां लगती हैं। हालांकि, कुछ नए अध्ययन यह भी बताते हैं कि जब किसी आबादी पर अचानक बहुत बड़ा संकट या बदलाव आता है (Population Bottleneck) तो उनका जीनोम खुद को बचाने के लिए आनुवंशिक बदलावों की गति को तेज कर सकता है।