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सामान्य अपराधों में 6 फीसदी की कमी, साइबर अपराध 27% बढ़ा! कैसे रहें सुरक्षित?

भारत में पारंपरिक अपराधों में गिरावट के बीच साइबर अपराधों का बढ़ता ग्राफ एक चिंताजनक हालात है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट इस बदलाव की तस्वीर स्पष्ट करती है। आइए समझते हैं कि यह बदलाव क्या है, क्यों हो रहा है और इसका आम लोगों के लिए क्या मायने हैं।
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Jul 31, 2026
Cyber Crime
साइबर अपराधों में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। (Photo: ChatGpt)

NCRB की "Crime in India 2024" रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल दर्ज संज्ञेय अपराधों की संख्या 2023 के लगभग 62.41 लाख से घटकर 2024 में 58.86 लाख हो गई, यानी लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसी अवधि में अपराध दर प्रति लाख आबादी 448 से घटकर 419 हो गई, जो 2019 के बाद का सबसे कम स्तर है।

डिजिटल अपराध में 18 फीसदी की बढ़ोतरी

लेकिन इसी रिपोर्ट में साइबर अपराधों का ग्राफ विपरीत दिशा में बढ़ता दिखता है। 2023 में 86,420 साइबर अपराध दर्ज हुए थे, जो 2024 में बढ़कर 1,01,928 हो गए, यानी लगभग 18 प्रतिशत की वृद्धि। कुछ रिपोर्टों में यह वृद्धि 17 प्रतिशत बताई गई है, जो आंकड़ों के अनुसार लगभग मेल खाती है।

साइबर अपराधों का बढ़ रहा है तेजी से ग्राफ

साइबर अपराधों में सबसे बड़ा हिस्सा धोखाधड़ी (fraud) का है। 2024 में दर्ज कुल 1,01,928 मामलों में से 73,987 मामले धोखाधड़ी से जुड़े थे, यानी लगभग 72.6 प्रतिशत। इसके बाद यौन शोषण (3,190 मामले), ब्लैकमेल/उत्पीड़न (2,488–2,536 मामले), बदनामी (2,231 मामले) और व्यक्तिगत बदला (1,850 मामले) जैसे अन्य कारण रहे।

तेलंगाना में सबसे ज्यादा बढ़े साइबर अपराध

राज्यवार आंकड़ों में तेलंगाना सबसे आगे रहा, जहां साइबर अपराधों की संख्या 2023 के 18,236 से बढ़कर 2024 में 27,230 हो गई। लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि। इसके बाद कर्नाटक (21,003 मामले), उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र प्रमुख राज्य हैं।

मेट्रो शहरों में भी साइबर अपराध बढ़े

19 मेट्रो शहरों में कुल अपराधों में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई (2024 में 8.4 लाख मामले, 2023 में 9.4 लाख), लेकिन साइबर अपराधों में वृद्धि देखी गई। मुंबई में कुल अपराधों, महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध अपराधों और साइबर अपराधों में वृद्धि हुई, जबकि अन्य अपराधों में गिरावट रही।

क्या यह बदलाव केवल रिपोर्टिंग में सुधार का परिणाम है?

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल शिकायत पोर्टल्स और जागरूकता बढ़ने से साइबर अपराधों की रिपोर्टिंग में वृद्धि हुई है। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यह केवल रिपोर्टिंग नहीं, बल्कि अपराध की प्रकृति में बदलाव है। SBI की रिपोर्ट के अनुसार, सार्वजनिक निवेश, निगरानी और डिजिटलीकरण से पारंपरिक अपराधों में गिरावट आई है, लेकिन साइबर अपराधों का हिस्सा बढ़कर अब IPC अपराधों का लगभग 6 प्रतिशत हो गया है।

क्या यह आम लोगों के लिए चिंता का विषय है?

निश्चित रूप से यह बहुत बड़ी चिंता का विषय है। डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन बैंकिंग और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग के साथ, धोखाधड़ी, फर्जी वेबसाइट, डिजिटल गिरफ्तारी घोटाले (जहां झूठे पुलिस अधिकारी फोन कर कहते हैं कि आप या आपके प्रियजन गिरफ्तार हो रहे हैं), म्यूल अकाउंट फ्रॉड जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं। ये अपराध सीधे आपके बैंक खाते, पहचान और मानसिक शांति को निशाना बनाते हैं।

इसके अलावा, शिकायतों की जांच और मुकदमेबाजी में देरी भी एक बड़ी समस्या है। 2024 में दर्ज 1,01,928 मामलों में से लगभग 61.6 प्रतिशत मामले जांच के लिए लंबित थे, और 75,000 मामले अदालतों में विचाराधीन थे। यानी, शिकायत दर्ज होने के बाद भी नतीजे तक पहुंचना लंबा और कठिन है।

क्या सरकार इसके समाधान के लिए कुछ कर रही है?

जी हां। गृह मंत्रालय ने 'इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर' (I4C) स्थापित किया है, जिसके तहत 'नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल' (NCRP) और 'सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम' (CFCFRMS) जैसे प्लेटफॉर्म शुरू किए गए हैं। CFCFRMS के माध्यम से जून 2026 तक 32.80 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, और 11,158 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि बचाई गई। साथ ही, '1930' टोल-फ्री हेल्पलाइन भी शुरू की गई है।

क्या यह पर्याप्त है?

यह एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। शिकायत दर्ज करने के बाद कार्रवाई, जांच और न्याय तक पहुंचने की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होनी चाहिए। साथ ही, आम लोगों में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाना, बैंकिंग व्यवहार में सतर्कता और डिजिटल लेन-देन में सावधानी आवश्यक है।

साइबर अपराध में कमी के लिए करने होंगे ये काम

सरकार को साइबर फोरेंसिक लैब्स और पुलिस स्टेशनों की संख्या बढ़ानी होगी, विशेषकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में। साथ ही, शिकायतों के निपटारे की गति बढ़ाने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग और केस मैनेजमेंट सिस्टम को मजबूत करना होगा। आम पाठक को चाहिए कि वे ऑनलाइन लेन-देन में दो-चरणीय प्रमाणीकरण (2FA), सुरक्षित पासवर्ड का उपयोग करें, और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से सतर्क रहें।

यह बदलाव केवल आंकड़ों का नहीं, बल्कि अपराध की प्रकृति का बदलाव है। पारंपरिक अपराधों में गिरावट अच्छी खबर है, लेकिन साइबर अपराधों का बढ़ता ग्राफ हमें यह याद दिलाता है कि सुरक्षा अब स्क्रीन पर भी उतनी ही आवश्यक है, जितनी सड़क पर। अपने डिजिटल जीवन की सुरक्षा के लिए जागरूक और सतर्क रहना अब हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

Updated on:
31 Jul 2026 10:57 am
Published on:
31 Jul 2026 10:57 am