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सड़क दुर्घटना के बाद आपके एक सही कदम से बच सकती है जान, जानिए क्या कहता है कानून

Road Accident Response Guide : सड़क दुर्घटना होने पर तुरंत क्या करें? जानें Good Samaritan Law के तहत मददगारों के कानूनी अधिकार, बीमा क्लेम की सही प्रक्रिया और हिट एंड रन मामलों में मुआवजा पाने के नियम।
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Road Accident Response Guide

Road Accident Response Guide : घायल को अस्पताल पहुंचाने पर फंसेंगे नहीं, जानें क्या है Good Samaritan Law, PC- Patrika

भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। ऐसे समय में सही जानकारी होने से न केवल किसी की जान बचाई जा सकती है, बल्कि कानूनी और वित्तीय परेशानियों से भी बचा जा सकता है। जानिए दुर्घटना होने पर क्या करना चाहिए, Good Samaritan Law क्या है, बीमा क्लेम कैसे मिलता है और हिट एंड रन मामलों में मुआवजे का नियम क्या है।

दुर्घटना होते ही सबसे पहले खुद और आसपास मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। वाहन से बाहर निकलना सुरक्षित लगे तभी बाहर आएं, और यदि संभव हो तो हैजर्ड लाइट (Hazard Light) चालू कर दें ताकि पीछे से आने वाले वाहनों को सतर्क किया जा सके।
इसके बाद घायल की मदद करना सबसे जरूरी कदम है। एम्बुलेंस के लिए 108 या 112 पर कॉल करें और गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की कोशिश करें। अगर गर्दन या रीढ़ की चोट का शक हो तो घायल को हिलाने-डुलाने में विशेष सावधानी बरतें।

साथ ही घटना के सबूत सुरक्षित रखना न भूलें। दुर्घटना स्थल की फोटो और वीडियो लें, वाहन नंबर, समय और स्थान नोट करें, और वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के संपर्क विवरण ले लें। गंभीर चोट, मौत, हिट एंड रन या बड़े नुकसान की स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचना देकर नजदीकी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराएं।

Good Samaritan Law क्या है?

Good Samaritan Law (गुड सेमेरिटन कानून) का उद्देश्य सड़क दुर्घटना के घायलों की मदद करने वाले लोगों को कानूनी सुरक्षा देना है। इस कानून के तहत घायल को अस्पताल पहुंचाने वाला व्यक्ति कानूनी कार्रवाई से सुरक्षित रहता है, और पुलिस या अस्पताल उसे अनावश्यक रूप से रोक नहीं सकते। मदद करने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जा सकती है, वह चाहे तो गवाह बनने से इनकार कर सकता है, और अस्पताल उसे प्राथमिक उपचार देने से मना नहीं कर सकता।

यह सुप्रीम कोर्ट द्वारा 30 मार्च 2016 को दिए गए आदेश (Save Life Foundation v. Union of India) से जारी दिशा-निर्देश हैं, जिन्हें अनुच्छेद 141 के तहत 'कानून का बल' दिया गया। यह संसद द्वारा पारित कोई अलग औपचारिक अधिनियम नहीं है। बाद में इन्हें मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134A में भी शामिल किया गया।

घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले के अधिकार

इस कानून के तहत अस्पताल पहले पुलिस केस दर्ज होने का इंतजार नहीं कर सकता, इलाज शुरू करने से पहले पैसे जमा कराने की शर्त नहीं रख सकता, और मददगार व्यक्ति को बार-बार थाने या अदालत बुलाने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। दूसरी तरफ, मददगार व्यक्ति अपनी इच्छा से नाम और संपर्क जानकारी दे सकता है, वह तुरंत अस्पताल से जा सकता है, और उसे किसी कानूनी जिम्मेदारी का सामना नहीं करना पड़ता।

दुर्घटना के बाद बीमा क्लेम कैसे करें?

दुर्घटना के बाद बीमा कंपनी को तुरंत सूचना देना जरूरी है। अधिकांश कंपनियां 24 से 48 घंटे के भीतर सूचना देने की सलाह देती हैं, और यह हेल्पलाइन, ऐप या वेबसाइट के माध्यम से दी जा सकती है। इसके लिए एफआईआर (जरूरत पड़ने पर), ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी (Registration Certificate), बीमा पॉलिसी की कॉपी, दुर्घटना की फोटो-वीडियो, और अस्पताल के बिल व मेडिकल रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज जुटाने होते हैं।

इसके बाद बीमा कंपनी वाहन का सर्वे कराती हैं, इसलिए सर्वे पूरा होने से पहले बड़े मरम्मत कार्य से बचना चाहिए। क्लेम के निपटान में कैशलेस गैरेज में सीधे भुगतान की सुविधा मिल सकती है, जबकि अन्य मामलों में प्रतिपूर्ति (Reimbursement) की जाती है।

पुलिस को कब सूचना देना जरूरी है?

किसी व्यक्ति की मौत हो गई हो, गंभीर चोट लगी हो, हिट एंड रन का मामला हो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान हुआ हो, वाहन चोरी या संदिग्ध गतिविधि जुड़ी हो, या बीमा कंपनी एफआईआर की मांग कर रही हो। इन सभी स्थितियों में तुरंत पुलिस को सूचना देनी चाहिए।

हिट एंड रन और मुआवजा

जब कोई वाहन दुर्घटना करके मौके से भाग जाए और चालक की पहचान न हो सके, तो उसे हिट एंड रन मामला कहा जाता है। मोटर वाहन अधिनियम के तहत ऐसे पीड़ितों को सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा दिया जाता है। दुर्घटना में मृत्यु होने पर ₹2 लाख और गंभीर घायल होने की स्थिति में ₹50,000। मुआवजा पाने के लिए पुलिस रिपोर्ट दर्ज कराना, निर्धारित प्राधिकरण के पास आवेदन करना, और मेडिकल व अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करना जरूरी होता है।

Compensation to Victims of Hit and Run Motor Accidents Scheme, 2022 के तहत 1 अप्रैल 2022 से मृत्यु पर ₹2,00,000 और गंभीर चोट पर ₹50,000 का निश्चित मुआवजा (Motor Vehicles Accident Fund से) लागू है। यह मोटर वाहन अधिनियम, 2019 की धारा 161 पर आधारित है और वाहन का पता न चलने पर भी देय है। पुरानी सोलेशियम स्कीम, 1989 (₹25,000 / ₹12,500) की जगह इसे लागू किया गया।

एक नजर में समझें

सवालजवाब
🚑 दुर्घटना के बाद पहला कदम?घायल की मदद करें और एम्बुलेंस (108/112) बुलाएं
⚖️ Good Samaritan Law क्या है?मददगारों को कानूनी सुरक्षा देने वाला प्रावधान
🏥 क्या अस्पताल इलाज से मना कर सकता है?❌ नहीं
📄 बीमा क्लेम के लिए क्या चाहिए?पॉलिसी, RC, DL, फोटो, FIR आदि
☠️ हिट एंड रन में मृत्यु पर मुआवजा?💰 ₹2 लाख
🚑 गंभीर चोट पर मुआवजा?💰 ₹50,000
📜 Good Samaritan प्रावधान कहां शामिल है?मोटर वाहन अधिनियम, धारा 134A